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देहरादून, 19 मई, 2026: उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास से आज एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय क्षितिज पर अपनी ईमानदारी का लोहा मनवाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय सेना के जांबाज पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर फैलते ही समूचे उत्तराखंड सहित देश के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।
भुवन चंद्र खंडूड़ी न केवल उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री रहे, बल्कि वे सूबे की राजनीति में 'सुशासन, सुचिता और जीरो टॉलरेंस' के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते थे। उनके अवसान से देवभूमि ने अपना सबसे वरिष्ठ और मर्यादित जननेता खो दिया है। उनकी पुत्री और उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने अपने पिता के निधन पर एक अत्यंत भावुक संदेश जारी कर दुख व्यक्त किया है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित देश के तमाम शीर्ष नेताओं ने इसे राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया गहरा शोक: "अद्वितीय था उनका व्यक्तित्व"
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और बयानों के माध्यम से दिवंगत पुण्यात्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनरल खंडूड़ी का पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित एक खुली किताब की तरह था।
सीएम धामी के मुख्य विचार:
सैन्य और सार्वजनिक जीवन का आदर्श: मुख्यमंत्री ने कहा,
ईमानदार कार्यशैली की पहचान: मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राजनीतिक जीवन में रहते हुए खंडूड़ी जी ने उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, सुशासन (Good Governance), प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की एक ऐसी मजबूत पहचान बनाई, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने प्रदेशहित में कई कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लेकर उत्तराखंड के विकास को एक नई और सही दिशा प्रदान की।
अपूरणीय क्षति: सीएम ने भावुक होते हुए कहा कि जनरल साहब की सादगी, स्पष्टवादिता और गजब की कार्यकुशलता सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। उनका जाना उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक ऐसा शून्य है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिजनों व लाखों समर्थकों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी: एक नजर में महान सफर
| जीवन के मुख्य पड़ाव | उपलब्धियां / धारित पद | विशेष योगदान और पहचान |
| सैन्य सेवा (Indian Army) | मेजर जनरल (कोर ऑफ इंजीनियर्स) | एवीएसएम (AVSM) से सम्मानित, युद्ध और शांति काल में उत्कृष्ट रणनीतिकार। |
| केंद्रीय राजनीति | पूर्व केंद्रीय सतही परिवहन मंत्री (वाजपेयी सरकार) | देश में 'स्वर्णिम चतुर्भुज योजना' (Golden Quadrilateral) के सूत्रधार। |
| उत्तराखंड के मुख्यमंत्री | दो बार राज्य के मुख्यमंत्री (2007-2009 और 2011-2012) | कड़ा लोकायुक्त बिल और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने वाले पहले सीएम। |
| संसदीय सफर | पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से कई बार सांसद | लोकसभा की रक्षा संबंधी स्थाई समिति के बेहद कड़े और निष्पक्ष अध्यक्ष। |
| मुख्य पहचान | सादगी, सैन्य अनुशासन, कड़क मिजाज और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार | 'खंडूड़ी हैं जरूरी' के नारे से उत्तराखंड की सियासत में छाए रहे। |
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बी. सी. खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद उन्होंने जन सेवा के लिए ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। देश के…
— President of India (@rashtrapatibhvn) May 19, 2026
पुत्री व विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी का भावुक संदेश; राजनीतिक जगत स्तब्ध
पिता के साए के उठ जाने से दुखी उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने एक बेहद भावुक संदेश जारी किया है। पिता के सिद्धांतों को अपना आदर्श मानने वाली ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा ईमानदारी और जनसेवा का मार्ग सिखाया। उन्होंने केवल एक पिता को नहीं खोया है, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक को खोया है जिन्होंने जीवन के हर मोड़ पर देश और समाज को खुद से ऊपर रखना सिखाया।
