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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी के प्रतिष्ठित जिला कोरोनेशन अस्पताल की प्रशासनिक और चिकित्सा व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी (DM) देहरादून डॉ. आशीष चौहान ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। बुधवार की रात ठीक 8:00 बजे जिलाधिकारी ने बिना किसी पूर्व सूचना के कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया। अचानक हुए इस शीर्ष प्रशासनिक छापे से अस्पताल परिसर और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के अत्यंत संवेदनशील वार्डों में घोर लापरवाही, गंदगी, अधूरी लिखापढ़ी और गंभीर अव्यवस्थाओं की परतें खुलती चली गईं। इस स्थिति पर गहरी नाराजगी और सख्त आपत्ति जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों व अनुबंधित एजेंसियों के खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) देहरादून और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) की एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित कर तत्काल विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की है।
आईसीयू में बंद मिला एसी, स्टॉक रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान जब अस्पताल के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी गहन चिकित्सा इकाई (ICU) वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति स्थापित चिकित्सा मानकों के बिल्कुल विपरीत और चिंताजनक पाई गई। जीवन रक्षक उपकरणों से लैस आईसीयू में उमस और सफोकेशन (घुटन) चरम पर थी क्योंकि वहां का एयर कंडीशनर (AC) पूरी तरह बंद पड़ा था, जिससे गंभीर हालत में भर्ती मरीज बेहाल हो रहे थे।
हैरान करने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी द्वारा स्वयं कई बार मौखिक निर्देश देने के बाद भी अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) द्वारा एसी को चालू कराने में तत्परता नहीं दिखाई गई। इस घोर अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही को देखते हुए जिलाधिकारी ने पीआरओ के खिलाफ तत्काल प्रभाव से विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू करने के निर्देश दिए और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) से इस संबंध में लिखित जवाब मांगा है।
इसके अतिरिक्त आईसीयू वार्ड की पड़ताल में निम्नलिखित गंभीर प्रशासनिक विसंगतियां पाई गईं:
- अधूरा स्टॉक रजिस्टर: आईसीयू जैसे महत्वपूर्ण वार्ड के स्टॉक रजिस्टर में गत 29 जून से जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों का कोई भी लेखा-जोखा या विवरण दर्ज नहीं किया गया था।
- सिस्टर इंचार्ज नदारद: वार्ड की मुख्य सिस्टर इंचार्ज बिना किसी पूर्व सूचना या विधिक प्रविष्टि के आकस्मिक अवकाश (CL) पर पाई गईं।
- उपस्थिति पंजिका में खामियां: चिकित्सा कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ की दैनिक उपस्थिति पंजिका (Attendance Register) में भी भारी अनियमितताएं और कूटकरण के लक्षण मिले।
अनावश्यक रेफरल पर कड़ी आपत्ति; महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल देख भड़के डीएम
आईसीयू के बाद जिलाधिकारी ने अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष वार्ड, महिला वार्ड और सर्जरी वार्डों का भी सघन निरीक्षण किया, जहां बुनियादी सुविधाएं बदतर स्थिति में मिलीं। पुरुष वार्ड में निरीक्षण के दौरान सामने आया कि लीवर (यकृत) की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, जिसका इलाज कोरोनेशन अस्पताल के संसाधनों से ही सुगमतापूर्वक किया जा सकता था। डॉक्टरों द्वारा मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करने की इस प्रवृत्ति पर डीएम ने सख्त नाराजगी जताई और अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई।
वार्डों के भीतर बुनियादी नागरिक सुविधाओं का स्तर भी मानक से काफी नीचे पाया गया:
- फटे कंबलों का उपयोग: वार्ड में मरीजों को ओढ़ने के लिए फटे और गंदे कंबल दिए गए थे, जिस पर डीएम ने अस्पताल मैटर्न से तत्काल स्पष्टीकरण मांगते हुए निर्देश दिया कि सभी फटे व अनुपयोगी कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने की विधिक प्रक्रिया पूरी की जाए।
- लिफ्ट और सुरक्षा में चूक: अस्पताल की मुख्य लिफ्ट के भीतर चारों तरफ गुटके और पान की पीक थूकी हुई थी तथा गंदगी का साम्राज्य था। जनसुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली लिफ्ट में कोई भी सीसीटीवी (CCTV) कैमरा स्थापित नहीं पाया गया।
