यमकेश्वर: श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी; बोले— 'धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बना रही है सरकार'

यमकेश्वर/पौड़ी | 20 अप्रैल, 2026 : मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को यमकेश्वर स्थित वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिभाग किया। इस आध्यात्मिक आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत महापुराण के महत्व तथा प्रदेश में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।

धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बना रही है सरकार

श्रीमद्भागवत श्रीकृष्ण का सजीव स्वरूप

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का सजीव स्वरूप है। उन्होंने कहा:

"भागवत कथा मानव को धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर कर जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। यह हमें सांसारिक बंधनों के बीच नैतिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।"

धार्मिक पर्यटन को मिल रही है नई ऊँचाई

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से उत्तराखंड की धार्मिक यात्रा अब 'सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक' हो गई है। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों को रेखांकित किया:

धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बना रही है सरकार

  1. चारधाम सुदृढ़ीकरण: यात्रा मार्गों के चौड़ीकरण और आधुनिक सुविधाओं के विकास से श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।
  2. महत्वाकांक्षी कॉरिडोर: हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर के माध्यम से धार्मिक पर्यटन के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है।
  3. घाटों का निर्माण: कालसी-हरीपुर क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर भव्य घाटों का निर्माण कार्य गतिमान है।
  4. शैक्षिक पहल: दून विश्वविद्यालय में 'सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज' की स्थापना की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके।

यमकेश्वर के विकास पर स्थानीय विधायक की प्रशंसा

कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्रभावी कार्यशैली और निरंतर प्रयासों के कारण यमकेश्वर क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली है, जिसका सीधा लाभ यहाँ की जनता को मिल रहा है।

संतों का मार्गदर्शन: अध्यात्म और नैतिकता

व्यास पीठ से कथा वाचन कर रहे पूज्य गोविन्द देव गिरी जी महाराज ने भागवत के आध्यात्मिक और नैतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को सत्कर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। वहीं, परमार्थ आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा समाज को नैतिक मूल्यों और मानवता के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम है।

यमकेश्वर का यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना, बल्कि मुख्यमंत्री के संबोधन ने प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के सरकारी संकल्प को भी दोहराया।

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