देहरादून, 15 अप्रैल 2026: उत्तराखंड में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से की जा रही फीस वृद्धि और एडमिशन के नाम पर हो रही अवैध वसूली के खिलाफ आज महिला कांग्रेस सड़कों पर उतर आई। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सरकारी आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएं
- प्रमुख मांग: निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी, एडमिशन फीस और मासिक शुल्क पर तत्काल लगाम लगाई जाए।
- अनोखा विरोध: महिला कांग्रेस ने विरोध का एक अनूठा तरीका अपनाया। शिक्षा मंत्री के प्रतीकात्मक रूप में एक व्यक्ति को बैठाकर उनसे अभिभावकों के दर्द और फीस के मुद्दों पर तीखे सवाल पूछे गए।
- सरकार पर निशाना: कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार निजी स्कूलों के माफियाओं को संरक्षण दे रही है, जिससे आम अभिभावक आर्थिक बोझ तले दब रहे हैं।
अभिभावकों पर बढ़ रहा है 'आर्थिक बोझ'
प्रदर्शन के दौरान ज्योति रौतेला ने कहा कि उत्तराखंड में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि लंबे समय से एक विवाद का विषय बनी हुई है। हर साल सत्र शुरू होते ही स्कूल बिना किसी ठोस कारण के फीस बढ़ा देते हैं, जबकि शिक्षा विभाग पूरी तरह मूकदर्शक बना रहता है।
उन्होंने आगे कहा:
"अभिभावक पहले ही महंगाई की मार झेल रहे हैं, ऊपर से निजी स्कूलों की यह लूट बर्दाश्त के बाहर है। सरकार निजी स्कूलों पर कोई नियंत्रण नहीं रख पा रही है, जिससे साफ होता है कि उनकी मिलीभगत है। हम सरकार को तब तक चैन से नहीं बैठने देंगे, जब तक फीस पर ठोस पॉलिसी लागू नहीं होती।"
पुलिस से हुई नोक-झोंक
महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम जैसे ही शिक्षा मंत्री के आवास की ओर बढ़ा, वहां तैनात पुलिस बल ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोकने का प्रयास किया। इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी नोक-झोंक भी हुई। अंततः प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स के पास ही धरने पर बैठकर नारेबाजी की और सरकार को चेतावनी दी।
क्या समाधान निकालेगी सरकार?
निजी स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावकों की यह नाराजगी अब सड़कों पर दिखने लगी है। प्रदेश भर में अभिभावक संघों द्वारा भी लगातार शिकायतें की जा रही हैं। सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग अब भी चुप्पी साधे रखेगा या निजी स्कूलों की मनमानी पर कोई कड़ा अंकुश लगाएगा?
महिला कांग्रेस के इस प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था में चल रही इन विसंगतियों को फिर से चर्चा में ला दिया है। अब देखना यह है कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत इस पर क्या कदम उठाते हैं।
