संविधान हत्या दिवस': लोकतंत्र सेनानियों का हुआ महा-सम्मान, मासिक सम्मान निधि बढ़कर हुई ₹20,000


Aapki Media AI


देहरादून, 25 जून, 2026: भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे क्रूर और दमनकारी कालखंड की विधिक व राजनीतिक समीक्षा करने तथा नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए लड़ने वाले महानायकों को याद करने के लिए आज उत्तराखण्ड की राजधानी में एक बड़ा विधिक व प्रशासनिक समागम हुआ। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून के जी.एम.एस. रोड स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित भव्य 'संविधान हत्या दिवस' (Constitution Murder Day) कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी विधिक अवसर पर मुख्यमंत्री ने आपातकाल (Emergency of 1975) के दौरान देश में नागरिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों (मीसा और डीआईआर बंदियों) एवं उनके परिजनों को विधिक रूप से सम्मानित किया।

 

संविधान हत्या दिवस': लोकतंत्र सेनानियों का हुआ महा-सम्मान, मासिक सम्मान निधि बढ़कर हुई ₹20,000


अपने कड़े नीतिगत संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि 25 जून 1975 को देश पर थोपा गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा महज अपनी विधिक सत्ता को बचाने के लिए देश की समूची न्यायप्रणाली को बंधक बना लिया गया था, नागरिक स्वतंत्रताओं का घोर हनन किया गया था और प्रेस की स्वतंत्रता पर पूरी तरह विधिक अंकुश लगा दिया गया था।
 

ऐतिहासिक विधिक विश्लेषण: मौलिक अधिकारों का कुचला जाना और जागरूक जनता का लोकतांत्रिक प्रतिकार



मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के संविधान के भाग-3 में वर्णित मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का संदर्भ देते हुए तत्कालीन तानाशाही रवैये पर तीखा विधिक प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्याप्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) और मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है।

  1. संविधान की मूल आत्मा पर आघात: वर्ष 1975 में इन सभी विधिक अधिकारों को रातों-रात सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था। न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बाधित कर संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को गंभीर विधिक क्षति पहुंचाई गई थी।
  2. जनता का ऐतिहासिक प्रत्युत्तर: सीएम धामी ने गर्व से रेखांकित किया कि देश की जागरूक और स्वाभिमानी जनता ने तत्कालीन शासकों के इस विधिक दमन का जवाब पूरी तरह से लोकतांत्रिक माध्यमों (चुनावों) से देते हुए देश में लोकतंत्र की गौरवशाली पुनर्स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का यही त्याग और विधिक संघर्ष आज की भावी पीढ़ियों के लिए राष्ट्रवाद और सुशासन का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत है।

 

'संविधान हत्या दिवस' एवं लोकतंत्र सेनानी कल्याण योजना 2026: विधिक एवं प्रशासनिक डेटा मैट्रिक्स



उत्तराखण्ड शासन द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के सामाजिक सुरक्षा ग्रिड, उनकी सम्मान निधि में ऐतिहासिक विधिक वृद्धि और आज के कार्यक्रम की संगठनात्मक रूपरेखा का संपूर्ण डेटा इस प्रशासनिक तालिका में संकलित है:


विधिक एवं प्रशासनिक मापदंड (Parameters)उत्तराखण्ड शासन द्वारा जारी प्रामाणिक डेटा व प्रगतिसंबंधित विधिक नियमावली एवं दंडात्मक/सकारात्मक प्रभाव
आयोजन का मुख्य विधिक विषय'संविधान हत्या दिवस' विशेष स्मरण एवं सम्मान सभा।25 जून 1975 के विधिक व संवैधानिक आपातकाल का प्रतिकार।
समारोह का मुख्य भौतिक स्थलजी. एम. एस. रोड, देहरादून, उत्तराखण्ड।राज्य स्तरीय प्रशासनिक और नागरिक सुशासन ग्रिड।
संशोधित मासिक सम्मान निधि₹20,000 प्रतिमाह (बीस हजार रुपये)।वर्ष 2023 में विधिक संशोधन कर ₹16,000 से बढ़ाकर ₹20,000 किया गया।
प्रदान किए गए विशेष विधिक प्रलेखविशेष विधिक पहचान-पत्र (Identity Cards)।आपातकाल के दौरान जेल गए सेनानियों व आश्रित जीवनसाथियों हेतु।
सुशासन का मूल नीतिगत विज़नअंत्योदय, राष्ट्र प्रथम, सबका साथ, सबका विकास।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के विधिक लक्ष्य से लिंकेज।
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य विधिक नेतृत्वराज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।विधायी और कार्यपालिका के शीर्ष प्रतिनिधियों का संयुक्त मंच।
उपस्थित अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधिविधायक खजान दास, सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ।क्षेत्रीय सुशासन और नागरिक कल्याण समितियों के नीतिगत मार्गदर्शक।

कल्याणकारी नीतियां: ₹16,000 से बढ़ाकर ₹20,000 की गई सम्मान निधि; आश्रितों को विशेष विधिक पहचान-पत्र


