विकासनगर (देहरादून): उत्तराखंड के विकासनगर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस और आम जनता को बड़ी चुनौती दी है। यहाँ एक शख्स की मेहनत की कमाई पर साइबर ठगों ने 'RBI अधिकारी' बनकर डाका डाला है। ठगों ने इतनी सफाई से जाल बिछाया कि पीड़ित ने स्वयं अपने हाथों से करीब सवा 30 लाख रुपए ठगों के खातों में जमा कर दिए। पुलिस ने अब इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल?
मामला विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के मलूकावाला का है। यहाँ के निवासी विनोद कुमार, जो स्थानीय मंडी में आढ़त का काम करते हैं, ठगों के अगले शिकार बने। विनोद कुमार के मुताबिक, ठगी की शुरुआत 5 जनवरी 2026 को एक अनजान फोन कॉल से हुई। फोन करने वाले ने बड़े आत्मविश्वास के साथ खुद को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का कर्मचारी बताया।
'पॉलिसी रिलीज' और 'कैपिटल गेन टैक्स' का झांसा
ठग ने विनोद कुमार को विश्वास में लेते हुए कहा कि उनकी एक पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी की फाइल रुकी हुई है, जिसके पैसे रिलीज होने हैं। इसके बाद ठगों ने पीड़ित को अपनी बातों में उलझाया और 'कैपिटल गेन टैक्स' और 'सरकारी बॉन्ड' दिलाने के नाम पर सरकारी प्रक्रियाओं का डर दिखाया। विनोद कुमार को लगा कि यह एक वैध सरकारी प्रक्रिया है और वे ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में अलग-अलग किश्तों में पैसे जमा करते रहे।
घटना का विवरण: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| पीड़ित का नाम | विनोद कुमार (मंडी आढ़ती) |
| ठगी की राशि | ₹30,25,000 (लगभग सवा 30 लाख) |
| ठगों का भेष | फर्जी RBI कर्मचारी |
| ठगी का बहाना | पॉलिसी पैसे रिलीज और कैपिटल गेन टैक्स |
| पुलिस स्टेशन | कोतवाली विकासनगर |
| वर्तमान स्थिति | मुकदमा दर्ज, साइबर सेल द्वारा जांच जारी |
जब तक अहसास हुआ, तब तक लुटे सवा 30 लाख
पीड़ित विनोद कुमार ने बताया कि जब उन्होंने बार-बार पैसे जमा करने के बाद अपनी पॉलिसी के बारे में पूछा, तो ठगों ने फोन उठाना बंद कर दिया और जल्द ही उनके मोबाइल नंबर भी बंद हो गए। तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर गिरोह के जाल में फंस चुके हैं। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना विकासनगर पुलिस को दी।
पुलिस की कार्रवाई और अधिकारियों का बयान
- मुकदमा दर्ज: प्रभारी निरीक्षक कोतवाली विकासनगर विनोद गुसाईं ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर अज्ञात ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
- साइबर सेल की मदद: पुलिस अब उन बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इस कार्य में देहरादून साइबर सेल की विशेष मदद ली जा रही है।
- बाइट (प्रभारी निरीक्षक): विनोद गुसाईं ने कहा कि अपराधियों ने जिस तरीके से इस घटना को अंजाम दिया है, वह तकनीकी रूप से एडवांस लग रहा है। जल्द ही आरोपियों को ट्रेस कर लिया जाएगा।
- सतर्कता की अपील: पुलिस ने जनता से अपील की है कि RBI या कोई भी बैंक कभी भी पॉलिसी के नाम पर या टैक्स के नाम पर फोन पर पैसों की मांग नहीं करता है।
आपकी सावधानी ही आपकी सुरक्षा
विकासनगर की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि साइबर अपराधी अब केवल बैंक लिंक नहीं भेज रहे, बल्कि वे सरकारी अधिकारी बनकर लोगों का विश्वास जीत रहे हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन पर अपनी वित्तीय जानकारी न दें और न ही टैक्स के नाम पर किसी निजी खाते में पैसे जमा करें।