समर्थकों में भारी शोक:
जैसे ही देहरादून स्थित उनके आवास और उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में यह खबर पहुंची, वैसे ही उनके समर्थकों, शुभचिंतकों और भाजपा व कांग्रेस सहित सभी राजनैतिक दलों के नेताओं का तांता लग गया। कलेक्ट्रेट और सचिवालय से लेकर आम जनता की आंखें नम थीं। हर कोई उनके सैन्य जीवन के किस्सों और मुख्यमंत्री रहते हुए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधारों को याद कर रहा है।
सेना से सियासत तक: देश को दी 'स्वर्णिम चतुर्भुज' जैसी महा-योजना
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था। उन्होंने देश की सेवा का माध्यम भारतीय सेना को चुना। वे सेना की प्रतिष्ठित 'कोर ऑफ इंजीनियर्स' (Corps of Engineers) में शामिल हुए और अपनी कार्यकुशलता के बल पर मेजर जनरल के पद तक पहुंचे। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
- वाजपेयी जी के चहेते: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के वे बेहद करीबी और विश्वसनीय सहयोगियों में से एक थे। अटल जी ने देश में बुनियादी ढांचे को बदलने का जो सपना देखा था, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी जनरल खंडूड़ी को सौंपी गई थी।
- सड़कों का जाल: केंद्रीय भू-सतह परिवहन मंत्री रहते हुए जनरल खंडूड़ी ने देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना 'स्वर्णिम चतुर्भुज योजना' और 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' (PMGSY) को धरातल पर उतारा। आज देश में जो राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) का आधुनिक नेटवर्क दिख रहा है, उसकी मजबूत नींव जनरल खंडूड़ी ने ही रखी थी। इसी कारण उन्हें देश का 'हाईवे मैन' भी कहा गया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में जनरल खंडूड़ी के 4 ऐतिहासिक फैसले
वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद, साल 2007 में जब भाजपा सत्ता में आई, तो हाईकमान ने राज्य की कमान एक बेहद ईमानदार चेहरे को सौंपने का निर्णय लिया और जनरल खंडूड़ी राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल के ये फैसले आज भी नजीर हैं:
- सशक्त लोकायुक्त विधेयक: मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने देश का सबसे कड़ा और ऐतिहासिक 'लोकायुक्त बिल' उत्तराखंड विधानसभा से पास कराया था, जिसके दायरे में मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी लाया गया था। इस बिल की तारीफ पूरे देश में हुई थी।
- तबादला नीति में पारदर्शिता: सरकारी विभागों में होने वाले सिफारिशी तबादलों और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उन्होंने एक कड़क ट्रांसफर पॉलिसी की शुरुआत की थी, जिससे पहाड़ों में डॉक्टरों और शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित हो सके।
- भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 'जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन' की नीति अपनाई। चाहे कोई कितना भी बड़ा अधिकारी या नेता क्यों न हो, यदि उस पर भ्रष्टाचार का दाग लगा, तो जनरल खंडूड़ी ने उसे बाहर का रास्ता दिखाने में संकोच नहीं किया।
- 'खंडूड़ी हैं जरूरी': वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही थी, तब आलाकमान ने दोबारा खंडूड़ी को कमान सौंपी थी और तत्कालीन दौर में 'खंडूड़ी हैं जरूरी' का नारा पूरे उत्तराखंड के जन-जन की जुबान पर चढ़ गया था।
एक युग का अंत, जो हमेशा याद दिलाएगा सुचिता की राजनीति
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक पीढ़ी का अवसान है जो सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों, सैन्य अनुशासन और सादगी को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती थी। आज के दौर की चमक-दमक वाली राजनीति से दूर, जनरल खंडूड़ी कड़क मिजाज के बावजूद जनता के प्रति बेहद संवेदनशील थे।
पहाड़ के विकास के लिए उनके द्वारा की गई नीतियां और देश की सीमाओं की सुरक्षा से लेकर देश को सड़कों से जोड़ने तक का उनका योगदान इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। देवभूमि उत्तराखंड अपने इस महान सपूत, जांबाज सैनिक और दूरदर्शी राजनेता को हमेशा आदर और सम्मान के साथ याद रखेगी। पूरा उत्तराखंड आज इस दुख की घड़ी में उनके शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है।
