नर्सिंग भर्ती विवाद: 107 दिन बाद टूटा 'नर्सिंग एकता मंच' का अनशन; स्वास्थ्य महानिदेशक ने शासन को भेजा 'वर्षवार' भर्ती का प्रस्ताव, जानिए क्या हैं शर्तें


Aapki Media AI


देहरादून, 13 मई, 2026: उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में 'नर्सिंग अधिकारी' के पदों पर भर्ती को लेकर पिछले 107 दिनों से चल रहा ऐतिहासिक धरना और अनशन आखिरकार बुधवार को समाप्त हो गया। नर्सिंग एकता मंच की मांगों और महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला के कड़े रुख के आगे झुकते हुए सरकार ने मध्यस्थता का रास्ता चुना है।

नर्सिंग संघर्ष की आंशिक जीत, अब शासन के फैसले पर टिकी नजरें

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के साथ हुई सकारात्मक वार्ता और स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) द्वारा शासन को भेजे गए नए प्रस्ताव के बाद आंदोलनकारियों ने अपना धरना स्थगित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल विराम है, यदि सरकार अपने वादे से मुकरी, तो आंदोलन और भी उग्र रूप में दोबारा शुरू होगा।

107 दिनों का संघर्ष: जब 'खाकी' और 'खास' के बीच पिसा 'नर्सिंग छात्र'

उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती की प्रक्रिया लंबे समय से विवादों में रही है। 3000 पदों पर चल रही भर्ती में विसंगतियों को लेकर अभ्यर्थी सड़कों पर थे।
ज्योति रौतेला का नेतृत्व: महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने इस आंदोलन को धार दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें आश्वासन दिया है कि छात्रों के प्रस्ताव को कैबिनेट और वित्त विभाग के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

  • गणेश गोदियाल के तेवर: मौके पर मौजूद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यह नारी शक्ति की जीत है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ज्योति रौतेला के अडिग संकल्प के आगे सरकार 'चित' हो गई है।
  • धमकी: ज्योति रौतेला ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा, "हमने स्वास्थ्य मंत्री के कमिटमेंट पर भरोसा किया है। लेकिन अगर सरकार ने नर्सिंग छात्रों के साथ छल किया, तो हम दोबारा जेल जाने और लड़ने के लिए तैयार हैं।" 

महानिदेशक स्वास्थ्य का पत्र: शासन को भेजी गई 3 प्रमुख मांगें

आंदोलन के दबाव के बीच महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (उत्तराखंड), डॉ. सुनीता टम्टा ने सचिव, चिकित्सा शिक्षा को पत्र (पत्रांक-उप/पैरा/उप/11/2026/11300) लिखकर भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।

नर्सिंग एकता मंच की 3 प्रमुख मांगें जो प्रस्ताव में शामिल हैं:

  • अंतिम बार वर्षवार (Year-wise) भर्ती: वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को एक अंतिम अवसर के रूप में वर्षवार मेरिट के आधार पर पूर्ण किया जाए ताकि सालों से प्रतीक्षा कर रहे वरिष्ठ अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
  • क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य: भविष्य में होने वाली नर्सिंग भर्तियों में न्यूनतम 02 वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य किया जाए, ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
  • कठोर अनुशासन और सेवा समाप्ति: चयन प्रक्रिया में यह प्रावधान जोड़ा जाए कि यदि ड्यूटी के दौरान किसी भी मरीज के जीवन के साथ लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित कर्मी की सेवा तत्काल समाप्त की जाए।

नर्सिंग नियमावली: 2015 से 2026 तक का सफर

वर्ष/नियमावलीचयन का आधारमुख्य विशेषता
मूल नियमावली 2015वर्षवार / अंक प्रतिशतडिप्लोमा/डिग्री के अंकों के आधार पर मेरिट।
संशोधन 2020लिखित परीक्षाचयन प्रक्रिया को लिखित परीक्षा के माध्यम से करने की व्यवस्था।
संशोधन 2022वर्षवार (केवल 2022-23 हेतु)केवल एक वर्ष के लिए विशेष छूट दी गई थी।
प्रस्तावित 2026अंतिम बार वर्षवारअटकी हुई 3000 भर्तियों को वर्षवार आधार पर पूर्ण करने का प्रस्ताव।

बेरोजगार नर्सिंग अधिकारियों की पीड़ा: "हम बीच के बैच वाले कहां जाएं?"

