Aapki Media AI
देहरादून, 13 मई, 2026: वैश्विक स्तर पर जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के गहराते संकट ने पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है। ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच उत्तराखंड सरकार ने एक दूरदर्शी कदम उठाया है।
बुधवार को मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और आयात निर्भरता कम करने के लिए कई क्रांतिकारी निर्णय लिए गए। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अमल करते हुए उत्तराखंड अब "छोटे व्यवहारिक बदलावों" के माध्यम से राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।
'नो व्हीकल डे' और वर्क फ्रॉम होम: सरकारी तंत्र से होगी शुरुआत
सरकार ने ईंधन की खपत कम करने के लिए सबसे पहले खुद के तंत्र और कार्यशैली में बदलाव का फैसला किया है।
- फ्लीट में कटौती: मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन बेड़े (फ्लीट) में वाहनों की संख्या तत्काल प्रभाव से आधी (50%) की जाएगी। यह कदम प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ सरकारी खर्च में बड़ी कटौती भी करेगा।
- नो व्हीकल डे: सप्ताह में एक दिन को 'नो व्हीकल डे' घोषित किया गया है। इस दिन मुख्यमंत्री, मंत्री और उच्चाधिकारी सरकारी वाहनों का प्रयोग नहीं करेंगे।
- वर्क फ्रॉम होम (WFH): सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) आधारित बैठकों को प्राथमिकता दी जाएगी। 'नो व्हीकल डे' के दिन अधिकारी घर से ही कार्य करेंगे। साथ ही, निजी क्षेत्र को भी वर्क फ्रॉम होम के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- AC के प्रयोग पर अंकुश: बिजली की बचत के लिए सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर (AC) के उपयोग को सीमित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
परिवहन में बदलाव: 'एक अधिकारी-एक वाहन' और नई ईवी पॉलिसी
परिवहन क्षेत्र में सुधार और ईंधन की निर्भरता घटाने के लिए कैबिनेट ने निम्नलिखित निर्णय लिए हैं:
- संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग: जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभाग हैं, वे अब अलग-अलग वाहनों के बजाय एक दिन में अधिकतम एक ही सरकारी वाहन का इस्तेमाल करेंगे।
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा: परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक बसों की सेवा और क्षमता बढ़ाई जाए ताकि आम जनमानस और सरकारी कर्मचारी निजी वाहनों के बजाय बसों का उपयोग करें।
- ईवी पॉलिसी 2026: राज्य में जल्द ही एक प्रभावी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पॉलिसी लाई जाएगी। अब से खरीदे जाने वाले नए सरकारी वाहनों में 50 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) होना अनिवार्य होगा।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्यभर में चार्जिंग स्टेशनों और नेटवर्क का प्राथमिकता के आधार पर विस्तार किया जाएगा।
कैबिनेट के प्रमुख निर्णयों का सारांश
| क्षेत्र | मुख्य निर्णय / नीति |
| ईंधन बचत | सप्ताह में एक दिन 'नो व्हीकल डे' और मंत्रियों के फ्लीट में 50% कटौती |
| कार्यशैली | वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकें और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा |
| परिवहन | नई ईवी पॉलिसी: 50% सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक होंगे |
| विदेशी यात्रा | सरकारी खर्च पर होने वाली विदेशी यात्राओं को सीमित किया गया |
| ऊर्जा | पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करना |
| स्वास्थ्य | खाद्य तेल की खपत घटाने हेतु "Low-Oil Menu" अभियान |
| कृषि | नेचुरल फार्मिंग और जीरो बजट फार्मिंग का प्रशिक्षण |
पर्यटन और अर्थव्यवस्था: "Visit My State" और सोने पर नियंत्रण
राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार ने अनूठी पहल की है:
- घरेलू पर्यटन: "Visit My State" अभियान के जरिए उत्तराखंड की विरासत, धार्मिक, वेलनेस और ईको-टूरिज्म सर्किट का व्यापक प्रचार किया जाएगा। प्रवासियों और एनआरआई (NRI) को अपनी छुट्टियां उत्तराखंड में बिताने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा।
- डेस्टिनेशन वेडिंग: उत्तराखंड को 'वेडिंग डेस्टिनेशन' के रूप में स्थापित करने के लिए Single Window Clearance की व्यवस्था की जाएगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- स्वर्ण खरीद पर जागरूकता: वैश्विक आर्थिक दबाव को देखते हुए नागरिकों को एक वर्ष तक सोने की खरीद को सीमित करने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के व्यापार घाटे को कम करना है।
स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा: 'लो-ऑयल' मीनू और प्राकृतिक खेती
कैबिनेट ने आम जनमानस के स्वास्थ्य और कृषि लागत कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं:
- खाद्य तेल में कटौती: आयातित खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा की जाएगी। होटलों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को "Low-Oil Menu" अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming): किसानों को रासायनिक उर्वरकों के आयातित दबाव से बचाने के लिए Zero Budget Farming और बायो-इनपुट का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उर्वरकों के संतुलित उपयोग से मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) को सुधारा जाएगा।
स्वच्छ ऊर्जा और फास्ट-ट्रैक प्रोजेक्ट्स
ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने 'मिशन मोड' रणनीति अपनाई है:
- PNG (Piped Natural Gas) और सोलर ऊर्जा: होटलों, रेस्टोरेंट्स और सरकारी आवासों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। PM Surya Ghar Yojana के तहत रूफटॉप सोलर को घर-घर पहुँचाया जाएगा।
- बायोगैस: गोबर गैस को बढ़ावा देने के लिए पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।
- 60 दिन की समयसीमा: खनन (Mining), सोलर और पावर प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में देरी को खत्म करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई-पावर कमेटी (HPC) को 60 दिन के भीतर प्रस्तावों पर अनुमोदन प्रदान करने का आदेश दिया गया है।
"मेरा भारत, मेरा योगदान" अभियान के मुख्य बिंदु
- स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: "Made in State" अभियान के तहत पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष आउटलेट और नीतियां बनाई जाएंगी।
- मेक इन इंडिया: सरकारी खरीद में 'मेक इन इंडिया' नियमों का कड़ाई से पालन होगा, ताकि घरेलू उद्योगों को बल मिले।
- जन-भागीदारी: नागरिकों को ऊर्जा, जल और ईंधन संरक्षण को एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
एक हरित और समृद्ध उत्तराखंड की ओर कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में लिए गए ये निर्णय केवल प्रशासनिक सुधार नहीं हैं, बल्कि एक भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। वाहनों की संख्या कम करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देना, और प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ना—ये सभी कदम एक 'सस्टेनेबल' (सतत) विकास की नींव रखेंगे।
कैबिनेट का यह "उत्तराखंड मॉडल" यदि धरातल पर सही ढंग से लागू होता है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए एक नजीर पेश करेगा। सीएम धामी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वैश्विक संकट के इस दौर में उत्तराखंड "ईंधन बचत और आत्मनिर्भरता" का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
.jpeg)