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देहरादून, 24 जून, 2026: उत्तराखण्ड की त्रिवेंद्रम और पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं, विशेषकर एकल, निराश्रित और सामाजिक रूप से वंचित महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विधिक संकल्प के तहत धामी सरकार लगातार बड़े नीतिगत निर्णय ले रही है। इसी क्रम में, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने यमुना कॉलोनी स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में राज्य की महिलाओं और बालिकाओं के विधिक व आर्थिक सुदृढ़ीकरण हेतु कई क्रांतिकारी निर्देश जारी किए हैं।
इस महत्वपूर्ण विधिक बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि राज्य की 211 चयनित एकल महिलाओं को 'मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना' के अंतर्गत जल्द ही वित्तीय सहायता राशि की अगली किस्त विधिक रूप से जारी की जाएगी। इसके साथ ही, तकनीकी और प्रलेखीय कारणों से अटकी नंदा गौरा योजना की ₹19 करोड़ 22 लाख 78 हजार की भारी-भरकम राशि आज गुरुवार को सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की हजारों पात्र बालिकाओं के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
एकल महिला स्वरोजगार योजना: 484 को मिल चुका है लाभ; नए वित्तीय वर्ष में 2000 का महा-लक्ष्य
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय समीक्षा के बाद बताया कि राज्य सरकार एकल महिलाओं (विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता व अविवाहित) के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए पूरी तरह गंभीर है।
- अब तक की विधिक प्रोग्रेस: योजना के विधिक मानकों के तहत अब तक 484 महिलाओं को प्रथम किस्त की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में जारी की जा चुकी है, जिसके उपयोग से अधिकांश महिलाओं ने धरातल पर अपने लघु उद्योग और स्वरोजगार इकाइयां सफलतापूर्वक स्थापित कर ली हैं।
- शेष 211 को जल्द वितरण: मंत्री ने स्पष्ट किया कि शेष बची 211 चयनित लाभार्थी महिलाओं को भी वित्तीय सहायता राशि शीघ्र वितरित करने के लिए एक विशेष राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके विधिक उद्घाटन हेतु माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से समय देने का औपचारिक अनुरोध किया गया है।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 का रोडमैप: बैठक में सचिव चंद्रेश कुमार को कड़े विधिक निर्देश दिए गए कि चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए योजना की नई विज्ञप्ति अगस्त माह तक अनिवार्य रूप से जारी कर नए आवेदन आमंत्रित किए जाएं। इस वर्ष सरकार ने राज्य की 2000 पात्र महिलाओं को इस योजना से विधिक रूप से आच्छादित करने का एक बड़ा प्रशासनिक लक्ष्य निर्धारित किया है।
महिला सशक्तिकरण एवं वित्तीय डीबीटी सुशासन आख्या 2026: विभागीय सांख्यिकीय डेटा मैट्रिक्स
महिला सशक्तिकरण विभाग की इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों, कुल बजटीय आवंटन और आगामी पुरस्कारों का संपूर्ण प्रामाणिक डेटा इस प्रशासनिक तालिका में वर्गीकृत है:
| लक्षित विधिक योजना एवं कार्यक्रम | कुल वित्तीय बजटीय आवंटन / लाभार्थी संख्या | मुख्य लक्षित जनपद व लाभार्थी वर्ग | दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक एवं विधिक प्रभाव (Impact) |
| नंदा गौरा योजना (गुरुवार डीबीटी) | ₹19,22,78,000 (उन्नीस करोड़ बाइस लाख अठहत्तर हजार रुपये)। | 4000 से अधिक पात्र बालिकाएं (हरिद्वार एवं उत्तरकाशी)। | प्रलेखीय औपचारिकताओं के कारण पूर्व में रुकी हुई बालिकाओं का विधिक वित्तीय सशक्तिकरण। |
| मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना | 211 लाभार्थी (अग्रिम वित्तीय सहायता राशि वितरण हेतु प्रतीक्षारत)। | संपूर्ण उत्तराखण्ड की चयनित एकल व निराश्रित महिलाएं। | स्वरोजगार और उद्यमशीलता के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं के पलायन पर विधिक रोक। |
| वार्षिक लक्ष्य (वित्तीय वर्ष 2026-27) | 2000 महिलाओं को योजना का विधिक लाभ प्रदान करने का लक्ष्य। | राज्य के समस्त 13 जनपदों की पात्र आवेदक महिलाएं। | अगस्त माह तक नई विज्ञप्ति जारी कर पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करना। |
