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देहरादून, 22 जून, 2026: मुख्यमंत्री के 'अपराध मुक्त देवभूमि' के विधिक विज़न को साकार करने तथा डिजिटल स्पेस में आम नागरिकों व उद्यमियों के साथ होने वाली धोखाधड़ी के विरुद्ध पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री दीपम सेठ के कड़े दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड पुलिस को एक और बड़ी अंतरराज्यीय सफलता प्राप्त हुई है। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एक संयुक्त विधिक और तकनीकी टीम ने सुदूर पश्चिम बंगाल के रानाघाट क्षेत्र में एक अत्यंत गोपनीय व साहसिक छापामार कार्रवाई को अंजाम देते हुए देशव्यापी साइबर ठगी गिरोह के दो मुख्य स्तंभों को दबोच लिया है।
यह शातिर गिरोह डार्क वेब और संगठित साइबर सिंडिकेट के लिए 'खच्चर खातों' (Mule Accounts), सिम कार्ड और फर्जी बैंकिंग किट की विधिक सप्लाई करने का काम करता था। इन अभियुक्तों ने देहरादून के एक स्थानीय कारोबारी का मोबाइल फोन और ई-मेल आईडी हैक कर उनकी कंपनी के अधिकृत बैंक खाते से लगभग ₹24.95 लाख (लगभग 25 लाख रुपये) की ऑनलाइन विधिक चपत लगाई थी। एसटीएफ की इस त्वरित कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि साइबर अपराधी चाहे देश के किसी भी कोने में छिपे हों, उत्तराखण्ड पुलिस के तकनीकी हाथ उन तक पहुंचने में पूरी तरह सक्षम हैं।
ग्राउंड जीरो से वारदात का खुलासा: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने खोली हाई-टेक ठगी की परतें
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ व साइबर विंग श्री अजय सिंह ने इस हाई-प्रोफाइल अंतरराज्यीय मामले का विधिक अनावरण करते हुए बताया कि देहरादून के एक निवासी (कारोबारी) ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
- वारदात का तकनीकी तरीका: अज्ञात साइबर हैकर्स ने वादी का मोबाइल फोन रिमोट एक्सेस टूल या मैलवेयर के जरिए हैक कर लिया था। इसके बाद अपराधियों ने पीड़ित की पंजीकृत ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर को बैंक के डेटाबेस में विधिक रूप से परिवर्तित (Change) कर दिया, ताकि ट्रांजेक्शन का कोई भी रीयल-टाइम अलर्ट (OTP या SMS) पीड़ित को प्राप्त न हो सके।
- अकाउंट से ₹24.95 लाख साफ: इस विधिक सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए ठगों ने पीड़ित की कंपनी के खाते से कुल ₹24,95,000 की राशि विभिन्न संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली थी।
देहरादून ₹25 लाख साइबर ठगी मामला 2026: विधिक, तकनीकी एवं आपराधिक प्रोफाइल
एसटीएफ और साइबर विंग द्वारा पश्चिम बंगाल से की गई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी और बरामदगी के समस्त विधिक एवं सांख्यिकीय डेटा को इस केस प्रोफाइल तालिका में संकलित किया गया है:
विधिक एवं आपराधिक पैरामीटर (Case Variables) | साइबर सेल/एसटीएफ संयुक्त कार्रवाई का प्रामाणिक डेटा | विधिक धाराएं, दंडात्मक प्रावधान एवं तकनीकी प्रभाव |
पंजीकृत मुकदमा संख्या (FIR) | मु0अ0सं0 14/2026, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून। | प्रारंभिक विधिक विवेचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई। |
लागू विधिक धाराएं (Acts) | धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं 66डी आईटी एक्ट। | धोखाधड़ी, संगठित आपराधिक साजिश और कंप्यूटर जनित ठगी की गंभीर विधिक धाराएं। |
ठगी गई कुल विधिक राशि | ₹24.95 लाख (INR 24,95,000)। | व्यवसायिक खाते को हैक कर किया गया बड़ा वित्तीय आघात। |
गिरफ्तारी की विधिक तिथि/स्थान | 18 जून, 2026; रानाघाट, पश्चिम बंगाल (टीम रवानगी 14 जून)। | सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की सटीक विधिक मैपिंग का परिणाम। |
गिरफ्तार मुख्य अभियुक्त-1 | तपन बिस्वास पुत्र कल्पनाथ बिस्वास (उम्र 45 वर्ष)। | खामरकल्ला, थाना गोपालनगर, जिला नार्थ 24 परगना, प. बंगाल (संदिग्ध खातों का मुख्य संचालक)। |
गिरफ्तार मुख्य अभियुक्त-2 | उत्तम कुमार दास पुत्र सत्यरंजन दास (उम्र 38 वर्ष)। | पल्ला बेल्टा, थाना गोपालनगर, जिला नार्थ 24 परगना, प. बंगाल (मनी ट्रेल की सेकेंड लेयर खाताधारक)। |
बरामद डिजिटल अवसंरचना | 13 डेबिट/एटीएम कार्ड, 03 मोबाइल फोन, पासबुक, चेकबुक। | विभिन्न राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों के फर्जी और किराए के विधिक खाते। |
बरामद अन्य विधिक सामग्री | विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के एक्टिवेटेड सिम कार्ड, सिम कवर व ब्लैंक अकाउंट फॉर्म। | ग्रामीण और अनपढ़ लोगों के नाम पर जालसाजी से खोले गए खातों के विधिक साक्ष्य। |
कैसे काम करता था यह 'अकाउंट सप्लायर सिंडिकेट'? पूछताछ में हुआ सनसनीखेज खुलासा
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के निरीक्षक आशीष गुसांई के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल गई चार सदस्यीय विशेष विधिक टीम (जिसमें उपनिरीक्षक राजीव सेमवाल, उपनिरीक्षक रमन बिष्ट और कांस्टेबल नीरज नेगी शामिल थे) द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों से जब गहन विधिक पूछताछ की गई, तो साइबर ठगी की 'सप्लाई चेन' का एक बेहद डरावना सच सामने आया।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह का तकनीकी नीतिगत वक्तव्य:
"पूछताछ में तपन बिस्वास और उत्तम कुमार दास ने कुबूल किया कि वे मुख्य साइबर हैकर्स (जो अक्सर जामताड़ा, नूंह या विदेशी सर्वरों से काम करते हैं) के लिए 'ग्राउंड हसलर' का काम करते थे। ये अभियुक्त पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कुछ रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में विधिक रूप से चालू (Current) और बचत खाते खुलवाते थे। खाता खुलते ही ये उनके एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग के पासवर्ड और खाते से लिंक्ड सिम कार्ड को ऊंचे दामों पर मुख्य साइबर अपराधियों को बेच देते थे। इस केस में पीड़ित की ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे उत्तम कुमार दास के नाम पर खुले खाते में 'सेकंड लेयर' (Money Laundering Layering) के तहत ट्रांसफर हुआ था, जिसके अकाट्य डिजिटल साक्ष्य हमारी टीम ने जुटाए हैं।"
डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी से विधिक बचाव हेतु साइबर पुलिस के 4 मुख्य सुरक्षा स्तंभ
एसटीएफ और साइबर विंग ने इस बड़ी वारदात के बाद प्रदेश के समस्त उद्यमियों, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए चार अत्यंत महत्वपूर्ण और विधिक सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं:
ई-मेल और सिम स्वैपिंग (Sim Swapping) पर पैनी नजर: यदि आपके मोबाइल के सिग्नल अचानक गायब हो जाएं या बिना किसी कारण के आपका ई-मेल पासवर्ड चेंज होने का अलर्ट आए, तो तुरंत अपने संबंधित बैंक को सूचित कर खाते को विधिक रूप से फ्रीज (Freeze) कराएं।
- रिमोट एक्सेस ऐप्स डाउनलोड करने से बचें: किसी भी अज्ञात कॉलर (जैसे बिजली बिल अपडेट, केवाईसी रिन्यूअल या लॉटरी के बहाने) के कहने पर अपने व्यावसायिक मोबाइल या लैपटॉप पर Anydesk, TeamViewer या RustDesk जैसे रिमोट शेयरिंग ऐप विधिक रूप से कभी इंस्टॉल न करें।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य करें: अपनी कंपनी के सभी नेट बैंकिंग और आधिकारिक ई-मेल आईडी पर बायोमेट्रिक या गूगल ऑथेंटिकेटर आधारित 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' का विधिक सुरक्षा चक्र हमेशा सक्रिय रखें।
- गोल्डन आवर (Golden Hour) का विधिक उपयोग: यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर ठगी के शिकार होते हैं, तो बिना एक मिनट गंवाए केंद्र सरकार के राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल दर्ज कराएं या www.cybercrime.gov.in पर विधिक शिकायत दर्ज करें, ताकि शुरुआती 2 घंटों के भीतर पैसे को ठगों के खाते में ही ब्लॉक (Hold) किया जा सके।
अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी; ट्रांजेक्शन रूट खंगाल रही है पुलिस टीम
एसटीएफ की टीम पश्चिम बंगाल के स्थानीय न्यायालय से दोनों अभियुक्तों का विधिक ट्रांजिट रिमांड (Transit Remand) प्राप्त कर उन्हें देहरादून ला चुकी है। बरामद किए गए 13 एटीएम कार्ड और 03 मोबाइल फोनों को आबकारी और आईटी एक्ट के कड़े विधिक प्राविधानों के तहत मालखाने में सील कर दिया गया है। पुलिस अब इन मोबाइलों के फोरेंसिक डेटा एक्सट्रैक्शन (Forensic Data Extraction) के जरिए यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने देश के अन्य राज्यों में और कितने करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए बैंक खाते सप्लाई किए थे। मामले की विधिक विवेचना अभी जारी है और कुछ अन्य स्थानीय कड़ियों की गिरफ्तारी भी जल्द ही संभावित है।
हाई-टेक जांच और त्वरित विधिक कार्रवाई से टूटेगा साइबर अपराधियों का हौसला
22 जून 2026 को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून द्वारा किया गया यह अंतरराज्यीय खुलासा इस तथ्य को विधिक रूप से स्थापित करता है कि उत्तराखण्ड की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) देश की सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से दक्ष जांच एजेंसियों में से एक बन चुकी है। देहरादून से लगभग 1500 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में जाकर, डिजिटल फुटप्रिंट्स (IP Address और मनी ट्रेल) का पीछा करते हुए तपन बिस्वास और उत्तम कुमार दास जैसे शातिर 'अकाउंट सप्लायर्स' को दबोचना, इंस्पेक्टर आशीष गुसांई और उनकी टीम के उत्कृष्ट पेशेवर कौशल को दर्शाता है।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक साइबर अपराधियों को 'फर्जी खाते और सिम' मिलने बंद नहीं होंगे, तब तक ऑनलाइन ठगी पर पूरी तरह अंकुश लगाना असंभव है। एसएसपी अजय सिंह का यह रुख बेहद सराहनीय है कि वे केवल ऊपरी सतह पर जांच न रोककर, इस पूरे संगठित सिंडिकेट की 'लेयरिंग' को ध्वस्त कर रहे हैं। देवभूमि के नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करने की दिशा में उत्तराखण्ड साइबर पुलिस का यह अभियान यकीनन एक मील का पत्थर साबित होगा।