नर्सिंग एकता मंच द्वारा शासन को सौंपे गए ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने अपनी व्यथा व्यक्त की है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रक्रिया 'समान अवसर के सिद्धांत' के विरुद्ध है।

  • वरिष्ठ बनाम कनिष्ठ: ज्ञापन के अनुसार, सबसे वरिष्ठ बैच के अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है और कनिष्ठ (Junior) अभ्यर्थियों को भी नई श्रेणियों में अवसर मिल रहा है। लेकिन मध्य के 3-4 बैच (Batch) के अभ्यर्थी पूरी तरह उपेक्षित रह गए हैं।
  • रिक्तियों का मुद्दा: अभ्यर्थियों का आरोप है कि पूर्व की भर्तियों में फर्जी प्रमाण पत्रों के कारण जो पद निरस्त हुए या डुप्लीकेट आवेदन से जो सीटें खाली रहीं, उन पर प्रतीक्षा सूची (Waiting List) जारी नहीं की गई।
  • न्याय की गुहार: अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से चयन की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कई अब 'ओवरएज' होने की कगार पर हैं।

विधिक अड़चनें और महानिदेशक का रुख

डॉ. सुनीता टम्टा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि "उत्तराखण्ड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली" में समय-समय पर संशोधन हुए हैं।

  1. अनुभव के अंक: नियमावली 2015 के अनुसार, प्रति वर्ष अनुभव के लिए 1 अंक (अधिकतम 5 अंक) देय थे।
  2. वर्तमान संकट: चूंकि 2022 के संशोधन में 'वर्षवार' व्यवस्था केवल वर्ष 2022-23 के लिए ही वैध थी, इसलिए अब इस भर्ती को 'वर्षवार' करने के लिए शासन स्तर पर नीतिगत निर्णय लेना अनिवार्य है। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने अब गेंद शासन के पाले में डाल दी है।

नर्सिंग एकता मंच के संघर्ष के मुख्य बिंदु

  • 107 दिनों का धैर्य: कड़ाके की ठंड और बदलते मौसम के बीच नर्सिंग छात्रों का आंदोलन देहरादून की सड़कों पर डटा रहा।
  • राजनीतिक समर्थन: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाया।
  • भविष्य की रणनीति: यदि शासन स्तर पर 15 दिनों के भीतर वर्षवार भर्ती का शासनादेश (GO) जारी नहीं होता है, तो मंच ने 'सचिवालय कूच' की चेतावनी दी है।
  • फर्जीवाड़े पर रोक: नई मांगों में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों की गहन जांच की भी मांग की गई है।

नर्सिंग एकता मंच' का अनशन; स्वास्थ्य महानिदेशक ने शासन को भेजा 'वर्षवार' भर्ती का प्रस्ताव
नर्सिंग एकता मंच' का अनशन; स्वास्थ्य महानिदेशक ने शासन को भेजा 'वर्षवार' भर्ती का प्रस्ताव


 

निष्कर्ष: क्या सरकार तोड़ेगी 'गतिरोध'?
नर्सिंग एकता मंच का धरना समाप्त होना सरकार के लिए राहत की बात है, लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है। स्वास्थ्य महानिदेशक का पत्र अब शासन की मेज पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री को अब यह तय करना है कि क्या वे नियमावली में एक और 'परन्तुक' जोड़कर इसे अंतिम बार वर्षवार भर्ती की अनुमति देंगे या फिर मामला एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में उलझेगा।
हजारों बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों की उम्मीदें अब 13 मई 2026 के इस सरकारी पत्राचार पर टिकी हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए, जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही हैं, अनुभवी नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति केवल एक भर्ती नहीं, बल्कि राज्य की लाइफलाइन को मजबूत करने का कदम होगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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