| तीलू रौतेली एवं आंगनबाड़ी सम्मान | पुरस्कार चयन प्रक्रिया को प्राथमिकता पर पूर्ण करने के विधिक निर्देश। | राज्य की उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाएं व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां। | आगामी 8 अगस्त (महिला दिवस) के अवसर पर राज्य स्तरीय गरिमामयी सम्मान वितरण। |
| विभागीय विधिक नेतृत्व व उपस्थिति | रेखा आर्या (कैबिनेट मंत्री), चंद्रेश कुमार (सचिव), बंसीलाल राणा (निदेशक)। | महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास निदेशालय, उत्तराखण्ड। | नौकरशाही जवाबदेही (Bureaucratic Accountability) और फाइलों का त्वरित विधिक निस्तारण। |
नंदा गौरा योजना का विधिक निस्तारण: हरिद्वार और उत्तरकाशी की बालिकाओं को मिला अधिकार
समीक्षा बैठक का एक और सबसे बड़ा नीतिगत निर्णय 'नंदा गौरा योजना' से संबंधित रहा। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बेहद संवेदनशीलता के साथ बताया कि हरिद्वार और उत्तरकाशी जिले की 4000 से अधिक नवजात और इंटरमीडिएट पास बालिकाएं आवश्यक विधिक औपचारिकताएं (जैसे आय प्रमाण पत्र या विलंब से आवेदन) समय पर पूरी न होने के कारण अब तक अपने विधिक लाभ से पूरी तरह वंचित रह गई थीं।
प्रशासनिक शिथिलता को दूर करते हुए मंत्री ने इन सभी फाइलों का विधिक पुनरीक्षण करवाया और आज गुरुवार को ₹19.22 करोड़ से अधिक की राशि सीधे इन बालिकाओं के खातों में डिजिटल सुशासन के माध्यम से भेजी जा रही है। इससे बालिकाओं की उच्च शिक्षा और पोषण स्तर में सुधार होगा तथा कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं पर विधिक रोक लगेगी।
महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण सुशासन हेतु विभाग के 4 मुख्य रणनीतिक स्तंभ
समीक्षा बैठक में सचिव चंद्रेश कुमार और निदेशक बंसीलाल राणा की उपस्थिति में आगामी त्रिमासिक कार्ययोजना के निम्नलिखित चार विधिक स्तंभ निर्धारित किए गए:
- तीव्र और पारदर्शी डिजिटल चयन प्रणाली: तीलू रौतेली पुरस्कार और आंगनबाड़ी सम्मान पुरस्कार 2026 के लिए प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी हेतु जिलाधिकारियों की अध्यक्षता वाली समितियों को पारदर्शी विधिक चयन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- समयबद्ध आवेदन और नो-पेंडेंसी (No-Pendency) नीति: आगामी अगस्त माह में जारी होने वाली एकल महिला स्वरोजगार योजना की विज्ञप्ति के आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन 'महाप्रौद्योगिकी पोर्टल' के माध्यम से लिए जाएंगे, ताकि बिचौलियों की विधिक गुंजाइश समाप्त हो सके।
- आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिक सुदृढ़ीकरण: मोहित चौधरी सहित अन्य तकनीकी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि बाल पोषण (Nutritional Governance) की रीयल-टाइम ट्रैकिंग हेतु आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के डिजिटल इन्वेंट्री डेटा का भौतिक सत्यापन किया जाए।
- लघु उद्योगों का विधिक लिंकेज (Market Linkage): जिन 484 महिलाओं ने स्वरोजगार शुरू कर दिया है, उनके उत्पादों को राष्ट्रीय आजीविका मिशन (NRHM) और स्थानीय सरस मेलों के माध्यम से विधिक बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
नीतिगत स्पष्टता और त्वरित डीबीटी से सुदृढ़ होती आधी आबादी
24 जून 2026 को देहरादून में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक इस व्यावहारिक तथ्य को विधिक रूप से प्रमाणित करती है कि उत्तराखण्ड का महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह रुकी हुई फाइलों के त्वरित विधिक निस्तारण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या द्वारा हरिद्वार और उत्तरकाशी की 4000 बालिकाओं के लिए ₹19.22 करोड़ का एकमुश्त विधिक डीबीटी जारी करना और 211 एकल महिलाओं के स्वरोजगार की बाधाओं को दूर करना सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक मील का पत्थर है।
अगस्त माह तक चालू वित्तीय वर्ष के लिए 2000 महिलाओं को लाभान्वित करने का महा-लक्ष्य और 8 अगस्त को तीलू रौतेली पुरस्कारों की समयबद्ध तैयारी यह दर्शाती है कि शासन-प्रशासन के स्तर पर नीतियों को लेकर पूरी स्पष्टता है। यदि सचिव चंद्रेश कुमार और निदेशक बंसीलाल राणा की प्रशासनिक टीम इन विधिक निर्देशों का धरातल पर अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करती है, तो देवभूमि उत्तराखण्ड की महिलाएं आत्मनिर्भरता के सूचकांक (Self-Reliance Index) में देश के अग्रणी राज्यों के समकक्ष खड़ी होंगी।
