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देहरादून, 16 जून, 2026 : किसी भी राष्ट्र या राज्य की वास्तविक प्रगति उसकी कंक्रीट की इमारतों या औद्योगिक पैमानों से नहीं, बल्कि उसकी युवा पीढ़ी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से तय होती है। इसी विजन के साथ, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) तथा समाज कल्याण विभाग (उत्तराखण्ड शासन) के कड़े नीतिगत दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद देहरादून में एक बड़े सामाजिक और प्रशासनिक महा-अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
जनपद में 17 जून से 26 जून, 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान" (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan - NMBA) विषय के अंतर्गत एक विशेष, सघन और बहुआयामी जनजागरूकता अभियान संचालित किया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) श्री अभिनव शाह के कुशल रणनीतिक नेतृत्व और जिला समाज कल्याण अधिकारी श्री दीपांकर घिल्डियाल के विभागीय समन्वय से इस 10 दिवसीय अभियान को केवल सरकारी औपचारिकता न बनाकर एक व्यापक 'जन-आंदोलन' (People's Movement) में बदलने का विधिक व प्रशासनिक खाका खींचा गया है। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों से लेकर नशा प्रभावित संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों (Drug Hotspots) तक को इस सामाजिक शुद्धिकरण अभियान से जोड़ा जाएगा।
अभियान का रणनीतिक ढांचा: बहुउद्देशीय शिविरों और पंचायतों तक पहुंचेगी गूंज
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने कलेक्ट्रेट में अभियान की विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) साझा करते हुए बताया कि मुख्य विकास अधिकारी के सख्त निर्देशों के तहत जनपद के सभी विकासखंडों (Blocks), बहुउद्देशीय शिविरों (Multipurpose Camps), ग्राम पंचायत स्तर की बैठकों और शहरी वार्डों में इस अभियान को पूरी मुस्तैदी से लागू किया जा रहा है।
- शपथ ग्रहण कार्यक्रम: अभियान के शुभारंभ के साथ ही पूरे जनपद में ऑनलाइन (Digital) एवं ऑफलाइन माध्यमों से व्यापक स्तर पर शपथ ग्रहण (Pledge Ceremonies) कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके जरिए लाखों युवाओं, कर्मचारियों और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों (Ill Effects of Substance Abuse) के प्रति न केवल जागरूक किया जाएगा, बल्कि उन्हें जीवन भर नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए विधिक व नैतिक रूप से प्रतिबद्ध किया जाएगा।
- त्रैमासिक मॉनिटरिंग और कड़ा बजट ऑडिट: सीडीओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित विभाग आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की उच्च गुणवत्ता वाली फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और संबंधित वित्तीय व्यय का सटीक विवरण (Expenditure Statement) समाज कल्याण कार्यालय को समय पर सौंपेंगे ताकि अभियान का विधिक मूल्यांकन (Evaluation) किया जा सके।
नशा मुक्त भारत अभियान (देहरादून) 2026: 10 दिवसीय गतिविधियों, तिथियों एवं नोडल केंद्रों का मास्टर कैलेंडर
इस व्यापक और सघन अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों के विस्तृत वर्गीकरण को इस प्रशासनिक तालिका में संकलित किया गया है:
| अभियान की निर्धारित तिथियां (Event Dates) | आयोजित होने वाली मुख्य विधिक व सामाजिक गतिविधियां (Activities) | लक्षित प्रतिभागी एवं अनुमानित संख्या (Target Audience) | प्रमुख चिन्हित शैक्षणिक संस्थान एवं हॉटस्पॉट केंद्र (Venues) |
| 17 जून से 20 जून, 2026 | फुटबॉल मैच, वॉलीबॉल प्रतियोगिताएं तथा नशा विरोधी महा-मैराथन (Marathon)। | जनपद के लगभग 400+ युवा और एथलीट खिलाड़ी। | स्थानीय खेल मैदान, परेड ग्राउंड एवं विभागीय क्रीड़ा स्थल। |
| 21 जून, 2026 (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस) | नशा मुक्ति संकल्प के साथ विशेष योग शिविरों और ध्यान सत्रों का आयोजन। | आमजन, महिला स्वयं सहायता समूह और छात्र-छात्राएं। | समस्त विकासखंड मुख्यालय, पार्क एवं कण्डोली परिसर। |