- त्रुटिपूर्ण बुनियादी ढांचा: अस्पताल के महिला शौचालय के भीतर पुरुषों का यूरिनल (Urinal) लगा हुआ देखकर जिलाधिकारी ने अस्पताल के इंजीनियरिंग विंग और प्रबंधन की तकनीकी समझ व कार्यप्रणाली पर भारी नाराजगी व्यक्त की।
लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी; तत्काल शुरू कराई इमरजेंसी चिकित्सा
इस औचक निरीक्षण के दौरान सबसे संवेदनशील और मानवीय पहलू अस्पताल के सर्जरी वार्ड में देखने को मिला। यहाँ जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान एक गंभीर रूप से बीमार लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। जिस समय डीएम वार्ड में दाखिल हुए, उस लावारिस मरीज की हालत अत्यंत नाजुक और जीवन-मरण के बीच झूल रही थी। चिकित्सा जांच में सामने आया कि मरीज का शुगर लेवल घटकर 40% से भी कम हो चुका था, जो कि चिकित्सकीय रूप से कोमा या मृत्यु की स्थिति के बेहद करीब माना जाता है।
इस बेहद नाजुक स्थिति के बावजूद वार्ड के नर्सिंग स्टाफ या ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों ने उसकी सुध नहीं ली थी। मरीज के बेड के आसपास गंदगी का अंबार लगा था और कई दिनों की बासी खाने की प्लेटें वहीं छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल अपनी देखरेख में आपातकालीन चिकित्सा दल को तलब किया और मरीज को ऑन-स्पॉट इमरजेंसी लाइफ-सपोर्ट चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। प्रशासनिक अमले के अस्पताल पहुंचने की भनक लगते ही, डीएम के वार्ड में आने से ठीक पांच मिनट पहले सफाई कर्मचारियों द्वारा आनन-फानन में पोछा लगाकर साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे जिलाधिकारी ने रंगे हाथों पकड़ लिया।
कोरोनेशन अस्पताल औचक निरीक्षण
| क्र.सं. | औचक निरीक्षण एवं प्रशासनिक मानक (Inspection Parameters) | दर्ज आधिकारिक विवरण एवं मौके के आंकड़े (Official Case Details) |
|---|---|---|
| 1. | निरीक्षणकर्ता मुख्य प्रशासनिक अधिकारी | डॉ. आशीष चौहान (जिलाधिकारी, देहरादून) |
| 2. | निरीक्षित चिकित्सालय का नाम | जिला कोरोनेशन अस्पताल, देहरादून (उत्तराखंड) |
| 3. | निरीक्षण की सटीक तिथि एवं समय | बुधवार रात ठीक 8:00 बजे | 01 जुलाई, 2026 |
| 4. | आईसीयू (ICU) में पाई गई मुख्य कमी | एयर कंडीशनर (AC) बंद, अत्यधिक उमस और सफोकेशन |
| 5. | तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जद में आए कर्मी | अस्पताल पीआरओ (अनुशासनात्मक कार्रवाई एवं स्पष्टीकरण तलब) |
| 6. | स्टॉक रजिस्टर की विसंगति | दिनांक 29 जून, 2026 से दवाओं का कोई भी विवरण दर्ज नहीं |
| 7. | अस्पताल मैटर्न से जुड़ा मुख्य निर्देश | मरीजों को फटे कंबल देने पर स्पष्टीकरण व फटे कंबल कंडम करने का आदेश |
| 8. | शौचालय में पाई गई ढांचागत त्रुटि | महिला शौचालय के भीतर पुरुष यूरिनल स्थापित पाया गया |
| 9. | लावारिस मरीज की आपातकालीन स्थिति | शुगर लेवल 40% से कम, तत्काल जीवन रक्षक चिकित्सा शुरू कराई गई |
| 10. | गठित उच्च स्तरीय जांच समिति | सीएमओ (CMO) एवं सीएमएस (CMS) की संयुक्त विधिक समिति |
आम जनता को सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं देना सरकार का मुख्य ध्येय
निरीक्षण के अंतिम चरण में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विभिन्न वार्डों में भर्ती सामान्य और गरीब पृष्ठभूमि के मरीजों के बेड के पास जाकर उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। उन्होंने मरीजों से अस्पताल द्वारा दी जा रही मुफ्त दवाओं, भोजन की गुणवत्ता, डॉक्टरों के राउंड के समय और स्टाफ के व्यवहार के संबंध में सीधा जमीनी फीडबैक (Direct Feedback) लिया।
जिलाधिकारी ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से कड़े शब्दों में निर्देशित किया है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाली आम जनता और गरीब मरीजों को हर हाल में बेहतर, त्वरित और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा किसी भी निरीक्षण में ऐसी कमियां या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अनुबंधित फर्मों के टेंडर निरस्त करने के साथ-साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ सीधे निलंबन (Suspension) की संस्तुति शासन को भेज दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के कई अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और प्रशासनिक स्टाफ मौके पर मौजूद रहा।
