Aapki Media AI
देहरादून, 15 मई, 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होमस्टे के नाम पर चल रहे होटल और अवैध गतिविधियों के अड्डों के खिलाफ जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन सफाई' शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के सख्त रुख के बाद, मानकों का उल्लंघन करने वाले 96 होमस्टे के पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि ये होमस्टे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के बजाय अपराध, नशे और हुड़दंग के केंद्र बन गए थे। जिला प्रशासन ने इन्हें न केवल बंद करने के आदेश दिए हैं, बल्कि पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से इनके विलोपन (Removal) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
ऑपरेशन सफाई: दो चरणों में हुई बड़ी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 5 मजिस्ट्रेट टीमों का गठन किया था, जिन्होंने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 136 औचक निरीक्षण किए। कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:
- प्रथम चरण: गहन जांच के बाद पहले चरण में 17 अवैध होमस्टे के लाइसेंस रद्द किए गए।
- द्वितीय चरण: दूसरे चरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए 79 और होमस्टे का पंजीकरण निरस्त किया गया।
- कुल कार्रवाई: अब तक कुल 96 प्रतिष्ठान जिला प्रशासन की रडार पर आकर बंद हो चुके हैं और यह एक्शन लगातार जारी है।
शहरी अमीरों के 'होटलरूपी होमस्टे' पर चला चाबुक
जांच में एक बड़ा खुलासा यह हुआ कि होमस्टे योजना का लाभ उठाने वाले अधिकांश लोग स्थानीय ग्रामीण नहीं, बल्कि शहर के धनाढ्य वर्ग के लोग थे।
- लीज का खेल: कई होमस्टे को बड़े होटलों की तर्ज पर 'लीज' पर दिया गया था, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।
- मालिक नदारद: नियमानुसार होमस्टे स्वामी का उसी भवन में निवास करना अनिवार्य है, लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि मालिक वहां रहते ही नहीं थे और पूरी यूनिट को व्यावसायिक प्रतिष्ठान की तरह चलाया जा रहा था।
- क्षमता से अधिक कमरे: निर्धारित मानकों से अधिक कमरे बनाकर पर्यटकों को ठहराया जा रहा था।
होमस्टे निरीक्षण और अनियमितताओं का रिपोर्ट कार्ड
| विवरण | सांख्यिकी / मुख्य विसंगति |
| कुल निरीक्षण | 136 (मजिस्ट्रेट टीमों द्वारा) |
| निरस्त पंजीकरण | 96 (17 + 79 दो चरणों में) |
| मुख्य कारण 1 | अवैध बार संचालन और लाउड डीजे का शोर |
| मुख्य कारण 2 | स्वामी का निवास न होना (लीज पर संचालन) |
| सुरक्षा खामियां | अग्निशमन उपकरण (Fire Extinguisher) का न होना |
| अपराधिक गतिविधियां | अवैध हथियार, फायरिंग और नशे की शिकायतें |
कानून व्यवस्था को चुनौती: नशे में फायरिंग और ओवर-स्पीडिंग
विगत कुछ महीनों से देहरादून में आपराधिक घटनाओं, नशे की हालत में वाहन चलाने और ओवर-स्पीडिंग के मामले तेजी से बढ़े थे। जिलाधिकारी के अनुसार, इन घटनाओं के तार इन अवैध होमस्टे से जुड़े पाए गए हैं।
- अपराधियों की शरणस्थली: बिना सत्यापन और उचित प्रक्रिया के इन होमस्टे में उपद्रवी प्रवृत्ति के लोगों को ठहराया जा रहा था।
- हथियारों का प्रदर्शन: कई मामलों में नशे की हालत में पिस्टल और तमचों से फायरिंग की घटनाएं सामने आई थीं।
- अवैध बार और डीजे: होमस्टे में रात-रात भर नियमों के विरुद्ध बार संचालित हो रहे थे और लाउड डीजे बजाकर आम जनमानस की शांति भंग की जा रही थी।
नियमों की धज्जियां: न किचन, न फायर सेफ्टी
समितियों द्वारा रायपुर और सहसपुर विकासखंड के नगरीय क्षेत्रों में किए गए निरीक्षण में मानकों की भारी अनदेखी पाई गई:
- फूड लाइसेंस की कमी: बिना किसी फूड लाइसेंस के पर्यटकों को भोजन परोसा जा रहा था, जबकि कई जगहों पर रसोई (Kitchen) की व्यवस्था ही नहीं थी।
- अग्निशमन सुरक्षा: अधिकांश होमस्टे में आग बुझाने के उपकरण नहीं थे, और जहां थे, उनकी वैधता (Expiry) समाप्त हो चुकी थी। यह पर्यटकों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ था।
- विदेशी नागरिकों की सूचना (C-Form): विदेशी पर्यटकों के ठहरने की अनिवार्य सूचना 'सी-फॉर्म' के जरिए पुलिस को नहीं दी जा रही थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चूक है।
जिलाधिकारी सविन बंसल के कड़े निर्देश
- मूल उद्देश्य की रक्षा: डीएम ने स्पष्ट किया कि होमस्टे योजना स्थानीय निवासियों की आय बढ़ाने और पारंपरिक व्यंजनों के प्रचार के लिए है, न कि व्यावसायिक अयाशी के लिए।
- सतत निगरानी: सहसपुर और रायपुर क्षेत्रों के लिए विशेष समितियों का गठन किया गया है जो भविष्य में भी नियमित जांच करती रहेंगी।
- वेबसाइट से विलोपन: पर्यटन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि निरस्त होमस्टे को तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफार्म से हटाया जाए।
- जीरो टॉलरेंस: कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका मालिक कितना ही रसूखदार क्यों न हो।
पर्यटन के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं
देहरादून प्रशासन की इस कार्रवाई ने उन लोगों को कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी योजनाओं की आड़ में अवैध धंधे चला रहे थे। होमस्टे योजना उत्तराखंड की 'अतिथि देवो भव:' परंपरा का प्रतीक है, लेकिन इसका उपयोग अवैध बार और अपराधियों को छिपाने के लिए किया जाना चिंताजनक था।
जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में शुरू हुआ यह 'ऑपरेशन सफाई' न केवल शहर की कानून व्यवस्था को सुधारेगा, बल्कि उन वास्तविक स्थानीय निवासियों को भी लाभ पहुँचाएगा जो ईमानदारी से होमस्टे का संचालन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
.png)