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देहरादून, 22 मई, 2026: उत्तराखंड में भीषण गर्मी के प्रकोप, वनाग्नि की चुनौतियों, चारधाम यात्रा में उमड़ते जनसैलाब और आगामी मानसून सीजन की आहट को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में सीएम धामी ने शासन और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ वनाग्नि नियंत्रण, पेयजल संकट निवारण, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और मानसून पूर्व (Pre-Monsoon) की तैयारियों की विस्तृत और गहन समीक्षा की।
लगभग घंटों चली इस मैराथन बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में हिदायत दी कि किसी भी स्तर पर लेटलतीफी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जनहित और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में समयबद्ध (Time-bound) और धरातल पर दिखने वाली प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बड़ी घोषणा: फॉरेस्ट गार्ड के 1000 पदों पर होगी तत्काल नई भर्ती; बढ़ेगा सुरक्षा तंत्र
उत्तराखंड के वनों की सुरक्षा और वनाग्नि (Forest Fire) की घटनाओं पर त्वरित काबू पाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी घोषणा की।
- 1000 नई नियुक्तियां: मुख्यमंत्री ने वन विभाग में मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए फॉरेस्ट गार्ड (Forest Guard) के एक हजार नए पदों पर तत्काल प्रभाव से नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
- बजट की उपलब्धता: वनों की आग बुझाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली स्थानीय ग्राम समितियों और वन पंचायतों को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने नियमानुसार आवश्यक बजट और संसाधन तुरंत उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि वे वनाग्नि नियंत्रण में बढ़-चढ़कर भाग ले सकें।
सीएम धामी की समीक्षा बैठक के 5 सबसे बड़े नीतिगत फैसले
| विभाग / क्षेत्र | मुख्यमंत्री का मुख्य निर्देश और रणनीति | प्रशासनिक समय-सीमा / मॉडल |
| वन विभाग | फॉरेस्ट गार्ड के 1000 पदों पर नई नियुक्तियां। | तत्काल भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश। |
| वनाग्नि नियंत्रण | आग की सूचना मिलने के बाद अधिकारियों का मौके पर पहुंचना। | अधिकतम 01 घंटा (रिस्पॉन्स टाइम) |
| स्वास्थ्य विभाग | प्रदेश के सभी अस्पतालों का अनिवार्य इलेक्ट्रिकल व फायर सेफ्टी ऑडिट। | मानसून सीजन से पूर्व अनिवार्य। |
| पेयजल एवं ऊर्जा | क्षतिग्रस्त लाइनों की त्वरित मरम्मत, निर्बाध बिजली व बफर टैंकर। | ग्रीष्मकाल के दौरान निरंतर मॉनिटरिंग। |
| मानसून तैयारियां | संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता, प्रभारी सचिवों का ऑन-फील्ड दौरा। | जून प्रथम सप्ताह तक स्थलीय निरीक्षण। |
वनाग्नि नियंत्रण: पूरे प्रदेश में लागू होगा 'शीतलखेत मॉडल', 1 घंटे का 'डेडलाइन रिस्पॉन्स टाइम'
उत्तराखंड के जंगलों में धधकती आग को लेकर मुख्यमंत्री ने वन विभाग के आला अधिकारियों के पेंच कसे। उन्होंने साफ कहा कि राज्य की बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले शरारती और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
1 घंटे के भीतर मौके पर पहुंचेंगे अधिकारी:
मुख्यमंत्री ने वनाग्नि नियंत्रण के लिए 'रिस्पॉन्स टाइम' को न्यूनतम करने पर सबसे अधिक जोर दिया। उन्होंने कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि जैसे ही कंट्रोल रूम या सैटेलाइट के माध्यम से किसी भी बीट या डिवीजन में वनाग्नि की सूचना प्राप्त होती है, उसके अधिकतम 01 घंटे के भीतर संबंधित वन क्षेत्राधिकारी (Ranger) या जिम्मेदार अधिकारी को दलबल के साथ मौके पर पहुंचना होगा।
क्या है 'शीतलखेत मॉडल' (Sheetlakhet Model)?
मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध 'शीतलखेत मॉडल' की सफलता को रेखांकित करते हुए इसे पूरे प्रदेश में लागू करने पर जोर दिया। इस मॉडल के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- छोटी-छोटी तलैया (Water Bodies): जंगलों के भीतर फायर लाइनों के आसपास वर्षा जल के संग्रहण के लिए छोटी-छोटी तलैया और ट्रेंच बनाई जाएंगी, ताकि आग बुझाते समय पानी की कमी न हो।
- ठोस एक्शन प्लान और उपकरण: आग बुझाने वाले फ्रंटलाइन कार्मिकों को आधुनिक पीपीई किट, फायर बीटर्स और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण दिए जाएंगे।
- मोबाइल अलर्ट प्रणाली: स्थानीय ग्रामीणों और वन प्रहरियों को मोबाइल अलर्ट सिस्टम से जोड़ा जाएगा ताकि आग लगते ही तत्काल सूचना प्रसारित हो सके। इसके साथ ही व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगाम: हर डिवीजन में तैनात होंगे पशु चिकित्सक
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की घटनाओं को मुख्यमंत्री ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि जंगली जानवरों के हमले में घायल नागरिकों को त्वरित उपचार देने और हिंसक या घायल वन्यजीवों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के प्रत्येक डिवीजन में पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) की पर्याप्त उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
पेयजल, विद्युत और चारधाम यात्रा हेतु जारी 4 कड़े दिशा-निर्देश
भीषण गर्मी और चारधाम यात्रा के पीक सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे को लेकर निम्नलिखित आदेश दिए हैं:
- पेयजल टैंकरों की बफर व्यवस्था: ग्रीष्मकाल के दौरान मैदानी जिलों के साथ-साथ राज्य के प्रमुख तीर्थाटन (चारधाम) एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन सूखी हैं, वहां पेयजल टैंकरों की पूरी उपलब्धता चौबीसों घंटे बनी रहे।
- अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य: हाल ही में अस्पतालों में हुई शॉर्ट-सर्किट की घटनाओं से सबक लेते हुए सीएम ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि राज्य के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट (Fire Safety Audit) अनिवार्य रूप से कराया जाए और वहां साफ-सफाई की उच्च स्तरीय व्यवस्था हो।
- चारधाम में श्रद्धालुओं की हेल्थ स्क्रीनिंग: चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्क्रीनिंग टेस्ट के दौरान जिन श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य की दृष्टि से अनफिट पाया जा रहा है, उन्हें जबरन यात्रा करने के बजाय वापस लौटने या आराम करने के लिए विनम्रतापूर्वक प्रेरित किया जाए।
- निर्बाध बिजली और ऊर्जा उत्पादन: बढ़ते लोड के बावजूद प्रदेश में विद्युत आपूर्ति (Power Supply) सुचारु रहनी चाहिए। ऊर्जा विभाग बिजली की किल्लत दूर करने के लिए आंतरिक उत्पादन बढ़ाने हेतु अधिक प्रभावी प्रयास करे।
मानसून की तैयारियां: प्रभारी सचिव खुद करेंगे संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण
जून महीने में आने वाले मानसून को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासनों को अभी से कमर कसने को कहा है। उन्होंने कहा कि मानसून से जुड़ी सभी तैयारियां जैसे—मलबे को हटाने के लिए जेसीबी की तैनाती, राशन का बफर स्टॉक और नदी किनारे सुरक्षा दीवार—समय से पूरी कर ली जाएं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों के प्रभारी सचिव (In-charge Secretaries) अपने-अपने आवंटित जिलों का स्वयं स्थलीय निरीक्षण (Ground Inspection) करेंगे और व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। विशेषकर भूस्खलन संभावित संवेदनशील क्षेत्रों (Landslide Prone Zones) में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष प्रबंध और डिजिटल डेटाबेस
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने 'संस्थागत प्रसव' (Institutional Delivery) को शत-प्रतिशत बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में मानसून काल के दौरान सड़कें बंद होने के कारण गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके समाधान के लिए:
- सुरक्षित डेटाबेस: सभी गर्भवती महिलाओं का पूरा मेडिकल डेटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जाए।
- एडवांस शिफ्टिंग प्लान: मानसून काल में प्रसव की संभावित तिथि (EDD) वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर, महिलाओं को समय से पहले सुरक्षित रूप से नजदीकी प्रसव केंद्रों या अस्पतालों तक पहुंचाने की समुचित डोली या एम्बुलेंस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में उपस्थित शीर्ष अधिकारी
इस उच्चस्तरीय और निर्णायक बैठक में उत्तराखंड शासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनमें प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) श्री रंजन मिश्रा, सचिव श्री सचिन कुर्वे, श्री सी. रविशंकर, श्री रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष शामिल थे।
'प्रो-एक्टिव' गवर्नेंस से ही सुलझेंगी सूबे की दिक्कतें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ली गई यह समीक्षा बैठक यह दर्शाती है कि सरकार समस्याओं के आने का इंतजार करने के बजाय 'प्रो-एक्टिव' (अग्रिम सक्रिय) होकर फैसले ले रही है। वनाग्नि नियंत्रण के लिए 1 घंटे का रिस्पॉन्स टाइम तय करना और शीतलखेत मॉडल को अपनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है।
वहीं वन विभाग में 1000 फॉरेस्ट गार्ड्स की भर्ती से जहां एक तरफ युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड के जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार होगा। अब आवश्यकता इस बात की है कि सचिवालय में बैठे इन शीर्ष अधिकारियों द्वारा दिए गए ये कड़े निर्देश समय पर धरातल पर उतरें, ताकि आम जनता को पानी, बिजली, स्वास्थ्य और सुरक्षित चारधाम यात्रा का लाभ मिल सके।