| 22 जून से 25 जून, 2026 | जनजागरूकता रैलियां, दौड़ प्रतियोगिता, वॉकाथॉन (Walkathon) और भाषण प्रतियोगिता। | स्कूली छात्र, एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS) और नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवक। | राजकीय डॉ. भीमराव आंबेडकर बालक छात्रावास (कण्डोली), महिला आईटीआई। |
| 26 जून, 2026 (अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस) | हस्ताक्षर अभियान (Signature Campaign), नुक्कड़ नाटक, विधिक गोष्ठियां और भव्य समापन समारोह। | समाज के सभी वर्ग, व्यापार मंडल, नागरिक समाज (NGOs)। | सीआईएमएस (CIMS), यूआईएचएमटी (UIHMT) ग्रुप ऑफ कॉलेज और जन-साधारण स्थल। |
| संपूर्ण अभियान अवधि (17-26 जून) | चिन्हित ड्रग प्रभावित संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सघन पैम्फलेटिंग और काउंसलिंग। | नशे की गिरफ्त में आ चुके युवा, उनके अभिभावक और समाज। | राजकीय नशा मुक्ति केंद्र (रायवाला) एवं संबंधित संवेदनशील बस्तियां/क्षेत्र। |
खेलों से युवाओं को जोड़ने का प्रयास: 400+ खिलाड़ी मैदान में; शीर्ष तीन विजेताओं को मिलेगा विधिक पुरस्कार
प्रशासन का मानना है कि युवाओं की ऊर्जा को नशे के अंधकार से बचाने का सबसे सशक्त माध्यम 'खेल और शारीरिक गतिविधियां' हैं। जब युवा खेल के मैदान में पसीना बहाएगा, तो वह मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनेगा और नशीली दवाओं (Narcotic Drugs) के सिंडिकेट से दूर रहेगा।
इसी विजन के तहत 17 से 20 जून तक जनपद स्तर पर फुटबॉल, वॉलीबॉल और मैराथन (Run Against Drugs) जैसी वृहद खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने पुष्टि की कि इन खेल आयोजनों में जिले भर से लगभग 400 से अधिक पंजीकृत युवा धावक और खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। खेल भावना और नशा विरोधी संदेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक विधा और प्रतियोगिता में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को जिला प्रशासन द्वारा आकर्षक विधिक पुरस्कार, मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
संस्थानों की भूमिका: आंबेडकर छात्रावास कण्डोली से लेकर रायवाला नशा मुक्ति केंद्र तक सघन अभियान
यह अभियान केवल कागजी दावों या रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देहरादून के उन मुख्य शैक्षणिक और पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centers) के भीतर ले जाया जा रहा है, जहां युवाओं की सघन उपस्थिति है।
विभागीय नोडल केंद्रों की सूची और प्रशासनिक दिशा-निर्देश:
"मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के आदेशानुसार, जिले के प्रमुख तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थानों को इस महा-अभियान का विधिक केंद्र बनाया गया है। इसमें राजकीय डॉ. भीमराव आंबेडकर बालक छात्रावास कण्डोली, महिला आईटीआई (ITI) परिसर, सीआईएमएस (CIMS) और यूआईएचएमटी (UIHMT) ग्रुप ऑफ कॉलेज शामिल हैं। इन परिसरों में न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा व्याख्यान (Lectures) दिए जाएंगे, बल्कि साइकोलॉजिकल काउंसलिंग (Psychological Counseling) सत्र भी आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त, राजकीय नशा मुक्ति केंद्र रायवाला में भर्ती मरीजों के पुनर्वास (Rehabilitation) और समाज की मुख्यधारा में उनकी विधिक वापसी के लिए विशेष थेरेपी और आध्यात्मिक-योग सत्रों का संचालन सुनिश्चित किया गया है।"
ड्रग हॉटस्पॉट और स्वैच्छिक संस्थाओं (NGOs) के लिए 4-स्तरीय विधिक एवं प्रशासनिक रणनीति
नशे के अवैध कारोबार की कमर तोड़ने और समाज को सुरक्षित करने के लिए समाज कल्याण अधिकारी और सीडीओ ने चार रणनीतिक स्तंभों पर कार्य करने के निर्देश जारी किए हैं:
- संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों की घेराबंदी: पुलिस विभाग और खुफिया विंग के सहयोग से देहरादून जनपद के उन क्षेत्रों और बस्तियों को चिन्हित किया गया है, जो 'ड्रग हॉटस्पॉट' (Drug Hotspots) के रूप में कुख्यात हैं (जहां स्मैक, चरस या प्रतिबंधित कफ सिरप की बिक्री की आशंका अधिक रहती है)। इन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर पोस्टर, बैनर और नुक्कड़ नाटकों (Street Plays) के जरिए सघन प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
