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देहरादून | 30 अप्रैल, 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 29 और 30 अप्रैल की मध्यरात्रि एक ऐसी सनसनीखेज वारदात हुई जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के पौंधा रोड पर हुई एक भीषण मुठभेड़ में पुलिस ने ₹50,000 के इनामी और खूंखार अपराधी अकरम को मार गिराया। इस मुठभेड़ के दौरान बदमाशों की ओर से की गई अंधाधुंध फायरिंग में प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौड़ गंभीर रूप से घायल हो गए। यह पूरी घटना एक लूट की वारदात के बाद शुरू हुई, जो अंततः एक शातिर अपराधी के खात्मे के साथ समाप्त हुई।
वारदात की शुरुआत: पौंधा रोड पर लूट और गोलीबारी
घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार रात करीब 10:36 बजे हुई जब पुलिस को 112 के माध्यम से सूचना मिली कि पौंधा रोड पर कुछ हथियारबंद बदमाशों ने एक व्यक्ति को निशाना बनाया है। शिकार बनने वाले व्यक्ति की पहचान देवराज के रूप में हुई, जो ठेकेदारी का काम करते हैं। बदमाशों ने देवराज को गोली मारकर घायल कर दिया और उनसे करीब 2 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, सोने की चैन और महत्वपूर्ण दस्तावेज लूट लिए।
जैसे ही लूट की खबर एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल तक पहुँची, उन्होंने तुरंत पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया और सभी थाना क्षेत्रों में सघन चेकिंग के निर्देश दिए। घायल देवराज को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
एनकाउंटर का घटनाक्रम: जब आमने-सामने आई पुलिस और मौत
एसएसपी के निर्देश पर प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौड़ अपनी टीम के साथ संदिग्धों की तलाश में जुटे थे। इसी दौरान उन्हें एक गुजरात नंबर की कार दिखाई दी, जिसमें तीन संदिग्ध सवार थे। जब पुलिस ने गाड़ी को रुकने का इशारा किया, तो बदमाशों ने खुद को घिरा देख पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जंगल क्षेत्र में हुई इस मुठभेड़ में थाना प्रभारी नरेश राठौड़ को दो गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए टीम का नेतृत्व जारी रखा और जवाबी कार्रवाई का आदेश दिया। पुलिस की ओर से की गई फायरिंग में एक बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसके दो अन्य साथी अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे। घायल बदमाश को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अपराधी अकरम का खौफनाक इतिहास
मुठभेड़ में मारा गया बदमाश अकरम कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली का रहने वाला था और वर्षों से जघन्य अपराधों में लिप्त था। उसके आपराधिक रिकॉर्ड के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- अंकित थपलियाल हत्याकांड (2014): अकरम सितंबर 2014 के चर्चित बालावाला हत्याकांड का मुख्य आरोपी था, जिसमें सहायक कृषि अधिकारी के बेटे अंकित की हत्या कर दी गई थी।
- इनामी अपराधी: इस हत्या के बाद से उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया गया था और वह उत्तराखंड पुलिस की 'मोस्ट वांटेड' सूची में शामिल था।
- पहचान बदलकर फरारी: गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपनी पहचान बदली और गुजरात के राजकोट में ‘सलीम’ नाम से एक ढाबे पर काम करने लगा था।
- दर्जन भर मामले: अकरम के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या, लूट, डकैती और गैंगस्टर एक्ट के एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे।
- संगठित गैंग: वह एक अंतरराज्यीय गैंग का संचालन कर रहा था जो लोकेशन और गाड़ियाँ बदलकर वारदातों को अंजाम देता था।
मुठभेड़ और बरामदगी का विवरण
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद भारी मात्रा में साक्ष्य और लूट का सामान बरामद किया है।
| विवरण | साक्ष्य / जानकारी |
| मारे गए बदमाश का नाम | अकरम (निवासी शामली, यूपी) |
| घायल पुलिस अधिकारी | इंस्पेक्टर नरेश राठौड़ (थाना प्रभारी, प्रेमनगर) |
| बरामद हथियार | पिस्टल और जिंदा कारतूस |
| बरामद वाहन | गुजरात नंबर की कार (वारदात में प्रयुक्त) |
| लूटा गया सामान | ₹2 लाख नकद, मोबाइल, सोने की चैन और दस्तावेज |
| फरार बदमाश | 02 (कांबिंग जारी) |
वर्तमान स्थिति और पुलिस की कार्रवाई
मुठभेड़ के बाद पूरे देहरादून शहर में नाकेबंदी कर दी गई है और हर आने-जाने वाले वाहन की गहनता से जांच की जा रही है। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि फरार बदमाशों की तलाश में पुलिस की कई टीमें जंगल और संभावित ठिकानों पर सघन कांबिंग अभियान चला रही हैं।
- पूरे जिले के थाना क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
- घायल थाना प्रभारी नरेश राठौड़ का इलाज जारी है और पुलिस महानिदेशक सहित अन्य अधिकारियों ने उनके साहस की सराहना की है।
- पुलिस अब अकरम के आपराधिक नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि उसके अन्य सहयोगियों और शरणदाताओं का पता लगाया जा सके।
- अकरम के शव को पोस्टमार्टम के लिए कोरोनेशन अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है।
देहरादून पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों को सख्त संदेश दिया है। अकरम जैसे शातिर अपराधी का खात्मा पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, हालांकि फरार बदमाशों की गिरफ्तारी अभी भी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
