देहरादून: भालू बनकर वन विभाग पहुंचे रीजनल पार्टी कार्यकर्ता; फसलों के नुकसान पर मुआवजे की मांग को लेकर 'हल्ला-बोल', सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी


Aapki Media AI


देहरादून, 15 मई, 2026: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भालुओं द्वारा फसलों को पहुँचाए जा रहे भारी नुकसान और शासन स्तर पर इसके मुआवजे का कोई प्रावधान न होने के विरोध में आज राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP) ने कड़ा रुख अख्तियार किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने आज राजपुर रोड स्थित वन विभाग मुख्यालय पर एक अत्यंत अनोखे और प्रभावी ढंग से धरना प्रदर्शन किया।

किसानों के हक के लिए सड़कों पर उतरी राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी

हाथों में तख्तियां और भालू की वेशभूषा पहने कार्यकर्ताओं ने सरकार और वन विभाग की उदासीनता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के पश्चात पार्टी ने वाइल्डलाइफ वार्डन विवेक पांडे के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन प्रेषित कर तत्काल प्रभाव से भालू द्वारा की गई फसल क्षति को मुआवजे की श्रेणी में लाने की मांग की।

अनोखा प्रदर्शन: जब भालू के लिबास में दफ्तर पहुंचे कार्यकर्ता

राजपुर रोड पर आज का नजारा आम दिनों से अलग था। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के कार्यकर्ता भालू के कपड़े पहनकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, जो आकर्षण और आक्रोश का केंद्र बना रहा। पार्टी का तर्क था कि जब सरकार भालुओं को 'संरक्षित' रखती है, तो उनके द्वारा किए गए नुकसान की जिम्मेदारी भी सरकार की ही होनी चाहिए।

मुआवजे की विसंगति पर सवाल:

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने एक स्थानीय समाचार पत्र की खबर का हवाला देते हुए बताया कि वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने स्वयं स्वीकार किया है कि फिलहाल भालू द्वारा फसल क्षति पर मुआवजा देने की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि सियार, बंदर और अन्य जंगली जानवरों द्वारा किए गए नुकसान पर सरकार मुआवजा देती है।

प्रदर्शन और मांगों का मुख्य विवरण 


विषयविवरण
आयोजकराष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP)
स्थानवन विभाग मुख्यालय, राजपुर रोड, देहरादून
मुख्य मांगभालू द्वारा फसल नुकसान पर तत्काल मुआवजा नीति लागू करना
ज्ञापन प्राप्तकर्तावाइल्डलाइफ वार्डन विवेक पांडे (सीएम धामी हेतु)
आरोपसरकार और वन विभाग की किसानों के प्रति उदासीनता
चेतावनीमांग पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन

पार्टी नेतृत्व के तीखे बाण: "किसान पहाड़ की रीढ़, सरकार ने फेर ली आंखें"

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने धरना स्थल पर जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा:

“किसान पहाड़ की रीढ़ है, लेकिन सरकार भालू के हमले से उनकी मेहनत की कमाई बर्बाद होने पर आँखें मूंदे बैठी है। यह कैसा कानून है कि जब भालू मनुष्य को घायल करे या पशु को मारे तो मुआवजा मिलता है, लेकिन उसी भालू द्वारा साल भर की फसल उजाड़ने पर किसान को खाली हाथ छोड़ दिया जाता है? यह सरासर अन्याय है और रीजनल पार्टी इस मुद्दे को तब तक नहीं छोड़ेगी जब तक न्याय नहीं मिल जाता।”

प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने भी शासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए:

“आज जो खबरें सामने आ रही हैं, वे बेहद शर्मनाक हैं। शासन स्तर पर अभी तक कोई आदेश या प्रावधान ही नहीं बनाया गया है। किसान दिन-रात मेहनत करता है और भालू एक रात में सब खत्म कर देता है। हमने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर नीति नहीं बनी, तो पूरा उत्तराखंड सड़कों पर होगा।”

 

वन विभाग की 'फाइल' और किसानों की 'बर्बादी'

जिला अध्यक्ष नवीन पंत ने प्रशासनिक ढिलाई को उजागर करते हुए बताया कि वन विभाग स्वयं यह मान रहा है कि चार महीने पहले इस संबंध में एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन वह प्रस्ताव फाइलों में कहीं दबकर रह गया है। उन्होंने कहा कि सैकड़ों किसान परिवार आज बर्बादी के कगार पर हैं क्योंकि उनके पास आय का अन्य कोई साधन नहीं है और सरकार केवल आश्वासन दे रही है।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख पदाधिकारी 

इस विशाल प्रदर्शन में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के तमाम प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और सैकड़ों किसान शामिल हुए:

  1. शिवप्रसाद सेमवाल: राष्ट्रीय अध्यक्ष
  2. सुलोचना ईष्टवाल: प्रदेश अध्यक्ष
  3. योगेश ईष्टवाल: प्रदेश अध्यक्ष (वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ)
  4. भगवती प्रसाद नौटियाल व गोस्वामी: सैनिक प्रकोष्ठ नेतृत्व
  5. नवीन पंत: जिला अध्यक्ष
  6. महिला शक्ति: महानगर अध्यक्ष शशि रावत, बसंती गोस्वामी, मंजू रावत, रजनी कुकरेती, मीना थपलियाल, हेमा कोटनाला।
  7. युवा शक्ति: सुमित थपलियाल, आशीष नौटियाल, पंकज उनियाल (देवभूमि युवा संगठन)।
  8. अन्य: विनोद कोठियाल, सुशील पटवाल, जगदंबा बिष्ट, रेनू नवानी, प्रवीण भारद्वाज, शोभित भद्री, सुरेंद्र चौहान।

पार्टी की प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • सर्वेक्षण और मुआवजा: राज्यभर में भालुओं द्वारा हुए फसल नुकसान का तुरंत वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए।
  • स्थायी सुरक्षा: गांवों के आसपास भालुओं की रोकथाम के लिए फेंसिंग और सोलर लाइट जैसी ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
  • नीतिगत बदलाव: वन विभाग की नियमावली में संशोधन कर भालू द्वारा फसल क्षति को अनिवार्य मुआवजे की सूची में शामिल किया जाए।

एक बड़े आंदोलन की आहट

देहरादून में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक शुरुआत मानी जा रही है। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि 15 दिनों के भीतर शासन स्तर पर भालू मुआवजा नीति पर कोई ठोस आदेश जारी नहीं होता है, तो पार्टी प्रत्येक जनपद और ब्लॉक स्तर पर उग्र आंदोलन शुरू करेगी।
किसानों के इस मुद्दे ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है और आने वाले दिनों में यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस 'अनोखे' विरोध और किसानों की 'जायज' मांग पर क्या रुख अपनाता है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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