- स्वैच्छिक संस्थाओं (NGOs) का एकीकरण: नशे के विरुद्ध लंबे समय से धरातल पर काम कर रही सामाजिक और स्वैच्छिक संस्थाओं को इस सरकारी अभियान से विधिक रूप से जोड़ा गया है। ये संस्थाएं बस्तियों में जाकर उन परिवारों की पहचान करेंगी, जिनके बच्चे नशे की लत का शिकार हो चुके हैं, ताकि उन्हें सरकारी केंद्रों पर निःशुल्क चिकित्सा सहायता दिलाई जा सके।
- हस्ताक्षर अभियान (Signature Campaign): 21 से 26 जून के मध्य चलने वाले दूसरे चरण में प्रत्येक विकासखंड स्तर पर सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और बस अड्डों पर विशाल डिजिटल और फिजिकल 'हस्ताक्षर बोर्ड' लगाए जाएंगे, जहां आम नागरिक नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए अपनी लिखित विधिक सहमति और संकल्प दर्ज करेंगे।
- प्रभावी डिजिटल मॉनिटरिंग: सीडीओ अभिनव शाह ने सभी बीडीओ (BDO) और शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक गतिविधि की जियो-टैग्ड (Geo-tagged) फोटो और वीडियो क्लिप्स दैनिक आधार पर समाज कल्याण कार्यालय के कंट्रोल रूम को भेजी जाएं। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता मिलने पर संबंधित ब्लॉक स्तरीय अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
जनसहभागिता की अपील: समाज कल्याण अधिकारी की जनता से मार्मिक पुकार
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने जिले के समस्त व्यापार मंडलों, छात्र संघों, महिला कल्याणी समितियों और प्रबुद्ध नागरिकों से इस 10 दिवसीय महा-अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की भावुक अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी प्रशासनिक तंत्र या पुलिस बल तब तक किसी सामाजिक बुराई को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, जब तक कि उसे आम जनता का सक्रिय और विधिक सहयोग प्राप्त न हो। नशामुक्त समाज का निर्माण करना केवल सरकार का कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की अपने परिवार और आने वाली पीढ़ी के प्रति एक बड़ी नैतिक व सामाजिक जिम्मेदारी है।
युवा ऊर्जा को सही दिशा देता प्रशासन का एक सराहनीय और दूरगामी कदम
भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में देहरादून में आयोजित होने जा रहा यह ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ वर्तमान समय की सबसे बड़ी सामाजिक आवश्यकता है। आज के डिजिटल युग में जिस प्रकार पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव और मानसिक तनाव के कारण हमारी युवा पीढ़ी 'स्मैक', 'सिंथेटिक ड्रग्स' और अन्य घातक नशीले पदार्थों के जाल में फंसकर अपना भविष्य और जीवन बर्बाद कर रही है, वह पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। ऐसे समय में, केवल दंडात्मक पुलिसिया कार्रवाई काफी नहीं है; समाज के भीतर एक विधिक और नैतिक चेतना जगाना अत्यंत आवश्यक है।
देहरादून जिला प्रशासन द्वारा खेल प्रतियोगिताओं, मैराथन, योग और नुक्कड़ नाटकों का जो यह 10 दिवसीय एक्शन प्लान (Master Action Plan) तैयार किया गया है, वह बेहद व्यावहारिक और प्रभावी प्रतीत होता है। युवाओं को खेल के मैदान से जोड़कर और संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सीधे प्रहार करके प्रशासन इस सामाजिक बीमारी की जड़ पर चोट कर रहा है। सीआईएमएस, यूआईएचएमटी और आंबेडकर छात्रावास जैसे बड़े शैक्षणिक केंद्रों को शामिल करने से इस अभियान की पहुंच सीधे तौर पर हजारों छात्र-छात्राओं तक होगी। सीडीओ अभिनव शाह द्वारा की जा रही सख्त डिजिटल मॉनिटरिंग यह सुनिश्चित करेगी कि यह अभियान केवल कागजों पर न रहे बल्कि धरातल पर उतरकर सैकड़ों भटकते हुए युवाओं को नया जीवनदान दे सके। देवभूमि उत्तराखण्ड को "ड्रग्स फ्री स्टेट" बनाने की दिशा में यह प्रशासनिक कड़ाई और जनसहभागिता का मॉडल अत्यंत अनुकरणीय और मील का पत्थर साबित होगा।