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देहरादून, 05 मई, 2026: उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों एक ऐसे 'फर्जी खेल' की चर्चा है जिसने बड़े-बड़े धुरंधरों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। खुद को कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का निजी सचिव (PA) कनिष्क सिंह बताकर महिलाओं और नेताओं को ठगने वाले एक हाई-प्रोफाइल गिरोह का देहरादून पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।
इस गिरोह के सरगना ने न केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय महिला नेत्रियों को अपना निशाना बनाया, बल्कि उन्हें पार्टी में बड़े पद और विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये डकार लिए। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित महिला नेत्री भावना पांडे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
कैसे बुना गया ठगी का ताना-बाना?
ठगी का यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आरोपी ने खुद को कनिष्क सिंह के रूप में पेश किया और ट्रूकॉलर (Truecaller) जैसी ऐप पर अपनी फर्जी पहचान स्थापित की। उसने अपना शिकार ऐसी नेत्रियों को बनाया जो संगठन में रसूख पाने की इच्छुक थीं।
प्रमुख बिंदु: ठगी का तरीका
- फर्जी पहचान: आरोपी गौरव कुमार अमृतसर का निवासी है, लेकिन वह फोन पर खुद को 'कनिष्क सिंह' बताता था।
- नेताओं की आवाज का क्लोनिंग: आरोपी ने तकनीक का सहारा लेकर या आवाज बदलकर वरिष्ठ नेताओं की आवाज सुनाई, जिससे पीड़ितों को लगा कि वे सीधे आलाकमान से बात कर रहे हैं।
- बड़े नाम, बड़ा झांसा: आरोपी ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य और हरीश रावत जैसे बड़े नामों का इस्तेमाल किया ताकि विश्वास अटूट बना रहे।
भावना पांडे से 25 लाख की लूट: जाखन में हुआ 'लेन-देन'
पुलिस जांच के अनुसार, मामले की शुरुआत 3 मई को हुई जब भावना पांडे ने थाना राजपुर में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि 'कनिष्क सिंह' ने उनसे संपर्क कर पार्टी में पद और उत्तराखंड में सर्वे कराने के नाम पर 25 लाख रुपये की मांग की थी।
13 अप्रैल 2026 को आरोपी ने अपने एक साथी को जाखन स्थित पीनाकिल रेजिडेंसी (भावना पांडे का आवास) भेजा, जहाँ पीड़िता ने उसे 25 लाख रुपये नकद सौंप दिए। पैसा मिलते ही आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क काट लिया। इसके बाद पीड़िता को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस की शरण ली।
ठगी के खेल का मुख्य विवरण
| विवरण | जानकारी |
| मुख्य आरोपी | गौरव कुमार (42 वर्ष), निवासी अमृतसर, पंजाब |
| फर्जी नाम | कनिष्क सिंह (राहुल गांधी का कथित PA) |
| मुख्य पीड़िता | भावना पांडे (महिला नेत्री) |
| ठगी की राशि (देहरादून) | ₹ 25,00,000 (पच्चीस लाख रुपये) |
| धाराएं | 318(4) बीएनएस (BNS) |
| सहयोगी आरोपी | छज्जू, रजत मदान और मनिंदर सिंह कालू (फरार) |
| बरामदगी | दो मोबाइल फोन और एक डोंगल |
सियासी समीकरण बदलने का दावा: गोदियाल को हटाने का झांसा
जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। भावना पांडे ने पुलिस को बताया कि ठग ने उनसे बड़े-बड़े राजनीतिक वादे किए थे। आरोपी ने दावा किया था कि वह गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवा देगा और उनकी जगह प्रीतम सिंह या यशपाल आर्य को अध्यक्ष बनवा देगा।
यही नहीं, उसने कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद के साथ भी लंबी बातचीत की और कई अन्य महिला नेत्रियों को टिकट दिलाने का भरोसा दिलाया। आरोपी ने पार्टी कार्यक्रमों, आंतरिक सर्वे और संगठनात्मक खर्च के नाम पर लगातार पैसों की मांग जारी रखी थी।
राजस्थान से बिहार तक फैला था जाल: करोड़ों की ठगी
पूछताछ में गौरव कुमार ने कबूल किया कि वह पिछले कई सालों से देश के अलग-अलग राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा है। उसका नेटवर्क पंजाब, राजस्थान और बिहार तक फैला हुआ था।
- राजस्थान (2017): जयपुर में दो नेताओं को विधायक का टिकट दिलाने के नाम पर क्रमशः 1 करोड़ 90 लाख और 12 लाख रुपये की ठगी की।
- बिहार (2025): पटना में एक नेता से 3 लाख रुपये ऐंठे।
- कार्यप्रणाली: वह गूगल के जरिए नेताओं की जानकारी निकालता था और फिर उनकी कमजोरी (पद और टिकट की लालसा) का फायदा उठाता था।
तकनीकी जांच और गिरफ्तारी: एसएसपी डोभाल की टीम को मिली कामयाबी
देहरादून के एसएसपी (SSP) डोभाल के नेतृत्व में गठित टीमों ने मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी को ट्रैक किया। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी जाखन क्षेत्र में किसी अन्य व्यक्ति से पैसे लेने आने वाला है, जहाँ घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया।
पुलिस टीम के जांबाज:
- राजपुर थाना: उपनिरीक्षक सूरज कंडारी (चौकी प्रभारी जाखन), कांस्टेबल मुकेश, कांस्टेबल ललित।
- SOG टीम: उपनिरीक्षक संदीप कुमार, कांस्टेबल ललित, कांस्टेबल देवेंद्र।
प्रमुख खुलासे: कैसे जीता नेताओं का भरोसा?
- वॉयस मॉड्यूलेशन: आरोपी फोन कॉल के दौरान वरिष्ठ नेताओं के नाम और उनकी जैसी आवाज का उपयोग करता था।
- फर्जी स्क्रीनशॉट: पीड़िता को विश्वास दिलाने के लिए वह नेताओं के नाम से फर्जी व्हाट्सएप मैसेज के स्क्रीनशॉट भेजता था।
- होटल और मीटिंग का झांसा: वह बड़े होटलों में मीटिंग फिक्स करने और चुनावी रणनीति तैयार करने के नाम पर अतिरिक्त खर्च लेता था।
- सोशल मीडिया का दुरुपयोग: आरोपी ने सोशल मीडिया पर सक्रिय नेत्रियों की प्रोफाइल स्टडी की और उनकी महत्वाकांक्षाओं को भांप कर हमला बोला।
राजनीतिक गलियारों में हलचल: 'हरदा' से 'हरक' तक के नामों का इस्तेमाल
इस खुलासे के बाद उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। आरोपी ने जिन दिग्गजों—गणेश गोदियाल, डॉ. हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य और प्रदीप टम्टा—के नाम लिए हैं, उनकी ओर से भी प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। यह मामला दिखाता है कि कैसे 'सत्ता की भूख' का फायदा उठाकर ठग करोड़ों के साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं।
सावधानी ही बचाव है
देहरादून पुलिस ने इस मामले के जरिए सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी राजनीतिक दल में पद या टिकट 'पैसे' के जरिए नहीं मिलता। यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी बड़े नेता का करीबी बताकर आर्थिक मांग करता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। फिलहाल, गौरव कुमार सलाखों के पीछे है और उसके साथियों—छज्जू, रजत मदान और मनिंदर सिंह कालू—की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उत्तराखंड के और कितने नेता इस गिरोह का शिकार बने हैं।
