कोटद्वार में एडीबी परियोजना पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी का कड़ा रुख: वार्ड 04 से 26 तक के विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण


Aapki Media AI


कोटद्वार/देहरादून, 25 जून, 2026: उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के अंतर्गत आने वाले प्रमुख प्रवेश द्वार और औद्योगिक नगरी कोटद्वार के समग्र, आधुनिक और दीर्घकालिक ढांचागत विकास (Infrastructure Development) को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय विधायिका ने अपनी प्रशासनिक सक्रियता चरम पर पहुंचा दी है। उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने आज गुरुवार (25 जून) को कोटद्वार नगर निगम के वार्ड संख्या 04 से लेकर वार्ड संख्या 26 तक एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB - एशियन विकास बैंक) द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त (Funded) वृहद पेयजल एवं आधारभूत अवसंरचना परियोजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों का सघन स्थलीय निरीक्षण (On-Site Inspection) किया।

 

कोटद्वार में एडीबी परियोजना पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी का कड़ा रुख: वार्ड 04 से 26 तक के विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण



इस उच्च स्तरीय विधिक और प्रशासनिक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न वार्डों में निर्माणाधीन पाइपलाइन नेटवर्क, ओवरहेड टैंकों तथा सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्यों की वास्तविक भौतिक प्रगति (Physical Progress), निर्माण सामग्री की गुणवत्ता (Quality Control) तथा निविदा (Tender) के निर्धारित विधिक मानकों के अनुरूप कार्यों के क्रियान्वयन का जायजा लेना था। निरीक्षण के दौरान कार्यों में शिथिलता पाए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष ने संबंधित कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को कड़े विधिक और प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए।


तकनीकी एवं नीतिगत विज़न: जर्जर पाइपलाइनों से मुक्ति और बढ़ती आबादी हेतु सुचारू जलापूर्ति



स्थलीय निरीक्षण के दौरान मीडिया और स्थानीय नागरिकों को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह एडीबी (ADB) परियोजना केवल तात्कालिक राहत के लिए नहीं है, बल्कि यह कोटद्वार शहर के आगामी 30 से 50 वर्षों के भविष्य और बढ़ती जनसंख्या घनत्व को ध्यान में रखकर विधिक रूप से डिजाइन की गई है।

  1. जर्जर बुनियादी ढांचे का विधिक उपचार: वर्तमान में कोटद्वार के कई वार्डों में दशकों पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइन नेटवर्क के कारण पानी की भारी बर्बादी (Water Leakage) होती है और दूषित पानी की शिकायतें आती हैं।
  2. परियोजना का विधिक लाभ: इस बहु-करोड़ीय परियोजना के पूर्ण होने के बाद वार्ड संख्या 04 से 26 सहित पूरे कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के हजारों परिवारों को प्रतिदिन शुद्ध, स्वच्छ और नियमित रूप से हाई-प्रेशर पेयजल आपूर्ति का सीधा विधिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल जल की बर्बादी शून्य स्तर पर आएगी, बल्कि जलजनित बीमारियों पर भी विधिक रोक लगेगी।


कोटद्वार एडीबी (ADB) पेयजल एवं अवसंरचना परियोजना: प्रशासनिक एवं तकनीकी डेटा मैट्रिक्स



इस महत्वपूर्ण नगरीय पुनरुद्धार योजना के भौगोलिक आच्छादन, मौके पर उपस्थित तकनीकी नेतृत्व और प्रशासनिक सुशासन के कड़े विधिक मानकों को इस तालिका में संकलित किया गया है:

विधिक, वित्तीय एवं ढांचागत पैरामीटर्सकोटद्वार नगर निगम ग्राउंड जीरो डेटा (25 जून, 2026)संबंधित विधिक नियमावली / प्रशासनिक उत्तरदायित्व
परियोजना का मुख्य वित्तीय स्रोतएशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) वित्त पोषित।अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्तीय मानकों (International Quality Standards) के अनुरूप ऑडिट।
भौगोलिक विधिक आच्छादन (Scope)वार्ड संख्या 04 से वार्ड संख्या 26 तक (संपूर्ण नगर क्षेत्र)।कोटद्वार नगर निगम के 20 से अधिक घने रिहायशी और व्यावसायिक वार्ड आच्छादित।
निरीक्षण का मुख्य प्रशासनिक उद्देश्यभौतिक प्रगति, गुणवत्ता जांच एवं जन-असुविधा का निवारण।उत्तराखण्ड लोक निर्माण एवं जल संस्थान विधिक गुणवत्ता नियमावली का अनुपालन।
परियोजना के मुख्य विधिक प्रह री (निरीक्षक)श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण (विधानसभा अध्यक्ष व विधायक)।विधायी सुशासन एवं जन-जवाबदेही का धरातलीय संपादन।
मौके पर उपस्थित मुख्य तकनीकी टीमपीएम जतिन सिंह सैनी, एई सुमित कुमार, जेई विश्रुत।तकनीकी खामियों और डिजाइन विसंगतियों को मौके पर दूर करने हेतु उत्तरदायी।
प्रबंधन एवं अनुबंधित कार्यदायी पक्षडीएससी मैनेजर नरेंद्र सिंह एवं ठेकेदार प्रतिनिधि दीपक व्यास।समय-सीमा के भीतर माइलस्टोन पूरे न करने पर विधिक दंडात्मक कार्रवाई के भागी।
परियोजना का मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव24x7 स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, जर्जर लाइनों व जलभराव से विधिक मुक्ति।सतत विकास लक्ष्य-6 (SDG-6: स्वच्छ जल और सैनिटेशन) की विधिक संपुष्टि।

