फर्जीवाड़े पर शिक्षा विभाग का कड़ा प्रहार: फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से नौकरी पाने वाली शिक्षिका बर्खास्त; डोईवाला ब्लॉक का मामला

देहरादून, 08 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने वालों के खिलाफ प्रशासन का अभियान जारी है। ताजा मामला विकासखंड डोईवाला से सामने आया है, जहाँ अनुसूचित जाति (SC) के फर्जी प्रमाण-पत्र के सहारे राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत एक सहायक अध्यापिका की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से नौकरी पाने वाली शिक्षिका बर्खास्त

जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) देहरादून ने जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद यह कड़ी कार्रवाई की है।

बर्खास्तगी की कार्रवाई: मुख्य विवरण 

विवरणजानकारी (Details)
अभियुक्त शिक्षिकाश्रीमती सीमा देवी
पद एवं स्थानसहायक अध्यापिका, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, जोलीग्रांट प्रथम
विकासखंडडोईवाला, देहरादून
आरोपअनुसूचित जाति (SC) का फर्जी जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना
कार्यवाहीसेवा की तत्काल समाप्ति (Terminated with immediate effect)
आदेश जारीकर्ताजिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), देहरादून

जांच में खुला राज: ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

  • दस्तावेजों की जांच: विभाग को शिक्षिका के जाति प्रमाण-पत्र को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • अपात्रता की पुष्टि: जांच में यह स्पष्ट हुआ कि श्रीमती सीमा देवी ने जिस अनुसूचित जाति (SC) के प्रमाण-पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेकर नियुक्ति पाई थी, वह पूर्णतः फर्जी था। वे वास्तव में इस श्रेणी के अंतर्गत नहीं आती थीं।
  • तत्काल बर्खास्तगी: जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने माना कि यह न केवल नियुक्ति की शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि एक योग्य उम्मीदवार का हक मारने जैसा गंभीर अपराध है। परिणामस्वरूप, उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।

विभाग की सख्त चेतावनी

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अन्य उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी सेवा में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। विभाग अब पुराने नियुक्तियों के दस्तावेजों के पुन: सत्यापन (Re-verification) पर भी जोर दे रहा है ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

सुचिता की ओर बढ़ता विभाग

फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी पाना एक गंभीर नैतिक और कानूनी अपराध है। डोईवाला की इस शिक्षिका पर हुई कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि देर-सवेर सच सामने आता ही है और धोखाधड़ी करने वालों को कानून की मार झेलनी ही पड़ती है।

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