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जीवनदान का महा-अभियान: एम्स ऋषिकेश में अंगदान के प्रति बढ़ी जागरूकता; 3 वर्षों में 22 किडनी ट्रांसप्लांट कर रचा इतिहास


Aapki Media AI


ऋषिकेश | 18 अप्रैल, 2026: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में 'अंगदान' को महादान की संज्ञा दी गई है। देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स ऋषिकेश (AIIMS Rishikesh) ने इस दिशा में एक नई इबारत लिखी है। संस्थान द्वारा चलाए जा रहे 'सतत जनजागरुकता अभियान' का ही परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में यहाँ अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया ने न केवल गति पकड़ी है, बल्कि 22 परिवारों को नया जीवन भी प्रदान किया है।

एम्स ऋषिकेश ने रचा इतिहास! 3 साल में 22 लोगों को मिला 'जीवनदान'
नोट यहाँ फोटो AI द्वारा निर्मित है

1. किडनी ट्रांसप्लांट: सफलताओं का सफर (2023-2026)

एम्स ऋषिकेश में किडनी ट्रांसप्लांट की औपचारिक शुरुआत अप्रैल 2023 में हुई थी। नेफ्रोलॉजी विभाग की फैकल्टी डॉ. शैरोन कंडारी और यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल के नेतृत्व में संस्थान ने साल-दर-साल नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं:

  • वर्ष 2023: शुरुआत के पहले वर्ष में दो सफल प्रत्यारोपण किए गए।
  • वर्ष 2024: जागरूकता बढ़ने के साथ संख्या बढ़कर 06 हुई।
  • वर्ष 2025: यह वर्ष संस्थान के लिए ऐतिहासिक रहा, जहाँ कुल 14 सफल ट्रांसप्लांट किए गए। अकेले दिसंबर माह में ही 04 मरीजों को नई जिंदगी मिली।
  • कुल उपलब्धि: अब तक कुल 22 सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, जिनमें मरीजों के परिजनों ने अंगदान कर अपने प्रियजनों को गंभीर बीमारी से उबारा है।

2. केडवरिक ऑर्गन डोनेशन: मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का संकल्प

एम्स ऋषिकेश में पिछले दो वर्षों में 'ब्रेन डेड' घोषित किए गए दो व्यक्तियों के परिजनों ने असीम साहस दिखाते हुए अंगदान का निर्णय लिया, जिससे देश के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों की जान बचाई गई।

  1. सचिन (अगस्त 2024): कांवड़ यात्रा के दौरान दुर्घटना का शिकार हुए 25 वर्षीय सचिन को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनकी किडनी, पेनक्रियाज, लीवर और कॉर्निया का दान किया गया। इनके अंग पीजीआई चंडीगढ़ और आईएलबीएस दिल्ली भेजे गए।
  2. रघु (जनवरी 2026): सड़क दुर्घटना में घायल रघु के परिजनों ने उनके अंगदान का फैसला लिया। उनके हृदय को दिल्ली के आर.आर. हॉस्पिटल और अन्य अंगों को दिल्ली एम्स व पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया।

3. 'ऋषिकेश आई बैंक': रोशनी बाँटने का केंद्र

एम्स ऋषिकेश का आई बैंक न केवल संस्थान बल्कि अन्य अस्पतालों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। आई बैंक के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं:

विवरणसंख्या (2019 - 2026)
कुल प्राप्त कॉर्निया1246
कुल प्रत्यारोपित कॉर्निया619
अन्य अस्पतालों को वितरित308

वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में सर्वाधिक 238 कॉर्निया प्राप्त किए गए, जबकि 2022 में सबसे अधिक 144 कॉर्निया प्रत्यारोपित किए गए।

4. देहदान और संकल्प: सामाजिक सरोकार

संस्थान में मेडिकल शिक्षा के लिए देहदान (Body Donation) का सिलसिला भी बढ़ रहा है।

  1. कुल देहदान (2012-2026): 101 देह प्राप्त हुईं।
  2. संकल्प पत्र: अब तक 115 लोगों ने अपनी मृत्यु के बाद देहदान का औपचारिक संकल्प लिया है।
  3. डेड बॉडी ट्रांसपोर्ट: वर्ष 2018 से अब तक 54 शवों के परिवहन में मदद की गई है, जिनमें लंदन, कनाडा और सिंगापुर के विदेशी नागरिकों के शव भी शामिल हैं।

5. विशेषज्ञ मत: "अंगदान है जीवनरक्षक कार्य"

एम्स ऋषिकेश की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव शरीर के अंग जैसे हृदय, गुर्दे, यकृत और फेफड़े खराब होने पर 'प्रत्यारोपण' ही जीवन बचाने का एकमात्र विकल्प रह जाता है।

"भारत में बड़ी संख्या में मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। अंगदान की कमी के कारण कई लोग समय पर उपचार नहीं पा पाते। एम्स का लक्ष्य समाज में इस भ्रांति को दूर करना और लोगों को अंगदान के प्रति प्रेरित करना है, ताकि एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके अंग कई लोगों को स्वस्थ जीवन दे सकें।" — प्रो. मीनू सिंह, निदेशक, एम्स ऋषिकेश

एम्स ऋषिकेश का यह सफर केवल चिकित्सा आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की उम्मीदों का प्रतिबिंब है जिन्होंने अपनों को खोकर भी दूसरों को बचाने का जज्बा दिखाया। संस्थान का यह 'सतत जनजागरुकता अभियान' भविष्य में और भी अधिक जीवन बचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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