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हरिद्वार, 08 मई, 2026: पुलिस की पहचान अक्सर सख्त अनुशासन और अपराध नियंत्रण से होती है, लेकिन कभी-कभी खाकी का एक ऐसा मानवीय और संवेदनशील चेहरा सामने आता है जो समाज में विश्वास को और गहरा कर देता है। हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे ही मामले में सफलता पाई है, जहाँ गंगनहर से बरामद एक अज्ञात बुजुर्ग के शव की शिनाख्त करना नामुमकिन लग रहा था।
जेब में न कोई पहचान पत्र था और न ही कोई दस्तावेज, केवल एक टूटा हुआ मोबाइल था। लेकिन ज्वालापुर पुलिस ने हार नहीं मानी और तीन दिनों के अथक प्रयास के बाद न केवल मृतक की पहचान हिमाचल प्रदेश निवासी ताराचंद के रूप में की, बल्कि उनके बेटे और बेटी तक पहुँचकर शव को सम्मानपूर्वक सुपुर्द भी किया।
घटना की पृष्ठभूमि: गंगनहर में मिला था अज्ञात बुजुर्ग का शव
मामला 04 मई, 2026 का है, जब ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में एक बुजुर्ग का शव बहता हुआ देखा गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने शव को बाहर निकाला।
- प्रारंभिक चुनौती: मृतक की उम्र लगभग 59 वर्ष थी। तलाशी लेने पर उसकी जेब से कोई भी ऐसा कागज या आईडी कार्ड नहीं मिला जिससे उसकी पहचान हो सके।
- मोर्चरी में रखा शव: शिनाख्त न होने की स्थिति में पुलिस ने पंचनामा की कार्यवाही कर शव को जिला अस्पताल हरिद्वार की मोर्चरी में 72 घंटों के लिए सुरक्षित रखवा दिया।
- टूटा मोबाइल और सिम कार्ड: जाँच का टर्निंग पॉइंट
एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी एसओपी (SOP) का कड़ाई से पालन किया जा रहा था। इसी दौरान मृतक की तलाशी में मिला एक क्षतिग्रस्त और पुराना मोबाइल फोन जाँच का मुख्य आधार बना।
पुलिस की सूझबूझ:
कोतवाली ज्वालापुर के कार्यालय में नियुक्त पुलिसकर्मियों ने देखा कि मोबाइल पूरी तरह से खराब हो चुका है, लेकिन उसके भीतर लगा सिम कार्ड सुरक्षित दिख रहा था। पुलिस ने उस सिम कार्ड को निकालकर अपने मोबाइल फोन में डाला। शुरुआत में न तो कोई नंबर दिखा और न ही कोई डाटा। लेकिन पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और सिम को सक्रिय (Active) रखा।
दो दिन बाद आई वह 'जादुई' कॉल
सिम को एक्टिव रखने के दो दिन बाद, अचानक उस नंबर पर एक कॉल आई।
- पहली लीड: फोन करने वाले व्यक्ति ने बताया कि वह हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है और यह नंबर 'बिट्टू' नामक व्यक्ति का है। उसने बताया कि बिट्टू उसके यहाँ कारपेंटर (बढ़ई) का काम करता था।
- परिजनों तक पहुँच: कॉलर ने पुलिस को बिट्टू के परिवार का एक अन्य मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया।
- बेटी से संपर्क: जब पुलिस ने उस नंबर पर फोन किया, तो वह मृतक की पुत्री हंसा देवी (निवासी बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश) का निकला। हंसा देवी ने बताया कि उनके पिता का नाम ताराचंद उर्फ बिट्टू है और वे पिछले करीब एक हफ्ते से लापता हैं।
शिनाख्त का पूरा घटनाक्रम: एक नज़र में
| तिथि | घटना/कार्यवाही | परिणाम |
| 04 मई 2026 | जटवाड़ा पुल के पास शव बरामद | अज्ञात बुजुर्ग के रूप में दर्ज |
| 05 मई 2026 | क्षतिग्रस्त मोबाइल से सिम रिकवरी | सिम को पुलिस के फोन में एक्टिव किया गया |