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखण्ड की धामी सरकार केवल भाषणों में विश्वास नहीं रखती, बल्कि वह लोकतंत्र सेनानियों के वास्तविक कल्याण और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए धरातल पर विधिक कार्य कर रही है। उन्होंने सरकार द्वारा लिए गए दो सबसे बड़े विधिक और बजटीय निर्णयों का उल्लेख किया:


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नीतिगत वक्तव्य:


"हमारी सरकार ने लोकतंत्र के इन प्रहरियों के बुढ़ापे और उनकी सामाजिक गरिमा को सुरक्षित करने के लिए वर्ष 2023 में एक ऐतिहासिक विधिक संशोधन किया। हमने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक सम्मान निधि को ₹16,000 से बढ़ाकर सीधे ₹20,000 प्रतिमाह कर दिया है। इसके साथ ही, आपातकाल की यातनाएं सहने वाले सेनानियों और उनके निधन के पश्चात उनके आश्रित जीवनसाथियों को राज्य सरकार द्वारा विशेष विधिक पहचान-पत्र जारी किए गए हैं। इस कार्ड के माध्यम से उन्हें राजकीय परिवहन, चिकित्सा और अन्य विधिक सेवाओं में प्राथमिकता और गरिमापूर्ण रियायतें प्रदान की जा रही हैं।"


 

विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखण्ड के निर्माण हेतु मुख्यमंत्री के 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ


समारोह में उपस्थित युवा पीढ़ी और गणमान्य नागरिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के भावी सुशासन रोडमैप के निम्नलिखित चार विधिक और वैचारिक स्तंभों को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया:


  • ऐतिहासिक विधिक चेतना का लोक-प्रसार: शिक्षा और सूचना विभाग के माध्यम से आपातकाल के विधिक हनन और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष गाथा को राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और डिजिटल पुस्तकालयों में विधिक रूप से शामिल किया जाएगा।
  • अंत्योदय आधारित सेवा एवं गरीब कल्याण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मूलमंत्र को अपनाते हुए विकास की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी रूप से पहुंचाना।
  • संवेधानिक संस्थाओं का विधिक सम्मान: कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखते हुए 'जीरो-टॉलरेंस ऑन करप्शन' की विधिक नीति को पूरी कड़ाई से लागू रखना।
  • 'राष्ट्र प्रथम' (Nation First) की सामूहिक जिम्मेदारी: संकीर्ण क्षेत्रीय और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर प्रत्येक नागरिक और अधिकारी द्वारा 'श्रेष्ठ उत्तराखण्ड' के निर्माण में अपना विधिक और नैतिक योगदान सुनिश्चित करना।

 

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति: राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व का एकजुट विधिक मंच


जी.एम.एस. रोड पर आयोजित इस भव्य राजकीय और वैचारिक सम्मान समारोह में उत्तराखण्ड के शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व ने एकजुटता दिखाई। मंच पर मुख्यमंत्री के साथ राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, विधायक श्री खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, और श्री उमेश शर्मा काऊ विधिक रूप से उपस्थित रहे।


इसके साथ ही, संगठन के स्तर पर वैचारिक सुशासन को मजबूती देने के लिए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री शैलेन्द्र बिष्ट, प्रदेश महामंत्री श्री कुंदन परिहार तथा महानगर अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ अग्रवाल ने भी लोकतंत्र सेनानियों के संघर्षों को याद करते हुए उनके प्रति राज्य की ओर से गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। सभी अतिथियों ने एक सुर में कहा कि आपातकाल के विरुद्ध खड़ा हुआ वह आंदोलन वास्तव में भारत के दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के समान था।


 

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का विधिक पथ


25 जून 2026 को देहरादून में आयोजित यह 'संविधान हत्या दिवस' समारोह इस व्यावहारिक और विधिक सत्य को पुनर्कथित करता है कि नागरिक अधिकार और संवैधानिक स्वतंत्रताएं किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की रीढ़ होती हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को ₹20,000 प्रतिमाह करना और उनके आश्रितों को विशेष पहचान-पत्रों के जरिए विधिक संरक्षण देना इस बात का प्रमाण है कि राज्य अपने इतिहास और उसके संरक्षकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।


आपातकाल की 51वीं विधिक वर्षगांठ (1975-2026) पर आयोजित यह कार्यक्रम नई पीढ़ी को यह विधिक पाठ पढ़ाता है कि जो स्वतंत्रता हमें आज सहज प्राप्त है, उसके पीछे हजारों राष्ट्रभक्तों का असीम त्याग और संघर्ष छुपा हुआ है। सीएम धामी का यह आह्वान बिल्कुल समयोचित है कि 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को सर्वोपरि रखकर ही हम एक 'विकसित भारत' और 'श्रेष्ठ व आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड' के निर्माण के विधिक संकल्प को सिद्ध कर सकते हैं। यह आयोजन लोकतांत्रिक सुशासन (Democratic Governance) की जड़ों को और अधिक गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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