Aapki Media AI
रुद्रपुर/देहरादून, 08 मई, 2026: उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल इन दिनों एक्शन मोड में हैं। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने अब 'ग्राउंड जीरो' पर उतरना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में शुक्रवार की देर रात स्वास्थ्य मंत्री ने बिना किसी पूर्व सूचना के रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया।
आधी रात को अचानक मंत्री को अपने बीच पाकर अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मंत्री ने न केवल वार्डों का जायजा लिया, बल्कि अस्पताल के टॉयलेट से लेकर किचन तक की बारीकी से जांच की। इस दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं पर उन्होंने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और जिला अस्पताल के ड्रग स्टोर (औषधि भंडार) को तत्काल प्रभाव से सील करने के ऐतिहासिक आदेश दिए।
मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का अंबार: मरीजों ने सुनाई पीड़ा
निरीक्षण की शुरुआत रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज से हुई। स्वास्थ्य मंत्री सीधे आईसीयू (ICU) और जनरल वार्डों में पहुँचे। उन्होंने वहां भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद किया।
- भोजन की खराब गुणवत्ता: कई मरीजों ने शिकायत की कि अस्पताल में मिलने वाला भोजन खाने लायक नहीं है। मरीजों ने बताया कि निर्धारित मेनू (Diet Chart) का पालन नहीं किया जा रहा है और भोजन की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है।
- गंदगी का साम्राज्य: अस्पताल के टॉयलेट और बाथरूम में फैली गंदगी देखकर मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही सफाई कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि पहली बार चेतावनी दी जा रही है, अगली बार सीधे निलंबन (Suspension) होगा।
मंत्री की दो-टूक: "मरीजों और स्टाफ के लिए अलग-अलग मानक क्यों?"
निरीक्षण के दौरान एक दिलचस्प लेकिन गंभीर वाकया सामने आया। स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों के टॉयलेट की बदहाली देखने के बाद अस्पताल स्टाफ के उपयोग वाले टॉयलेट का भी निरीक्षण किया। स्टाफ का टॉयलेट साफ-सुथरा पाकर मंत्री ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।
मंत्री का कड़ा बयान:
"जिस प्रकार आप लोग अपने उपयोग वाले टॉयलेट को चमका कर रखते हैं, वैसी ही संवेदनशीलता मरीजों के लिए क्यों नहीं दिखाई जाती? अस्पताल में आने वाला हर गरीब मरीज हमारे लिए वीआईपी है। उसे स्वच्छ वातावरण और बेहतर इलाज देना सरकार की प्राथमिकता है, इसमें कोई समझौता नहीं होगा।"
निरीक्षण के मुख्य बिंदु और कार्रवाई
| निरीक्षण का स्थान | पाई गई कमियां | मंत्री द्वारा की गई कार्रवाई |
| रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज | खराब भोजन, शौचालयों में गंदगी | अधिकारियों को कड़ी फटकार, सुधार हेतु चेतावनी |
| भोजन कक्ष (Kitchen) | मेनू का पालन न होना | तत्काल डाइट चार्ट लागू करने के निर्देश |
| जिला अस्पताल स्टोर | स्टॉक और दवाओं में अनियमितता | औषधि भंडार कक्ष तत्काल सील |
| आईसीयू / वार्ड | स्टाफ की लापरवाही की शिकायत | जांच और समयबद्ध ड्यूटी के निर्देश |
| प्रसव मृत्यु मामला | लापरवाही का आरोप | 3 डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम व जांच के आदेश |
बड़ी कार्रवाई: जिला अस्पताल का औषधि भंडार सील
मेडिकल कॉलेज के बाद स्वास्थ्य मंत्री रुद्रपुर जिला अस्पताल पहुँचे। यहाँ औषधि भंडार (Drug Store) के निरीक्षण के दौरान उन्हें कुछ गंभीर अनियमितताओं की आशंका हुई।
- नकली दवाओं का शक: भंडार कक्ष में रखी दवाओं के रिकॉर्ड और उनकी भौतिक स्थिति में मेल न होने पर मंत्री ने नकली दवाओं (Spurious Drugs) की आशंका जताई।
- स्टोर सील करने के आदेश: उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच पूरी होने तक औषधि भंडार को तत्काल सील कर दिया जाए।
- सैंपलिंग और जांच: दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे जाएंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद यदि दवाओं की गुणवत्ता में कमी पाई गई, तो दोषियों को जेल भेजा जाएगा।
प्रसव के दौरान महिला की मौत: राजनीति न करने की सलाह
हाल ही में रुद्रपुर जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत का मामला गरमाया हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट: मृतका के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल से कराया गया है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
- दोषियों पर कार्रवाई: यदि जांच में मेडिकल स्टाफ या डॉक्टरों की लापरवाही सिद्ध होती है, तो उनके विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
- राजनीति से दूर रहने की अपील: उन्होंने विपक्षी दलों और अन्य संगठनों से अपील की कि मृतका के परिवार की संवेदनाओं का सम्मान करें और इस मुद्दे पर राजनीति न करें।
स्वास्थ्य मंत्री के प्रमुख निर्देश
- 15 दिन का समय: अस्पताल प्रशासन को साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था सुधारने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।
- नियमित मॉनिटरिंग: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देशित किया गया है कि वे सप्ताह में दो बार स्वयं वार्डों का औचक निरीक्षण करें।
- दवाओं की उपलब्धता: सील किए गए स्टोर के कारण मरीजों को दवाओं की किल्लत न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने को कहा गया है।
- जीरो टॉलरेंस: भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराया गया।
क्या बदलेगी रुद्रपुर के अस्पतालों की सूरत?
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के इस औचक निरीक्षण ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब केवल कागजी रिपोर्टों पर भरोसा नहीं करेगी। आधी रात को टॉयलेट और किचन की जांच करना यह दर्शाता है कि मंत्री जमीनी हकीकत से रूबरू होना चाहते हैं। औषधि भंडार को सील करना एक बड़ा साहसिक कदम है, जो राज्य में दवा माफियाओं के लिए एक कड़ी चेतावनी है। अब देखना यह होगा कि मंत्री की इस फटकार के बाद रुद्रपुर के अस्पतालों की व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है और ड्रग स्टोर की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।