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देहरादून, 04 मई, 2026: राजधानी देहरादून में आम जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। जिलाधिकारी सविन बंसल के मार्गदर्शन में सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनता दरबार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रशासन आम आदमी के प्रति कितना संवेदनशील है। अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में कुल 163 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया।
देवपुरम और गीतांजलि एनक्लेव: विकास कार्यों में लापरवाही पर भड़के अधिकारी
जनता दरबार में बुनियादी ढांचे और अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतों ने प्रमुखता पाई। देवपुरम कॉलोनी के निवासियों ने एक गंभीर मुद्दा उठाया कि निकासी मार्ग पर अवैध निर्माण के कारण सीवर लाइन बाधित हो गई है, जिससे आगामी मानसून में जलभराव का खतरा पैदा हो गया है।
- सख्त निर्देश: अपर जिलाधिकारी ने तहसीलदार को तत्काल मौके का मुआयना कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
- गीतांजलि एनक्लेव की सुध: यहाँ गैस पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों को अधूरा छोड़ने, बिजली के पोल शिफ्टिंग न होने और फुटपाथ निर्माण में देरी पर नाराजगी जताई गई। संबंधित विभागों को अल्टीमेटम दिया गया है कि कार्य जल्द पूरे किए जाएं।
बुजुर्गों का सम्मान: बेटे-बहू की बेरुखी पर प्रशासन का कड़ा प्रहार
जनता दरबार में एक भावुक कर देने वाला मामला तब सामने आया जब 70 वर्षीय बुजुर्ग सावित्री प्रसाद डिमरी ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि जिस बेटे को उन्होंने घर खरीद कर दिया, उसी ने उनके साथ 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की और अब उन्हें घर से बेदखल कर दिया है।
प्रशासन ने इस मामले में मिसाल पेश करते हुए भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत तत्काल वाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि माता-पिता को उनके ही घर से निकालने वाले बच्चों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
संवेदनशीलता: शिक्षा की लौ बुझने नहीं देगी 'नंदा सुनंदा' योजना
आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों के लिए जनता दरबार उम्मीद की किरण बनकर उभरा।
- मंजू ममगाई: विधवा मंजू ने अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए फीस माफी की गुहार लगाई।
- इल्मा का संघर्ष: गांधी रोड निवासी इल्मा, जिनके पति का लिवर ट्रांसप्लांट होना है, ने भी बेटियों की शिक्षा के लिए मदद मांगी।
अपर जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को दोनों मामलों में तत्काल जांच कर ‘नंदा सुनंदा योजना’ के तहत प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए, ताकि बेटियों की पढ़ाई बाधित न हो।
जनता दरबार 2026: एक नज़र में
| श्रेणी | शिकायतों का विवरण | प्रशासनिक कार्रवाई |
| कुल शिकायतें | 163 | अधिकांश का मौके पर निस्तारण |
| कॉलोनी विवाद | देवपुरम (सीवर), गीतांजलि एनक्लेव (सड़क/बिजली) | तहसीलदार व संबंधित विभागों को जांच व कार्य पूर्ण करने के निर्देश |
| सामाजिक सुरक्षा | फीस माफी व आर्थिक सहायता (इल्मा व मंजू) | 'नंदा सुनंदा योजना' के तहत प्रस्ताव तैयार करने के आदेश |
| महिला सुरक्षा | घरेलू हिंसा एवं उत्पीड़न (पूजा देवी) | सीओ विकासनगर को तत्काल कार्रवाई के निर्देश |
| वरिष्ठ नागरिक | बुजुर्गों को घर से बेदखल करना (सावित्री प्रसाद) | भरण-पोषण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज |
| अन्य मामले | भूमि फर्जीवाड़ा, सैनिक मिंटू रावत की जमीन धोखाधड़ी | एसआईटी और संबंधित एसडीएम को जांच सौंपी गई |
महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर कोई समझौता नहीं
महिला उत्पीड़न के मामलों पर प्रशासन का रुख बेहद कड़ा रहा। विकासनगर की पूजा देवी द्वारा पति और ससुराल पक्ष पर जान से मारने की धमकी और उत्पीड़न के आरोप पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सीओ विकासनगर को सख्त निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि घरेलू हिंसा के मामलों में पुलिस तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित करे।
बैंकिंग अनियमितता और भूमि फर्जीवाड़े पर जांच के आदेश
ऋषिकेश के दीपक बढ़ाई द्वारा उत्तराखंड कोऑपरेटिव बैंक पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों और सैनिक मिंटू रावत के साथ जमीन के नाम पर हुई धोखाधड़ी के मामलों में भी उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा ने कहा कि सरकारी तंत्र में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या जनता का मानसिक उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आज के जनता दरबार के मुख्य आकर्षण
- त्वरित न्याय: 163 शिकायतों में से अधिकांश का तत्काल समाधान।
- अतिक्रमण पर प्रहार: नदी किनारे सुरक्षा कार्यों और सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे की शिकायतों पर एसडीएम को मौके पर भेजा गया।
- प्रशासनिक समन्वय: जनसुनवाई में राहुल आनंद (संयुक्त मजिस्ट्रेट), स्मृता परमार, विनोद कुमार, कुमकुम जोशी और अपर्णा ढ़ौडियाल (सभी एसडीएम) सहित शिक्षा और पुलिस विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।
- समयबद्धता: अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जो शिकायतें आज निस्तारित नहीं हुई हैं, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर हल कर रिपोर्ट कार्यालय को भेजी जाए।
जनता और प्रशासन के बीच कम होती दूरी
देहरादून कलेक्ट्रेट में आयोजित यह जनता दरबार केवल शिकायतों का अंबार नहीं था, बल्कि सुशासन की एक जीवंत तस्वीर थी। जहाँ एक तरफ विकास कार्यों की सुस्त चाल पर विभागों को फटकार लगी, वहीं दूसरी ओर बेसहारा बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों के लिए मदद के हाथ बढ़े।