Aapki Media AI
देहरादून प्रेस वार्ता। उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी होम-स्टे योजना, जो राज्य में स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक प्रमुख स्तंभ मानी जाती है, उस पर भ्रष्टाचार और कथित रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों के बादल मंडराने लगे हैं। राजधानी देहरादून में होम-स्टे पंजीकरण की विधिक स्वीकृति देने की एवज में एक स्थानीय नागरिक से कथित तौर पर दो लाख रुपये की मोटी रिश्वत मांगने का एक बेहद संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है।
इस कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए देहरादून में एक आधिकारिक प्रेस वार्ता आयोजित की। पार्टी ने जिला पर्यटन विभाग के शीर्ष अधिकारियों और कर्मचारियों पर सीधे तौर पर आर्थिक व मानसिक शोषण करने के आरोप लगाते हुए शासन व संबंधित जांच एजेंसियों से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल (CM Helpline Portal) पर भी आधिकारिक शिकायत दर्ज करा दी गई है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज; डिजिटल कैलकुलेटर पर लिखकर मांगी गई रिश्वत
इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी देते हुए राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने बताया कि मालसी (देहरादून) निवासी पीड़ित मोहम्मद रईस ने स्वरोजगार के उद्देश्य से "किंग क्वीन" नाम से एक होम-स्टे स्थापित किया था। उन्होंने इसके आधिकारिक विधिक पंजीकरण के लिए पर्यटन विभाग के नियमानुसार सभी आवश्यक औपचारिकताओं और दस्तावेजों को समय पर पूरा कर लिया था। इसके बावजूद, विभागीय स्तर पर उनके आवेदन को लंबे समय तक अकारण लंबित रखा गया और उन्हें कार्यालय के चक्कर काटने पर मजबूर किया गया।
पार्टी द्वारा लगाए गए मुख्य और विशिष्ट आरोप निम्नलिखित हैं:
- शिकायत का बहाना: पीड़ित का आरोप है कि जब वह पंजीकरण की स्थिति जानने कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय पहुंचे, तो जिला पर्यटन अधिकारी ने कथित रूप से उनसे कहा कि उनके होम-स्टे के खिलाफ कोई शिकायत प्राप्त हुई है।
- ऊपर तक पैसा देने का दावा: इस कथित शिकायत के मामले को रफा-दफा करने और पंजीकरण की फाइल को आगे बढ़ाने के लिए पीड़ित से कहा गया कि "ऊपर तक" के उच्चाधिकारियों को पैसा देना पड़ता है।
- साक्ष्य छिपाने की तकनीक: आरोप है कि किसी भी प्रकार की वॉयस रिकॉर्डिंग या डिजिटल साक्ष्य से बचने के लिए अधिकारी ने सीधे मुंह से राशि न बोलते हुए अपने मोबाइल के कैलकुलेटर पर '2,00,000' (दो लाख रुपये) की राशि लिखकर रिश्वत की मांग की।
अलग-अलग किश्तों में 1.90 लाख रुपये लेने का आरोप; ऑडियो-वीडियो साक्ष्य सुरक्षित
प्रेस वार्ता में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के पदाधिकारियों ने आगे आरोप लगाया कि जिला पर्यटन अधिकारी के निर्देश पर विभाग के एक अन्य कर्मचारी फिरोज़ ख़ान निरीक्षण (Physical Inspection) के नाम पर मोहम्मद रईस के मालसी स्थित आवास पर पहुंचे। वहाँ उन्होंने कथित तौर पर रिश्वत की मांग को दोहराया और पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद हुए अवैध वित्तीय लेनदेन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- किश्तों में भुगतान: मजबूरी और स्वरोजगार के डूबने के डर से पीड़ित मोहम्मद रईस ने अलग-अलग तिथियों में किश्तों के माध्यम से कुल एक लाख नब्बे हजार (1,90,000) रुपये आरोपियों को सौंप दिए।
- अंतिम किश्त के लिए दबाव: करीब एक लाख नब्बे हजार रुपये वसूलने के बाद भी विभाग के कर्मचारी द्वारा अंतिम बची हुई दस हजार रुपये की राशि के लिए पीड़ित पर लगातार अनुचित दबाव बनाया जाता रहा।
- दस्तावेज सौंपना: पार्टी का दावा है कि जब यह पूरी बड़ी रकम आरोपियों तक पहुंच गई, उसके बाद ही विभाग द्वारा "किंग क्वीन" होम-स्टे का आधिकारिक रजिस्टर और पंजीकरण प्रमाण पत्र पीड़ित को सुपुर्द किया गया।
