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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। खिर्सू ब्लॉक के सिलाण गांव में एक विवाहिता को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया। जहाँ एक ओर ससुराल पक्ष इसे रसोई का हादसा बता रहा है, वहीं मायके पक्ष ने ससुर पर पेट्रोल छिड़ककर हत्या के प्रयास का बेहद संगीन आरोप लगाया है। इस घटना ने एक बार फिर बेटियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण: 3 दिनों तक छिपाई गई बात
यह मामला जितना दर्दनाक है, उतना ही संदिग्ध भी। घटना 16 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़िता के मायके वालों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई।
मामले की मुख्य कड़ियाँ:
- सूचना का अभाव: 16 अप्रैल को घटना हुई, लेकिन मायके पक्ष को 19 अप्रैल को तब पता चला जब पीड़िता की छोटी भाभी ने हालचाल जानने के लिए फोन किया।
- ससुर पर आरोप: पीड़िता के चाचा किरपाल सिंह का आरोप है कि उमा देवी (पीड़िता) के ससुर ने उन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाई।
- बयान बदलने का दबाव: मायके पक्ष का दावा है कि अस्पताल में भर्ती उमा पर ससुराल वाले लगातार बयान बदलने का दबाव बना रहे हैं।
मामले की वर्तमान स्थिति (क्विक फैक्ट्स)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पीड़िता का नाम | उमा देवी (शादी वर्ष 2020 में संतोष बिष्ट से हुई) |
| घटना स्थल | ग्राम सिलाण, ब्लॉक खिर्सू, जनपद पौड़ी |
| स्वास्थ्य स्थिति | 15% झुलसी हुई, वर्तमान में खतरे से बाहर |
| मुख्य आरोपी (आरोपानुसार) | पीड़िता के ससुर |
| अस्पताल | जिला अस्पताल पौड़ी |
| पुलिस कार्रवाई | मुकदमा दर्ज, जांच जारी (CO श्रीनगर द्वारा) |
अस्पताल की स्थिति: बिना बर्न वार्ड के चल रहा इलाज
पीड़िता का उपचार जिला अस्पताल पौड़ी में चल रहा है। यहाँ एक बड़ी कमी यह सामने आई है कि इतने महत्वपूर्ण अस्पताल में बर्न वार्ड उपलब्ध नहीं है। उमा का इलाज सामान्य वार्ड में ही किया जा रहा है।
डॉ. एलडी सेमवाल (पीएमएस, जिला अस्पताल): "उमा देवी पेट्रोल से 15 फीसदी से अधिक झुलसी हैं। उनके चेहरे, हाथ और पैर प्रभावित हुए हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि वह खतरे से बाहर हैं।"
सियासी और प्रशासनिक हलचल
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक राजकुमार पोरी जिला अस्पताल पहुंचे। चूंकि पीड़िता उन्हीं की ग्राम पंचायत की निवासी है, इसलिए उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। साथ ही, मायके पक्ष ने राज्य महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई है, क्योंकि उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस कार्रवाई में ढिलाई बरत रही है।
पुलिस का पक्ष: हर एंगल से होगी जांच
श्रीनगर के सीओ अनुज कुमार ने बताया कि मामले में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह रसोई में हुआ कोई हादसा था या सुनियोजित हमला। पीड़िता के बयान इस मामले में सबसे अहम कड़ी साबित होंगे।
एक बिन माँ-बाप की बेटी, जिसका विवाह 2020 में सुखद भविष्य के सपने के साथ हुआ था, आज अस्पताल के बिस्तर पर न्याय की भीख मांग रही है। यदि मायके पक्ष के आरोप सही हैं, तो यह समाज के माथे पर कलंक है। क्या ससुर जैसा रिश्ता इतना भयावह हो सकता है? फिलहाल, पूरा उत्तराखंड उमा के जल्द स्वस्थ होने और दोषियों को सजा मिलने की प्रतीक्षा कर रहा है।
