देहरादून/ऋषिकेश, 04 अप्रैल 2026: देवभूमि को अपराध मुक्त बनाने के मिशन के तहत एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह की साइबर टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ऋषिकेश निवासी एक वरिष्ठ नागरिक को व्हाट्सएप कॉल के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' कर और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर ₹69 लाख ठगने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
अभियुक्त ने माननीय न्यायालय के फर्जी दस्तावेज और रसीदें तैयार कर बैंक खाते खुलवाए थे, जिनका उपयोग साइबर अपराध की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
साइबर ठगी केस: अभियुक्त और बरामदगी का विवरण (Case File)
| मुख्य विवरण | जांच और गिरफ्तारी के तथ्य (Key Facts) |
| ठगी की कुल राशि | ₹69,00,000 (69 लाख रुपये) |
| गिरफ्तार अभियुक्त | भगवत सरन (उम्र 33 वर्ष), निवासी: बरेली (UP), हाल: लालकुआं (नैनीताल) |
| अपराध का तरीका | व्हाट्सएप कॉल, 'डिजिटल अरेस्ट' और फर्जी जज/पुलिस बनना |
| गिरफ्तारी का स्थान | रुद्रपुर, उत्तराखंड |
| बरामद माल | मोबाइल (SMS अलर्ट हेतु), 02 डेबिट कार्ड |
| दर्ज मुकदमा | मु०अ०सं०- 05/2026 (BNS एवं IT एक्ट की विभिन्न धाराएं) |
कैसे बुना गया ठगी का जाल? एसटीएफ की जांच के मुख्य बिंदु
- फर्जी इंस्पेक्टर और जज का खेल: साइबर ठगों ने ऋषिकेश निवासी पीड़ित को व्हाट्सएप कॉल कर खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का इंस्पेक्टर और कोर्ट का जज बताया। उन्होंने डराया कि पीड़ित के आधार कार्ड का दुरुपयोग अवैध वित्तीय लेनदेन में हुआ है और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया गया है।
- ₹69 लाख की वसूली: ठगों ने जमानत, एनओसी और प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन के नाम पर पीड़ित को इतना डराया कि उन्होंने अलग-अलग किश्तों में कुल ₹69 लाख ठगों के बताए बैंक खातों में जमा कर दिए।
- रुद्रा टेलीकॉम की आड़ में फर्जीवाड़ा: गिरफ्तार अभियुक्त भगवत सरन ने लालकुआं (नैनीताल) में अपनी 'रुद्रा टेलीकॉम' दुकान के नाम पर एक्सिस बैंक में खाता खोला था। उसने कोर्ट के फर्जी बेल बॉन्ड और रसीदें दिखाकर बैंक को गुमराह किया और इस खाते को अन्य साइबर अपराधियों के साथ साझा किया।
- 30 शिकायतों का रिकॉर्ड: एसटीएफ की जांच में सामने आया कि भगवत सरन के इस बैंक खाते के विरुद्ध NCRP पोर्टल पर पहले से ही 30 शिकायतें दर्ज थीं। अकेले ऋषिकेश के पीड़ित के ₹06 लाख इसी खाते में क्रेडिट हुए थे।
- एसटीएफ टीम की मुस्तैदी: निरीक्षक अनिल कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने डिजिटल साक्ष्यों का पीछा करते हुए अभियुक्त को रुद्रपुर से दबोच लिया। अब एसटीएफ इस गिरोह के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह की जनता से महत्वपूर्ण अपील
साइबर अपराधों से बचने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आमजन को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं: कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस ऑनलाइन वीडियो कॉल के जरिए किसी को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती है। ऐसी कॉल आने पर तुरंत फोन काट दें।
- व्यक्तिगत जानकारी न दें: अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल पर अपनी व्यक्तिगत सूचना या दस्तावेज (आधार, पैन) साझा न करें।
- लालच से बचें: यूट्यूब/टेलीग्राम आधारित निवेश स्कीमों या पैसे दोगुने करने के प्रलोभन में न आएं।
- सीधे कॉल न करें: गूगल से कस्टमर केयर नंबर सर्च कर सीधे कॉल करने से बचें, वहां फर्जी नंबर हो सकते हैं।
- हेल्पलाइन 1930: किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 डायल करें या
www.cybercrime.gov.inपर शिकायत दर्ज करें।
एसटीएफ की पैनी नजर
इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उत्तराखंड एसटीएफ साइबर अपराधियों के लिए काल बन चुकी है। हालांकि, तकनीकी दौर में जनता की जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
