रिस्पना और बिंदाल को नया जीवन देने का महा-अभियान: ग्राउंड जीरो पर उतरे डीएम डॉ. आशीष चौहान और महापौर; 12 जेसीबी व 15 डम्पर्स से हटा 17,000 मीट्रिक टन कूड़ा


Aapki Media AI


देहरादून, 17 जून, 2026: किसी भी ऐतिहासिक और प्राकृतिक शहर की पहचान उसकी नदियों और जलस्रोतों से होती है। देहरादून की रिस्पना (Rispana) और बिंदाल (Bindal) नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि इस दून घाटी की पारिस्थितिकी (Ecology) और भू-गर्भीय जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की रीढ़ हैं। दशकों के अनियंत्रित शहरीकरण, अतिक्रमण और डंपिंग के कारण 'कूड़ाघर' में तब्दील हो चुकी इन नदियों को उनका पुराना स्वरूप और विधिक गौरव वापस दिलाने के लिए जिला प्रशासन एवं नगर निगम देहरादून ने एक अभूतपूर्व संयुक्त महा-संग्राम शुरू किया है।

ग्राउंड जीरो पर उतरे डीएम डॉ. आशीष चौहान और महापौर; 12 जेसीबी व 15 डम्पर्स से हटा 17,000 मीट्रिक टन कूड़ा


"नदी नहीं बनेगी कूड़ाघर"—इस कड़े नीतिगत संकल्प के साथ जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, महापौर श्री सौरभ थपलियाल और मुख्य नगर आयुक्त श्री आलोक कुमार पाण्डेय की त्रिमूर्ति ने आज राजीव नगर क्षेत्र से रिस्पना नदी में चल रहे पुनरुद्धार कार्यों का सघन और वास्तविक निरीक्षण (Ground Zero Inspection) किया। मानसून की आमद से ठीक पहले शुरू की गई यह मुहिम न केवल वर्षाकाल में दून को जलभराव (Waterlogging) और बाढ़ जैसी विभीषिकाओं से बचाएगी, बल्कि 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट के विजन को जमीनी धरातल पर साकार करेगी।

ग्राउंड जीरो पर उतरे डीएम डॉ. आशीष चौहान और महापौर; 12 जेसीबी व 15 डम्पर्स से हटा 17,000 मीट्रिक टन कूड़ा


 

प्रशासनिक कड़ाई: स्वयं मैदान में उतरे डीएम; मानसून से पहले अवरोध हटाने के कड़े निर्देश


 

राजीव नगर के दुर्गम नदी तटीय क्षेत्रों में स्वयं कटीली झाड़ियों और मलबे के बीच पहुंचकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने चल रहे कार्यों की गुणवत्ता (Quality Control) को परखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान को केवल सतही सफाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके तहत नदी के विधिक प्रवाह क्षेत्र (River Channel) को पूरी तरह से री-चैनल किया जा रहा है।

  • मानसून-पूर्व रणनीतिक प्राथमिकता: जिलाधिकारी ने विभागीय अभियंताओं को निर्देशित किया कि मानसून के सक्रिय होने से पहले रिस्पना और बिंदाल के तल (River Bed) में जमा सारा सिल्ट (Silt), प्लास्टिक कचरा और कंक्रीट मलबा पूरी तरह हटा दिया जाए। ऐसा करने से अत्यधिक वर्षा के दौरान पानी सीधे बस्तियों में नहीं घुसेगा और जन-धन की विधिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
  • अंतर-विभागीय समन्वय: डीएम ने नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए भारी तकनीकी संसाधनों की सराहना की और सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला स्वच्छता समिति को आपसी तालमेल के साथ 24x7 मोड में काम करने को कहा।

 

देहरादून नदी पुनरुद्धार एवं मानसून-पूर्व स्वच्छता अभियान 2026: सांख्यिकीय एवं तकनीकी मैट्रिक्स



नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा मार्च 2026 से अब तक चलाए गए विशेष स्वच्छता अभियान, बजटीय संसाधनों और भौगोलिक कवरेज का पूरा लेखा-जोखा इस प्रशासनिक तालिका में संकलित है:


नदी एवं स्वच्छता अभियान के मानक (Operational Metrics)आधिकारिक प्रशासनिक एवं भौतिक डेटा (Statistical Data 2026)सामाजिक-आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव (Strategic Impact)
कुल संकलित एवं उत्सर्जित कचरालगभग 17,000 मीट्रिक टन (MT) कूड़े का सफल उठान।शहर के मुख्य डंपिंग लोड में कमी और नदी जनित महामारियों से बचाव।
रिस्पना नदी सफाई का दायरालगभग 12 किलोमीटर (km) सघन प्रवाहित क्षेत्र।नदी के उद्गम से लेकर शहरी सीमा तक जल प्रवाह सुचारू।
बिंदाल नदी सफाई का दायरालगभग 08 किलोमीटर (km) का संवेदनशील बेल्ट।दून के मध्य से गुजरने वाले ड्रेनेज सिस्टम का विधिक जीर्णोद्धार।
तैनात भारी मशीनरी बेड़ा (Machinery)12 अत्याधुनिक जेसीबी (JCB) मशीनें।भारी सिल्ट, बोल्डर और पुश्तों के मलबे को हटाने में तीव्र गति।
लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन बेड़ा15 डम्पर (Dumpers) नियमित फेरे पर तैनात।नदी से निकलने वाले कचरे का ट्रेंचिंग ग्राउंड तक त्वरित निस्तारण।
दीर्घकालिक तकनीकी विजननमामि गंगे (Namami Gange) एवं जिला स्वच्छता समिति।बिना उपचारित (Untreated) गंदे नालों की टैपिंग और सीवरेज ट्रीटमेंट।

मार्च से जारी है नगर निगम का महा-अभियान: 17 हजार मीट्रिक टन कूड़े का उठान एक विधिक रिकॉर्ड


मुख्य नगर आयुक्त आलोक कुमार पाण्डेय ने बताया कि महापौर सौरभ थपलियाल के कुशल मार्गदर्शन में नगर निगम देहरादून ने इस वर्ष मार्च माह से ही एक सुनियोजित 'विशेष स्वच्छता अभियान' (Special Sanitation Drive) छेड़ रखा था।


इस तीन महीने लंबे अभियान के दौरान नगर निगम की पर्यावरण मित्रों की टोली और भारी वाहनों ने दून की विभिन्न जलधाराओं से रिकॉर्ड 17 हजार मीट्रिक टन से अधिक ठोस कचरा, लोहा, प्लास्टिक और स्क्रैप बाहर निकाला है। अकेले रिस्पना नदी के 12 किलोमीटर के दायरे में और बिंदाल नदी के 8 किलोमीटर के सबसे प्रदूषित हिस्सों में वैज्ञानिक तरीके से मलबे की लिफ्टिंग की गई है। इस कचरे के हटने से नदियों की चौड़ाई और गहराई अपने वास्तविक विधिक स्वरूप में लौट रही है, जिससे पर्यावरण प्रेमियों ने भी राहत की सांस ली है।


लॉन्ग-टर्म विजन: 'नमामि गंगे' के तहत चिन्हित होंगे हॉटस्पॉट; बिना ट्रीटमेंट के नहीं गिरेगा एक भी नाला


महापौर एवं मुख्य नगर आयुक्त का संयुक्त तकनीकी वक्तव्य:

"निरीक्षण के दौरान महापौर सौरभ थपलियाल और मुख्य नगर आयुक्त ने संयुक्त रूप से बताया कि रिस्पना का पुनरुद्धार केवल एक मौसमी कसरत नहीं है। नमामि गंगे राष्ट्रीय मिशन और जिला स्वच्छता समिति (District Sanitation Committee) के वित्तीय सहयोग से एक 'दीर्घकालिक और व्यवहारिक मास्टर प्लान' (Long-term Master Plan) तैयार किया जा चुका है। इसके तहत नदी किनारे बसे उन सभी संवेदनशील पॉइंट्स को 'कचरा हॉटस्पॉट' (Garbage Hotspots) के रूप में चिन्हित किया जा रहा है, जहां स्थानीय लोग या व्यावसायिक इकाइयां अवैध रूप से कूड़ा फेंकती हैं। इन स्थानों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरों से विधिक निगरानी रखी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिस्पना में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े बिना उपचारित (Untreated) नालों को पूरी तरह से टैप (Tap) किया जाएगा और उनके गंदे पानी को सीधे नदी में मिलने से रोककर, पहले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में भेजा जाएगा।"


 

रिस्पना को 'कूड़ाघर' बनने से रोकने के लिए जिला प्रशासन की 4-स्तरीय विधिक रणनीति


नदी के जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा और डंपिंग माफिया पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने चार सख्त प्रशासनिक आदेश जारी किए हैं:


  • भारी जुर्माना और विधिक चालान: नदी क्षेत्र के 50 मीटर के दायरे में प्लास्टिक, निर्माण सामग्री (Debris) या घरेलू कचरा फेंकने वालों के खिलाफ नगर निगम अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत भारी आर्थिक दंड और विधिक एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।
  • 12 जेसीबी और 15 डम्पर्स का रोटेशन: सफाई कार्य की गति को बनाए रखने के लिए इन सभी 12 जेसीबी और 15 डम्पर्स को अलग-अलग शिफ्टों में री-लोकेट किया गया है, जिसकी दैनिक प्रोग्रेस रिपोर्ट (DPR) सीधे मुख्य नगर आयुक्त कार्यालय को भेजी जा रही है।
  • बायो-फेंसिंग और ग्रीन कॉरिडोर का विकास: जिन क्षेत्रों से अतिक्रमण और कूड़ा हटाया जा चुका है, वहां दोबारा कब्जा रोकने के लिए वन विभाग और सिंचाई विभाग के सहयोग से बायो-फेंसिंग (Bio-fencing) की जाएगी और नदी के किनारों पर सघन वृक्षारोपण कर 'ग्रीन कॉरिडोर' विकसित किया जाएगा।
  • जन-भागीदारी और वार्ड कमेटियां: स्थानीय पार्षदों के नेतृत्व में 'नदी मित्र' और वार्ड स्वच्छता समितियों का गठन किया जाएगा, जो बस्तियों के नागरिकों को नदी के ऐतिहासिक महत्व के प्रति जागरूक करेंगी और उन्हें कूड़ा सीधे निगम की गाड़ियों में देने के लिए प्रेरित करेंगी।

 

सफाई नायकों का आभार: अधिकारियों की टीम ग्राउंड पर मुस्तैद

 


निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में नदी के भीतर उतरकर काम कर रहे नगर निगम के सफाई नायकों, चालकों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस उच्च स्तरीय निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर आयुक्त आलोक कुमार पाण्डेय के साथ नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी एसएनएस राजवीर सिंह, तनवीर सिंह सहित जिला प्रशासन, राजस्व और सिंचाई विभाग के दर्जनों विधिक अधिकारी व अभियंता मौके पर मुस्तैद रहे, जिन्होंने जिलाधिकारी को नदी के पुराने बहाव क्षेत्रों के मानचित्र (Maps) भी दिखाए।

ग्राउंड जीरो पर उतरे डीएम डॉ. आशीष चौहान और महापौर; 12 जेसीबी व 15 डम्पर्स से हटा 17,000 मीट्रिक टन कूड़ा

 

 रिस्पना का पुनरुद्धार—देहरादून के सस्टेनेबल भविष्य का टर्निंग पॉइंट


देहरादून जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा रिस्पना और बिंदाल नदियों को बचाने के लिए शुरू की गई यह संयुक्त मुहिम केवल एक प्रशासनिक सफाई अभियान नहीं है, बल्कि यह दून घाटी के पारिस्थितिक तंत्र को वेंटिलेटर से बाहर निकालने का एक भगीरथ प्रयास है। रिस्पना, जिसे कभी 'ऋषि पर्णा' के नाम से जाना जाता था और जिसका पानी कभी आचमन के योग्य था, उसे आज के आधुनिक इंसानों ने अपनी लापरवाही से एक बदबूदार नाले में तब्दील कर दिया है। ऐसे में, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का खुद जूते पहनकर ग्राउंड जीरो पर उतरना और महापौर का पूरी मशीनरी झोंक देना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति अब जागृत हो चुकी है।


मार्च से अब तक 17,000 मीट्रिक टन कचरा निकालना एक अभूतपूर्व विधिक सफलता है, लेकिन इसकी असली परीक्षा मानसून के दौरान होगी। नमामि गंगे के तहत नालों की टैपिंग और अनट्रीटेड पानी पर रोक लगाने का जो दीर्घकालिक प्लान बनाया गया है, वही रिस्पना को हमेशा के लिए पुनर्जीवित कर सकता है। दून के नागरिकों को भी यह समझना होगा कि जब तक वे स्वयं जागरूक नहीं होंगे और नदियों को डस्टबिन समझना बंद नहीं करेंगे, तब तक कोई भी प्रशासनिक मशीनरी इसे साफ नहीं रख सकती। प्रशासन का यह कदम सराहनीय है और देवभूमि के सस्टेनेबल और बाढ़-मुक्त भविष्य के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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