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उत्तराखंड की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों के सेवाकालीन हितों की रक्षा और विभागीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शिक्षक संगठनों ने कमर कस ली है। इसी सिलसिले में शिक्षक प्रतिनिधियों द्वारा शासन के समक्ष एक विस्तृत 11 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया गया है।
इस महत्वपूर्ण पहल में राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (नरेंद्रनगर) के ब्लॉक अध्यक्ष और राजकीय शिक्षक संघ (नरेंद्रनगर) के ब्लॉक उपाध्यक्ष श्री प्रवीण सिंह पंवार की सक्रिय भूमिका रही है। इसके साथ ही, जौनपुर (टिहरी गढ़वाल) में कार्यरत सहायक अध्यापिका श्रीमती राजेश्वरी पंवार सहित प्रदेश के हज़ारों शिक्षकों का इस मांग पत्र को व्यापक समर्थन प्राप्त है।
11 सूत्रीय मांग पत्र के मुख्य बिंदु
शिक्षक संगठनों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की बुनियादी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है, जो निम्नलिखित हैं:
- पुरानी पेंशन की बहाली: पूर्व व्यवस्था के अनुरूप पुरानी पेंशन योजना (OPS) को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए।
- गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति: RTE Act-2009 की धारा-27 का कड़ाई से पालन करते हुए शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए, ताकि वे शिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
- पारदर्शी स्थानांतरण प्रक्रिया: धारा-23 एवं 27(घ) के तहत लंबित स्थानांतरण और विद्यालय कोटिकरण (Grading) विवादों का न्यायसंगत व त्वरित निस्तारण हो।
- संस्थागत भागीदारी: DIET व SCERT के पुनर्गठन में प्रारंभिक शिक्षकों के व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दी जाए।
- कैशलेस चिकित्सा सुविधा: 'गोल्डन कार्ड' योजना में व्याप्त विसंगतियों को दूर कर शिक्षकों के लिए वास्तविक कैशलेस इलाज सुनिश्चित किया जाए।
- शिक्षामित्रों का कल्याण: शिक्षामित्रों के लिए न्यूनतम मानदेय तय कर उन्हें महंगाई भत्ते का लाभ प्रदान किया जाए।
- डिजिटल कार्य हेतु भत्ता: ऑनलाइन विभागीय कार्यों और डेटा एंट्री के बढ़ते बोझ को देखते हुए शिक्षकों को मासिक मोबाइल रिचार्ज भत्ता दिया जाए।
यह सिर्फ शिक्षकों की नहीं, शिक्षा के भविष्य की लड़ाई है
शिक्षक प्रतिनिधि श्री प्रवीण सिंह पंवार और अन्य वरिष्ठ सहयोगियों का मानना है कि ये मांगें केवल किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं हैं। यह प्रदेश की प्रारंभिक शिक्षा के भविष्य और सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी हैं।
शिक्षक समुदाय का पक्ष: "जब शिक्षक मानसिक रूप से निश्चिंत और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से मुक्त रहेगा, तभी वह बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाएगा। हमें पूरी उम्मीद है कि शासन इन बिंदुओं पर संवेदनशीलता के साथ सकारात्मक और त्वरित निर्णय लेगा।"
अब देखना यह है कि शासन स्तर पर शिक्षकों की इन जायज मांगों पर कब तक और क्या कदम उठाए जाते हैं।


