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नरेंद्रनगर, टिहरी गढ़वाल | 01 मई, 2026 : उत्तराखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। टिहरी जनपद के नरेंद्रनगर ब्लॉक में राजकीय शिक्षक संघ और राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF) के बैनर तले शिक्षकों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष को तेज करने का निर्णय लिया है। ब्लॉक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष श्री प्रवीण सिंह पंवार के नेतृत्व में शिक्षक एकजुट होकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी जीपीएफ पेंशन व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए।
NPS बनाम OPS: क्यों आक्रोशित हैं शिक्षक?
श्री प्रवीण सिंह पंवार ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि पुरानी पेंशन योजना केवल एक वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि शिक्षकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का आधार है। उन्होंने नवीन पेंशन योजना (NPS) की कमियों को उजागर करते हुए कई महत्वपूर्ण तर्क दिए:
- शेयर बाजार का जोखिम: NPS के तहत कर्मचारियों के वेतन का अंशदान निजी कंपनियों के शेयर बाजार में लगाया जा रहा है, जो पूर्णतः असुरक्षित है।
- अपर्याप्त पेंशन: सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को मात्र 500 से 1000 रुपये तक की मामूली मासिक पेंशन मिल रही है, जिससे बुढ़ापे का गुजारा असंभव है।
- जीपीएफ (GPF) की सुविधा का अभाव: पुरानी व्यवस्था में शिक्षक आवश्यकतानुसार अपने जीपीएफ खाते से बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और विवाह जैसे कार्यों के लिए धन निकाल सकते थे, जो अब संभव नहीं है।
- महंगाई भत्ते (DA) का लाभ: पुरानी पेंशन में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डीए का लाभ मिलता था, जिससे जीवनसाथी के साथ सम्मानजनक जीवन जीना आसान था।
मजदूर दिवस के अवसर पर पौड़ी में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर एक विशाल प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- 'राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF), उत्तराखंड' द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में पौड़ी कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया गया।
- इस रैली में शिक्षकों और कर्मचारियों का भारी जनसैलाब उमड़ा, जो पुरानी पेंशन योजना लागू न होने के कारण काफी आक्रोशित थे।
- आंदोलनकारियों ने कमिश्नर कार्यालय में उपस्थित अधीनस्थ अपर जिलाधिकारी (ADM) महोदया को अपना मांग पत्र/ज्ञापन सौंपा।
- इस प्रदर्शन के माध्यम से कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई है।
NOPRUF का सामाजिक सरोकार और संघर्ष
राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा केवल आंदोलन तक सीमित नहीं है। श्री पंवार ने बताया कि संगठन ने समय-समय पर लोकहित के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है:
- पर्यावरण संरक्षण: हरेला दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर व्यापक वृक्षारोपण अभियान।
- मानवीय सहायता: कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंदों को अनाज, फल, मास्क और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर संगठन ने 'कोरोना योद्धा' की भूमिका निभाई।
- स्वच्छता अभियान: राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन।
विधानसभा चुनाव 2027 और राजनीतिक दबाव
शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि उत्तराखंड में लगभग एक लाख कार्मिक इस नवीन पेंशन योजना से पीड़ित हैं।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| पीड़ित कार्मिकों की संख्या | लगभग 1,00,000 (एक लाख) |
| चुनावी वादा | 2022 के चुनाव में विधायकों ने बहाली का वादा किया था |
| आगामी चुनौती | विधानसभा चुनाव 2027 निकट है |
| मुख्य मांग | पुरानी जीपीएफ (GPF) पेंशन योजना की बहाली |
ठोस कदम उठाने की तैयारी
राजकीय शिक्षक संघ नरेंद्रनगर ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार जल्द ही पुरानी पेंशन बहाली पर कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं करती है, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। श्री प्रवीण सिंह पंवार ने कहा कि कर्मचारियों का आक्रोश तभी शांत होगा जब राज्य में पुरानी पेंशन की घोषणा होगी। आने वाले समय में संगठन इस दिशा में ठोस और निर्णायक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