प्रशासनिक कड़ाई: लापरवाही और अनियमितता पर 'जीरो-टॉलरेंस'; तय समय सीमा में काम पूरा करने का अल्टीमेटम


वार्डों के निरीक्षण के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने सड़क की खुदाई के बाद उसके समतलीकरण में हो रही देरी और मलबे के कारण स्थानीय जनता को हो रही आवागमन की विसंगतियों पर गंभीर रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर मौजूद परियोजना प्रबंधक (Project Manager) को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जनता की गाढ़ी कमाई और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहयोग से बन रही इस योजना में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, घटिया सामग्री का उपयोग या विधिक मानदंडों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी का कड़ा विधिक संदेश:


"एडीबी परियोजना कोटद्वार के समग्र और दीर्घकालिक विकास की दिशा में हमारी सरकार का एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम है। अधिकारियों और ठेकेदारों को यह कान खोलकर सुन लेना चाहिए कि कार्यों में गुणवत्ता, पूर्ण पारदर्शिता और विधिक जवाबदेही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विकास कार्यों के नाम पर आम जनता को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक असुविधा में नहीं रखा जा सकता। सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी भी वार्ड में सड़क बहाली या पाइपलाइन बिछाने में तकनीकी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित विधिक एजेंसी के खिलाफ तत्काल कठोरतम दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"


 

कोटद्वार नगरीय सुशासन और अवसंरचना गति बढ़ाने हेतु 4 मुख्य रणनीतिक निर्देश


श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने कार्यस्थल पर ही परियोजना की विधिक निगरानी और जन-सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए विभाग को निम्नलिखित चार विधिक और रणनीतिक निर्देश जारी किए:


  • खुदी सड़कों का तत्काल विधिक समतलीकरण (Restoration Timeline): पाइपलाइन बिछाने के लिए जिस भी वार्ड की सड़क खोदी जा रही है, कार्य पूरा होने के अधिकतम 48 घंटों के भीतर उसका विधिक समतलीकरण और डामरीकरण (Hot-Mix Paving) सुनिश्चित किया जाए।
  • सुरक्षा और रिफ्लेक्टिव साइनेज (Safety Norms): निर्माण स्थलों पर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और रात्रि के समय चमकने वाले रिफ्लेक्टिव विधिक साइनेज (Reflective Signage) अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि कोई दुर्घटना न हो।
  • त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट और डिजिटल ऑडिट: परियोजना प्रबंधन विभाग प्रत्येक 15 दिन में वार्डवार प्रगति आख्या स्थानीय विधायक कार्यालय और जिला प्रशासन को विधिक रूप से प्रेषित करेगा, जिसका औचक तकनीकी ऑडिट कराया जाएगा।
  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ विधिक समन्वय: ठेकेदार और कनिष्ठ अभियंता (JE) कार्य शुरू करने से पहले संबंधित वार्ड के पार्षदों और विधायक प्रतिनिधियों (जैसे महेश नेगी मुन्ना फौजी, कमल नेगी, दीपक गौड़) के साथ समन्वय स्थापित करेंगे, ताकि जन-अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य हो सके।

 

आधुनिक और आत्मनिर्भर कोटद्वार की ओर बढ़ते मजबूत कदम


25 जून 2026 को कोटद्वार के वार्ड संख्या 04 से 26 तक संचालित एडीबी पेयजल परियोजना का यह सघन निरीक्षण यह सिद्ध करता है कि उत्तराखण्ड की विधायी और प्रशासनिक व्यवस्था धरातलीय सुशासन (Ground-Level Governance) को लेकर पूरी तरह गंभीर है। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण की यह सक्रियता न केवल कार्यदायी संस्थाओं में जवाबदेही का भाव पैदा करेगी, बल्कि इससे सरकारी धन का शत-प्रतिशत सदुपयोग भी सुनिश्चित होगा।


अंतर्राष्ट्रीय विकास मानकों (एडीबी) के तहत बन रहा यह बुनियादी ढांचा आने वाले समय में कोटद्वार को एक आधुनिक और सुव्यवस्थित शहर के रूप में स्थापित करेगा। अधिकारियों द्वारा समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने का विधिक आश्वासन यह भरोसा देता है कि कोटद्वार की जनता को जल्द ही पानी की किल्लत और धूल-मिट्टी की समस्याओं से स्थायी विधिक मुक्ति मिल जाएगी। यह परियोजना 'श्रेष्ठ उत्तराखण्ड' और 'आत्मनिर्भर कोटद्वार' के निर्माण की दिशा में मील का एक स्वर्णिम पत्थर साबित होगी।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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