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रुद्रप्रयाग, 18 मई, 2026: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के स्थानांतरण/संबद्धीकरण (अटैचमेंट) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड ऊखीमठ के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय, परकण्डी में कार्यरत सहायक अध्यापिका सुश्री सुरभि गैरोला को अन्यत्र विद्यालय में कार्ययोजित (संबद्ध) किए जाने के विभागीय आदेश के बाद स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इस प्रशासनिक आदेश के विरोध में विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC), स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सेवित क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक आम बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति से विरोध प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस व्यवस्था से विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) रुद्रप्रयाग को पत्र भेजकर आदेश को तत्काल निरस्त करने या शिक्षिका का पूर्ण रूप से स्थानांतरण कर विद्यालय को नया शिक्षक देने की मांग की गई है।
पूरा मामला: विभागीय आदेश और 'टीपादेश' का कनेक्शन
दरअसल, गत 12 मई 2026 को कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) रुद्रप्रयाग द्वारा एक कार्यालय ज्ञाप (आदेश संख्या/सेवायें-2/81/व्यवस्था 2026-27) जारी किया गया था। इस आदेश के अनुसार:
- पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला: देहरादून निवासी श्रीमती कमला गैरोला द्वारा अपनी पोती सुश्री सुरभि गैरोला (सहायक अध्यापिका, रा०प्रा०वि० परकण्डी, ऊखीमठ) की पारिवारिक परिस्थितियों के मद्देनजर उन्हें अगस्त्यमुनि क्षेत्र में संबद्ध करने का अनुरोध पत्र दिया गया था।
- शिक्षा मंत्री का निर्देश: इस अनुरोध पत्र पर माननीय विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ० धन सिंह रावत के स्तर से विभागीय टीपादेश (निर्देश) प्राप्त हुआ था।
- पद रिक्त न होने पर नया विकल्प: शिक्षा मंत्री के निर्देश के क्रम में रा०प्रा०वि० अगस्त्यमुनि में पद रिक्त न होने के कारण, उसके निकटवर्ती राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रामपुर (वि०ख० अगस्त्यमुनि) में सुश्री सुरभि गैरोला को अग्रिम आदेशों तक कार्ययोजित करने का आदेश जिला शिक्षा अधिकारी अजय कुमार चौधरी द्वारा जारी किया गया। इस व्यवस्था में शिक्षिका का वेतन मूल विद्यालय (परकण्डी) से ही आहरित होना तय हुआ।
प्रशासनिक आदेश एवं ग्रामीण विरोध का तुलनात्मक विवरण
| विभाग/पक्ष | जारी आदेश/कार्रवाई | ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों का स्टैंड |
| जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा०शि०) | शिक्षा मंत्री के टीपादेश पर शिक्षिका को रा०प्रा०वि० रामपुर (अगस्त्यमुनि) में कार्ययोजित किया। | आदेश को पूरी तरह अव्यावहारिक और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। |
| मूल विद्यालय (परकण्डी) | प्रधानाध्यापक को शिक्षिका को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश मिले। | आम बैठक बुलाकर आदेश के खिलाफ प्रस्ताव संख्या-02 पारित किया। |
| वेतन व्यवस्था | शिक्षिका का वेतन पूर्ववत मूल विद्यालय (परकण्डी) से ही आहरित होगा। | मांग है कि या तो आदेश निरस्त हो या परकण्डी को नया शिक्षक दिया जाए। |
आदेश निरस्त हो या मिले नया शिक्षक" — एसएमसी और जनप्रतिनिधियों की मांग
इस आदेश की प्रति 14 मई को विद्यालय पहुंचने के बाद परकण्डी ग्राम पंचायत और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि लामबंद हो गए। स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष सीमा देवी, ग्राम प्रधान सुनीता देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) गजेंद्र चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बैठक कर इस पर कड़ा ऐतराज जताया।
जिला शिक्षा अधिकारी को भेजे गए पत्र में ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में अपनी मांगें रखी हैं:
- मूल विद्यालय वापसी: या तो उक्त व्यवस्था/संबद्धीकरण के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए सहायक अध्यापिका सुश्री सुरभि गैरोला को उनके मूल विद्यालय (परकण्डी) में कार्यभार ग्रहण करने हेतु आदेशित किया जाए।
- अन्यत्र पूर्ण स्थानांतरण: यदि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षिका को वहां से हटाना अनिवार्य है, तो उनका पूर्ण रूप से स्थानांतरण किया जाए, ताकि नियमानुसार रा०प्रा०वि० परकण्डी को उनके स्थान पर कोई दूसरा शिक्षक (रिप्लेसमेंट) मिल सके।
- चेतावनी: ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग द्वारा इस त्रुटिपूर्ण और एकतरफा आदेश को शीघ्र निरस्त या संशोधित नहीं किया गया, तो क्षेत्र की समस्त जनता एक बड़े आंदोलन के लिए विवश होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
मामले की प्रतिलिपि उच्चाधिकारियों को प्रेषित
ग्रामीणों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कानून और व्यवस्था के दायरे में रहते हुए अपनी शिकायत की प्रतिलिपि (Copy) शासन और प्रशासन के निम्नलिखित उच्चाधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी है:
- जिला पंचायत अध्यक्ष, रुद्रप्रयाग।
- जिलाधिकारी (DM), रुद्रप्रयाग।
- मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO), रुद्रप्रयाग।
- उप शिक्षा अधिकारी, ऊखीमठ।
- जिला पंचायत सदस्य (वार्ड संख्या-4, परकण्डी)।
कानूनी और व्यावहारिक पेच में फंसा मामला
पहाड़ी क्षेत्रों में "अटैचमेंट" (कार्ययोजित करने) की व्यवस्था हमेशा से विवादों में रही है, क्योंकि इससे मूल विद्यालय में शिक्षकों की कमी हो जाती है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो विभाग के पास प्रशासनिक आवश्यकताओं या विशेष परिस्थितियों में किसी शिक्षक को कार्ययोजित करने का अधिकार होता है, लेकिन शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को बनाए रखना भी अनिवार्य है।
अब गेंद जिला शिक्षा अधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी रुद्रप्रयाग के पाले में है। देखना होगा कि विभाग ग्रामीणों के इस तीखे विरोध और बच्चों की पढ़ाई के नुकसान को देखते हुए इस आदेश को वापस लेता है या परकण्डी विद्यालय के लिए किसी वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था करता है, जिससे यह विवाद शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ सके।