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देहरादून, 08 मई, 2026: राज्य सरकार की "अंतिम छोर तक विकास" की अवधारणा अब धरातल पर सार्थक सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल की दूरदर्शी पहल से देहरादून के दिव्यांगजनों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। कर्जन रोड स्थित गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में संचालित 'जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र' (DDRC) आज हजारों दिव्यांगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है।
पहले जिन सेवाओं के लिए दिव्यांगजनों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, अब वे सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे सुलभ हो रही हैं। जिलाधिकारी के निर्देशन में समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग के इस साझा प्रयास ने न केवल प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया है, बल्कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी प्रदान किया है।
DDRC: एक छत के नीचे सभी समाधान
जिलाधिकारी की व्यक्तिगत रुचि के कारण सितंबर 2025 में गांधी शताब्दी अस्पताल में DDRC को सुव्यवस्थित तरीके से शुरू किया गया था। पहली बार, अस्पताल परिसर में ही इस केंद्र के लिए चार समर्पित कमरे उपलब्ध कराए गए हैं।
मुख्य उपलब्धियां (सितंबर 2025 से अब तक):
- UDID कार्ड: 600 से अधिक दिव्यांगजनों के यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड बनाए जा चुके हैं।
- नए प्रमाण पत्र: स्वास्थ्य विभाग के दिव्यांग बोर्ड द्वारा 600 नए दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
- नवीनीकरण: 250 पुराने प्रमाण पत्रों का नवीनीकरण (Renewal) भी सफलतापूर्वक किया गया है।
- ऐतिहासिक आंकड़ा: जनपद देहरादून में वर्ष 2009 से अब तक कुल 30,739 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
सेवाओं का विवरण और समय-सारणी
दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए प्रशासन ने विकासखंड स्तर पर भी बोर्ड की बैठकों का निर्धारण किया है:
| केंद्र का नाम | सेवा का दिन | मुख्य सेवाएं |
| गांधी शताब्दी अस्पताल, दून | प्रत्येक बुधवार | दिव्यांग प्रमाण पत्र, UDID आवेदन, नवीनीकरण |
| SDH विकासनगर | प्रत्येक मंगलवार | प्रमाणन, चिकित्सा परीक्षण, सहायता परामर्श |
| DDRC (गांधी शताब्दी) | प्रतिदिन (कार्यदिवस) | थेरेपी, हेल्पलाइन सहायता, योजना परामर्श |
| हेल्पलाइन नंबर | 8791009301 | सेवाओं की जानकारी और घर बैठे परामर्श |
हेल्पलाइन नंबर: घर बैठे पाएं सहायता
अक्सर शारीरिक अक्षमता के कारण दिव्यांगजनों के लिए बार-बार अस्पताल या दफ्तर आना संभव नहीं होता। इस समस्या का समाधान करते हुए जिलाधिकारी ने डीडीआरसी के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर (8791009301) जारी किया है।
- इस नंबर के माध्यम से लाभार्थी घर बैठे प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी और अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में पूछ सकते हैं।
- यह हेल्पलाइन नंबर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के दिव्यांगजनों के लिए 'संजीवनी' साबित हो रहा है।
विशेष थेरेपी: बच्चों का संवर रहा भविष्य
DDRC केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक अत्याधुनिक पुनर्वास केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहा है। यहाँ दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निशुल्क सेवाएं प्रदान की जा रही हैं:
- स्पीच थेरेपी (Speech Therapy): बोलने में कठिनाई महसूस करने वाले बच्चों के लिए।
- फिजियोथेरेपी (Physiotherapy): शारीरिक अक्षमता को कम करने और गतिशीलता बढ़ाने के लिए।
- लर्निंग थेरेपी (Learning Therapy): मानसिक और शैक्षणिक विकास में सुधार के लिए।
इन विशेष सुविधाओं के कारण बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखा जा रहा है, जिससे उनके अभिभावकों ने जिला प्रशासन का आभार जताया है।
अधिकारियों का पक्ष और लाभार्थी की जुबानी
- मनोज बहुगुणा (लाभार्थी): "मैं लंबे समय से यूडीआईडी कार्ड के लिए परेशान था। डीडीआरसी केंद्र पहुँचा तो वहां मौजूद स्टाफ ने दस्तावेजों के सत्यापन में मदद की और तुरंत प्रक्रिया पूरी कराई। आज मेरे पास अपना कार्ड है।"
- दीपांकर घिल्डियाल (समाज कल्याण अधिकारी): "जिलाधिकारी महोदय के निर्देशन में पहली बार हमें अस्पताल परिसर में ही स्थान मिला है। इससे दिव्यांगजनों को एक ही जगह डॉक्टर और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मिल जाते हैं, जिससे समय की बचत होती है।"
- डॉ. मनोज शर्मा (CMO देहरादून): "जनपद में अब तक 30,739 प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। हम विकासनगर और देहरादून दोनों केंद्रों पर बोर्ड की नियमित बैठकें कर रहे हैं ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे।"
प्रशासन की दूरगामी सोच: समान अधिकार और सम्मान
जिलाधिकारी सविन बंसल की इस पहल का उद्देश्य केवल कार्ड बनाना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को समाज में 'समान अधिकार' दिलाना है। UDID कार्ड होने से दिव्यांगजनों को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा, रेलवे कंसेशन, सरकारी नौकरियों में आरक्षण और विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में मिलता है।
अस्पताल परिसर में DDRC का होना यह सुनिश्चित करता है कि दिव्यांग व्यक्ति को अपनी अक्षमता का प्रतिशत निर्धारित कराने के बाद सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरने के लिए किसी दूसरे कार्यालय में न जाना पड़े।
एक समावेशी समाज की ओर बढ़ते कदम
देहरादून में DDRC का सफल संचालन इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता की सेवा कर सकता है। "सितंबर से अब तक के 600+ कार्ड्स" केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन 600 परिवारों की मुस्कान है जिन्हें सरकार ने उनके द्वार पर हक पहुँचाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने की आवश्यकता है ताकि उत्तराखंड का हर दिव्यांग नागरिक आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन जी सके।
