बद्री विशाल के जयकारों से गूंजी तीर्थनगरी: ऋषिकेश पहुंची 'गाडू घड़ा' तेल कलश यात्रा; पहली बार रामलीला मैदान में हुए दिव्य दर्शन

ऋषिकेश, 09 अप्रैल 2026: भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने की सदियों पुरानी परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम आज तीर्थनगरी ऋषिकेश में देखने को मिला। नरेंद्रनगर राजदरबार से शुरू हुई पावन गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा अपने पड़ाव पर ऋषिकेश पहुंची, जहाँ हजारों श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ चांदी के कलश के दर्शन किए।

बद्री विशाल के जयकारों से गूँजी तीर्थनगरी: ऋषिकेश पहुंची 'गाडू घड़ा' तेल कलश यात्रा!

यात्रा का विवरण: परंपरा और ऐतिहासिक बदलाव

विवरणमहत्वपूर्ण तथ्य 
प्रस्थान स्थलनरेंद्रनगर राजदरबार
मुख्य पड़ावबनखंडी स्थित रामलीला ग्राउंड, ऋषिकेश
ऐतिहासिक बदलावदशकों बाद चेला चेतराम धर्मशाला के बजाय रामलीला मैदान पहुंची यात्रा।
प्रमुख उपस्थितिशंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद, पूर्व सीएम हरीश रावत।
अगला गंतव्यविभिन्न पहाड़ी पड़ावों से होते हुए श्री बद्रीनाथ धाम।
महत्वकलश के तेल से होगा भगवान बद्रीनाथ का अभिषेक।

दशकों पुरानी परंपरा में नया अध्याय

इस वर्ष गाडू घड़ा यात्रा में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। दशकों से यह यात्रा ऋषिकेश पहुंचने पर चेला चेतराम धर्मशाला में विश्राम करती थी, लेकिन इस बार यह पहली बार बनखंडी स्थित रामलीला ग्राउंड पहुंची। सुबह से ही बनखंडी क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। जैसे ही चांदी का कलश कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, पूरा वातावरण 'बद्री विशाल लाल की जय' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

शंकराचार्य और दिग्गजों ने टेका माथा

कलश यात्रा के दर्शनों के लिए केवल स्थानीय नागरिक ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के तीर्थयात्री भी बड़ी संख्या में उमड़े। इस दिव्य यात्रा के साक्षी बनने के लिए ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अवीमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पहुंचे। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और धार्मिक संस्थाओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया।

क्या है 'गाडू घड़ा' का धार्मिक महत्व?

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व यह एक अनिवार्य और पवित्र परंपरा है:तिल का तेल: राजमहल (नरेंद्रनगर) की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक गीतों के बीच तिल का तेल निकालती हैं।

  1. चांदी का कलश: इस तेल को चांदी के कलश (गाडू घड़ा) में भरा जाता है।
  2. अभिषेक: इसी पवित्र तेल से भगवान बद्रीनाथ का पूरे वर्ष अभिषेक और पूजा-अर्चना की जाती है।
  3. सफर: ऋषिकेश से होते हुए यह यात्रा अब पहाड़ी रास्तों से बद्रीनाथ धाम की ओर बढ़ेगी, जो उत्तराखंड की संस्कृति और अटूट आस्था को प्रदर्शित करती है।

कपाट खुलने की बढ़ी प्रतीक्षा

गाडू घड़ा यात्रा का ऋषिकेश पहुंचना इस बात का संकेत है कि भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने का समय अत्यंत निकट है। भक्तों में भारी उत्साह है और प्रशासन भी यात्रा मार्ग की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर मुस्तैद है।

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