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देहरादून, 15 मई, 2026: राजधानी देहरादून में शुक्रवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी किसी तामझाम या भारी-भरकम काफिले के बजाय स्वयं दुपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Scooter) चलाकर अचानक उपनल (UPNAL) मुख्यालय पहुंच गए। मंत्री को इस सादगी और बिना किसी पूर्व सूचना के अपने बीच पाकर अधिकारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
अचानक हुए इस औचक निरीक्षण ने न केवल विभाग की कार्यप्रणाली को परखा, बल्कि मंत्री ने पर्यावरण और ईंधन संरक्षण की दिशा में कुछ क्रांतिकारी निर्देश देकर अन्य विभागों के लिए भी एक नजीर पेश की है।
निरीक्षण: अटेंडेंस से लेकर फाइल प्रबंधन तक की गहन जांच
मुख्यालय पहुंचते ही मंत्री गणेश जोशी ने विभिन्न अनुभागों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया:
- कर्मचारी उपस्थिति: मंत्री ने कार्यालय की लॉग बुक और कर्मचारियों की समयबद्धता की जांच की।
- कार्यप्रणाली की समीक्षा: अनुभागों में फाइलों के निस्तारण की गति और आम जनमानस/पूर्व सैनिकों से जुड़े कार्यों के प्रबंधन का अवलोकन किया।
- प्रबंधन व्यवस्था: कार्यालय के भीतर संसाधनों के उपयोग और कामकाज के माहौल का बारीकी से निरीक्षण कर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।
क्रांतिकारी निर्देश: उपनल में लागू होगा 50% 'वर्क फ्रॉम होम' मॉडल
निरीक्षण के बाद मंत्री गणेश जोशी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और तेजी से कम होते प्राकृतिक ईंधन संसाधनों को देखते हुए एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया।
- Work From Home (WFH): मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपनल मुख्यालय के कामकाज का 50 प्रतिशत हिस्सा अब 'वर्क फ्रॉम होम' प्रणाली के तहत संचालित किया जाए। इससे न केवल कार्यालय के खर्चों में कमी आएगी, बल्कि कर्मचारियों के आवागमन में होने वाले ईंधन की भी बड़ी बचत होगी।
- नो व्हीकल डे (No Vehicle Day): उन्होंने प्रत्येक शनिवार को 'नो व्हीकल डे' के रूप में मनाने का निर्देश दिया। इस दिन अधिकतम कार्य ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे ताकि वाहनों का उपयोग न्यूनतम हो सके।
उपनल मुख्यालय हेतु मंत्री द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश
| निर्देश | उद्देश्य | क्रियान्वयन का तरीका |
| 50% वर्क फ्रॉम होम | ईंधन और ऊर्जा संरक्षण | रोटेशन के आधार पर स्टाफ घर से काम करेगा। |
| नो व्हीकल डे | पर्यावरण संरक्षण | प्रत्येक शनिवार को ऑनलाइन मोड में कामकाज। |
| ई-वाहनों को बढ़ावा | प्रदूषण मुक्त यातायात | विभागीय कार्यों हेतु इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग। |
| डिजिटल कार्यप्रणाली | पारदर्शिता और गति | ई-ऑफिस और ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग को मजबूती। |
ईंधन और पर्यावरण: मंत्री की अपील और संदेश
सैनिक कल्याण मंत्री ने कहा कि डिजिटल कार्यप्रणाली को अपनाना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। उन्होंने उपनल मुख्यालय द्वारा डाक और अन्य स्थानीय कार्यों के लिए पहले से उपयोग में लाए जा रहे इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहन की मुक्त कंठ से सराहना की।
“ऊर्जा संरक्षण और ईंधन की बचत वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि हम आज प्रयास नहीं करेंगे, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट खड़ा होगा। उपनल ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाकर जो पहल की है, वह अन्य सरकारी विभागों के लिए भी प्रेरणादायक है।” - गणेश जोशी, सैनिक कल्याण मंत्री
उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे निजी जीवन में भी अनावश्यक वाहन उपयोग को कम करें और अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं।
मौके पर मौजूद उच्चाधिकारी
निरीक्षण के दौरान मंत्री के साथ उपनल के शीर्ष प्रबंधन ने विभाग की भावी योजनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान निम्नलिखित अधिकारी उपस्थित रहे:
- मेजर जनरल शम्मी सभरवाल (सेनि): निदेशक, उपनल
- ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट (सेनि): प्रबंध निदेशक (MD)
- मेजर हिमांशु रौतेला (सेनि): उपमहाप्रबंधक (DGM)
निरीक्षण के मुख्य आकर्षण
- सादगी की मिसाल: मंत्री गणेश जोशी खुद ई-स्कूटर चलाकर मुख्यालय पहुंचे, जिससे विभाग में अनुशासन का संदेश गया।
- पर्यावरण प्रेम: औचक निरीक्षण का मुख्य केंद्र बिंदु केवल कामकाज नहीं, बल्कि विभाग को 'इको-फ्रेंडली' बनाना रहा।
- त्वरित निर्णय: मौके पर ही 50% वर्क फ्रॉम होम का प्रस्ताव देकर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
- सराहना: उपनल द्वारा ई-वाहनों के प्रयोग को अन्य विभागों के लिए रोल मॉडल बताया गया।
डिजिटल और हरित प्रशासन की ओर कदम
मंत्री गणेश जोशी का यह औचक निरीक्षण केवल एक नियमित जांच नहीं थी, बल्कि यह सरकारी कार्यप्रणाली को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की एक बड़ी कोशिश है। 'वर्क फ्रॉम होम' और 'नो व्हीकल डे' जैसे निर्देशों से न केवल सरकारी खजाने पर ईंधन का बोझ कम होगा, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग के दौर में देहरादून जैसे संवेदनशील शहर के प्रदूषण स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी।
उपनल मुख्यालय से शुरू हुई यह पहल यदि अन्य सरकारी कार्यालयों तक पहुंचती है, तो उत्तराखंड 'ग्रीन गवर्नेंस' की दिशा में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