| 06 मई 2026 | सिम पर अनजान कॉल प्राप्त हुई | मृतक का नाम 'बिट्टू' और कारपेंटर होने का पता चला |
| 07 मई 2026 | बेटी और बेटे से व्हाट्सएप पर संपर्क | फोटो देखकर परिजनों ने पहचान सुनिश्चित की |
| 08 मई 2026 | परिजन हरिद्वार पहुँचे | शव की पहचान ताराचंद (59 वर्ष) के रूप में हुई |
बेटे की आँखों में आंसू: "नौकरी की तलाश में निकले थे पिता"
पुलिस द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से जब मृतक के फोटोग्राफ परिजनों को भेजे गए, तो घर में कोहराम मच गया। मृतक के पुत्र नवीन कुमार (निवासी मंडी, हिमाचल प्रदेश) तुरंत हरिद्वार के लिए रवाना हुए।
मृतक की आख़िरी बातें:
परिजनों ने बताया कि ताराचंद घर से यह कहकर निकले थे कि वे नौकरी की तलाश में बाहर जा रहे हैं। उन्होंने जाते समय यह भी कहा था कि "अगर कभी फोन न लगे तो परेशान मत होना, मैं काम में व्यस्त हो सकता हूँ।" यही वजह थी कि परिवार ने शुरुआत में उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी, वे उनके फोन आने का इंतज़ार कर रहे थे।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का विजन: एसओपी की सफलता
हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने इस सफल शिनाख्त पर ज्वालापुर पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है। उन्होंने कहा कि अज्ञात शवों की शिनाख्त करना पुलिस के लिए सबसे कठिन कार्यों में से एक होता है, क्योंकि इसमें केवल साक्ष्य ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की भी जरूरत होती है।
- SOP का पालन: उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा अज्ञात शवों के मामले में जारी 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) के तहत हर संभव तकनीकी माध्यम का उपयोग करना अनिवार्य है।
- डिजिटल फुटप्रिंट: इस मामले ने साबित कर दिया कि एक छोटा सा डिजिटल सुराग (सिम कार्ड) भी किसी परिवार को उनके बिछड़े हुए सदस्य से मिला सकता है।
परिजनों का आभार और पुलिस टीम का विवरण
शव प्राप्त करने के बाद मृतक के पुत्र नवीन कुमार ने भावुक होकर कहा—
"यदि उत्तराखंड पुलिस इतनी मेहनत नहीं करती और फोन की सिम निकालकर जाँच नहीं करती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता कि हमारे पिता के साथ क्या हुआ। हम शायद उनके अंतिम संस्कार और आखिरी दर्शन से भी वंचित रह जाते।"
सराहनीय कार्य करने वाली टीम:
- अगुवाई: चंद्रभान सिंह (कोतवाली प्रभारी, ज्वालापुर)।
- तकनीकी सहयोग: थाने के कार्यालय में तैनात आरक्षी और सूचना सेल।
- समन्वय: मोर्चरी स्टाफ और स्थानीय पुलिस टीम।
गुमनामी के अंधेरे से न्याय के उजाले तक
ताराचंद की मौत कैसे हुई, क्या यह कोई दुर्घटना थी या कुछ और, इसकी जाँच अब भी जारी है। लेकिन ज्वालापुर पुलिस ने एक अज्ञात शव को 'अपराध का आँकड़ा' बनने से रोककर उसे एक नाम और पहचान दी है। हिमाचल से नौकरी की तलाश में निकले बुजुर्ग का अंत भले ही दुखद रहा, लेकिन हरिद्वार पुलिस के प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया कि उनका अंतिम संस्कार उनकी अपनी धरती और अपने प्रियजनों के बीच हो। यह रिपोर्ट उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता के विश्वास को और सुदृढ़ करती है।