- धमकी देने का आरोप: पीड़ित मोहम्मद रईस का कहना है कि जब उन्होंने काम पूरा होने के बाद अपनी मजबूरी में दी गई रकम को वापस मांगना चाहा, तो संबंधितों द्वारा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और विधिक कार्रवाई में फंसाने की धमकियां दी गईं। पीड़ित ने दावा किया कि उनके पास रिश्वत मांगने, पैसे के लेनदेन, बैठकों और धमकियों से जुड़े पुख्ता ऑडियो एवं वीडियो साक्ष्य (Digital Evidence) सुरक्षित हैं, जिन्हें वे आधिकारिक जांच एजेंसियों को सौंपने के लिए तैयार हैं।
स्वरोजगार योजनाओं का गला घोंट रहे हैं भ्रष्ट अधिकारी: सुलोचना ईष्टवाल
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने पर्यटन विभाग के इस रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में होम-स्टे योजना युवाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए आजीविका का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण जरिया है। यदि नीति का क्रियान्वयन करने वाले विभागीय अधिकारी और कर्मचारी ही रक्षक के बजाय भक्षक बन जाएंगे और आम जनता का आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न करेंगे, तो सरकार की इन कल्याणकारी योजनाओं का मूल उद्देश्य ही पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने पीड़ित को तत्काल न्याय देने और आरोपियों को निलंबित करने की मांग की।
होम-स्टे कथित भ्रष्टाचार प्रकरण एवं शिकायत
| क्र.सं. | मामले एवं विधिक शिकायत के मुख्य मानक (Case Parameters) | दर्ज आधिकारिक विवरण एवं विशिष्ट आंकड़े (Official Case Details) |
|---|---|---|
| 1. | कथित घटना का मुख्य विषय संदर्भ | "किंग क्वीन" होम-स्टे पंजीकरण की एवज में रिश्वतखोरी |
| 2. | पीड़ित नागरिक का नाम एवं निवास | मोहम्मद रईस, निवासी मालसी, देहरादून (उत्तराखंड) |
| 3. | आरोप की जद में आए मुख्य विभागीय अधिकारी | पर्यटन अधिकारी, देहरादून |
| 4. | आरोप की जद में आए अन्य विभागीय कर्मी | फिरोज़ ख़ान (कर्मचारी, पर्यटन विभाग, देहरादून) |
| 5. | मांगी गई कुल कथित रिश्वत राशि | ₹ 2,00,000 (दो लाख रुपये - मोबाइल कैलकुलेटर पर लिखकर) |
| 6. | किश्तों में दी गई कुल कथित राशि | ₹ 1,90,000 (एक लाख नब्बे हजार रुपये) |
| 7. | मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आधिकारिक शिकायत संख्या | CMHL-062026-2-1057857 |
| 8. | मोर्चा खोलने वाले राजनैतिक दल का नाम | राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (राष्ट्रीय अध्यक्ष: शिवप्रसाद सेमवाल) |
| 9. | दावा किए गए साक्ष्यों की प्रकृति | बैठकों, वार्तालाप एवं लेनदेन के सुरक्षित ऑडियो और वीडियो फुटेज |
निष्पक्ष जांच न होने पर पार्टी ने दी राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की बात करने वाली सरकार को इस मामले में तत्काल एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विजिलेंस जांच (Vigilence Inquiry) बैठानी चाहिए। यदि जांच में यह संगीन आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोनों नामित कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए और उनकी आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) की भी सघन स्क्रूटनी होनी चाहिए।
पार्टी ने कड़े लहजे में जिला प्रशासन और शासन को चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर इस भ्रष्टाचार कांड की पारदर्शी जांच शुरू नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक विधिक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, तो पार्टी पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए पूरे उत्तराखंड में एक व्यापक और उग्र राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होगी। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद देहरादून के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची हुई है और सभी की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अगले रुख पर टिकी हैं।
