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रुद्रप्रयाग: बाल विवाह की सूचना मिलते ही दौड़ी प्रशासनिक टीम; नाबालिग की सूझबूझ से थमा 'बाल विवाह', विभाग ने इस वर्ष रोके 26 मामले


Aapki Media AI


रुद्रप्रयाग, 15 अप्रैल 2026: धर्मनगरी में एक नाबालिग बालिका की जागरूकता और प्रशासन की तत्परता ने आज एक बड़ी कुप्रथा को होने से पहले ही रोक दिया। मामला रुद्रप्रयाग के तिलवाड़ा क्षेत्र का है, जहां परिजनों द्वारा गुपचुप तरीके से करवाए जा रहे एक नाबालिग के विवाह को महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने नाकाम कर दिया।

नाबालिग की सूझबूझ से थमा 'बाल विवाह', विभाग ने इस वर्ष रोके 26 मामले

घटनाक्रम: कैसे बची मासूम की जिंदगी?

  1. सूचना का स्रोत: स्वयं नाबालिग बालिका ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर संपर्क कर अपनी शादी के बारे में जानकारी दी।
  2. त्वरित कार्रवाई: जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
  3. परिजनों का बहाना: शुरुआती पूछताछ में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के बाद उन्होंने सच्चाई स्वीकार ली।
  4. विवाह का कारण: परिजनों ने बताया कि बालिका के एक युवक से प्रेम प्रसंग के कारण, बालिका के घर से भागने की धमकी से घबराकर उन्होंने यह कदम उठाया था।

कानूनी चेतावनी: बाल विवाह एक दंडनीय अपराध

प्रशासनिक टीम ने परिजनों को स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक कुप्रथा है, बल्कि कानूनन अपराध भी है। उन्हें चेतावनी दी गई कि:

"बाल विवाह में शामिल होने पर दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही, यूसीसी (UCC) के तहत भी इस संदर्भ में अत्यंत सख्त प्रावधान किए गए हैं।"

प्रशासन की चेतावनी के बाद परिजनों ने लड़के पक्ष से तुरंत संपर्क किया और बारात न लाने का संदेश भेजकर विवाह को निरस्त कर दिया। भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की सख्त हिदायत भी दी गई है।

जागरूकता का सकारात्मक परिणाम

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के आंकड़े बेहद उत्साहजनक हैं। विभाग के अनुसार, इस वर्ष अब तक रुद्रप्रयाग जिले में कुल 26 ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर बाल विवाह रोके जा चुके हैं। यह साबित करता है कि जिले में बढ़ती जागरूकता और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सेवाओं का लाभ अब सीधे तौर पर लोगों तक पहुंच रहा है।

बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को समाज से मिटाना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि आपके आसपास ऐसा कोई मामला हो, तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन या अपने नजदीकी महिला सशक्तीकरण विभाग को सूचित करें। आपकी एक कॉल किसी मासूम का भविष्य सुरक्षित कर सकती है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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