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देहरादून। उत्तराखंड में आयोजित होने वाले विशाल धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए राज्य सरकार और उत्तराखंड पुलिस ने तकनीक और डिजिटल मोर्चे पर एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के विशेष निर्देशों के अनुपालन में, पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखंड श्री दीपम सेठ के मार्गदर्शन में प्रदेश में पहली बार कांवड़ मेला-2026 के दौरान साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु विशेष रूप से प्रशिक्षित 'साइबर कमांडोज' (Cyber Commandos) की तैनाती की गई है।
यह पहल न केवल कांवड़ यात्रा के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की डिजिटल और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले आगामी भव्य 'महाकुंभ-2027' के लिए राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप एक सुदृढ़, आधुनिक और व्यावहारिक साइबर सुरक्षा मॉडल (Cyber Security Model) विकसित करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।
पटेल भवन में आयोजित हुई साइबर कमांडोज की विशेष ब्रीफिंग; हरिद्वार में दी गई तैनाती
कांवड़ मेला-2026 के दौरान डिजिटल स्पेस में होने वाली आपराधिक गतिविधियों, फर्जीवाड़े और अफवाहों पर नकेल कसने के लिए शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय (पटेल भवन), देहरादून में प्रशिक्षित साइबर कमांडोज की एक उच्च स्तरीय विशेष ब्रीफिंग आयोजित की गई। ब्रीफिंग के उपरांत इन सभी प्रशिक्षित साइबर कमांडोज को हरिद्वार कांवड़ क्षेत्र और मुख्य कंट्रोल रूम्स में आधिकारिक रूप से तैनात कर दिया गया है। उत्तराखंड के प्रशासनिक और सुरक्षा इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी वृहद धार्मिक मेले के संचालन और जनसुरक्षा के लिए इतने बड़े पैमाने पर प्रशिक्षित साइबर कमांडोज को मोर्चे पर उतारा गया है।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत कुल 35 साइबर कमांडोज का एक जॉइंट ग्रुप तैयार किया गया है:
- राष्ट्रीय साइबर कमांडोज: केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तहत देश के विभिन्न राज्यों से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर आए 31 साइबर कमांडो।
- राज्य साइबर कमांडोज: उत्तराखंड एसटीएफ और साइबर पुलिस के 04 स्थानीय साइबर कमांडो।
- तैनाती के मुख्य केंद्र: यह संयुक्त दल हरिद्वार स्थित मुख्य कंट्रोल रूम, कांवड़ सेल (पटेल भवन, देहरादून) तथा सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) में ग्रुप्स में तैनात रहकर वर्चुअल वर्ल्ड और इंटरनेट स्पेस पर 24x7 अपनी पैनी निगाह रखेगा।
4 विशेष इकाइयां करेंगी 24x7 निगरानी; इन मुख्य मोर्चों पर रहेगा ध्यान
कांवड़ मेले के दौरान साइबर स्पेस, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सतत और चौबीसों घंटे निगरानी के लिए साइबर कमांडोज की 04 विशेष विशेषज्ञ इकाइयां (Specialized Units) गठित की गई हैं:
- साइबर सिक्योरिटी यूनिट (Cyber Security Unit): नेटवर्क सुरक्षा, सर्वर प्रोटेक्शन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को हैकिंग या वायरस अटैक से सुरक्षित रखना।
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट (Social Media Monitoring Unit): फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फैलने वाली फेक न्यूज, आपत्तिजनक पोस्ट और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली अफवाहों को रियल-टाइम में ट्रैक करना।
- साइबर इंटेलिजेंस यूनिट (Cyber Intelligence Unit): डार्क वेब, संदिग्ध डोमेन और साइबर अपराधियों के सिंडिकेट्स का डेटा विश्लेषण कर अग्रिम इनपुट तैयार करना।
- इंसिडेंट रिस्पॉन्स यूनिट (Incident Response Unit): ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी या डिजिटल अपराध की सूचना मिलते ही तत्काल एक्शन लेकर फंड फ्रीज कराना और विधिक कार्रवाई करना।
कमांडोज के मुख्य कार्य और उत्तरदायित्व:
- होटल व यात्रा फर्जीवाड़े पर रोक: श्रद्धालुओं को लक्ष्य बनाकर चलाए जाने वाले फर्जी ऑनलाइन होटल बुकिंग, हेली सेवा बुकिंग, फेक जीपीएस ट्रैकिंग और फर्जी ट्रैवल वेबसाइट्स का तुरंत पर्दाफाश कर उन्हें ब्लॉक कराना।
- क्यूआर कोड एवं यूपीआई फ्रॉड से बचाव: मेला क्षेत्र में क्यूआर कोड (QR Code) बदलकर या यूपीआई (UPI) के माध्यम से दुकानदारों व श्रद्धालुओं से होने वाली ठगी पर नजर रखना।
- फिशिंग और साइबर ठगी की रोकथाम: साइबर हेल्पलाइन 1930, एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल और स्थानीय पुलिस सेल से प्राप्त होने वाली साइबर शिकायतों का त्वरित तकनीकी विश्लेषण कर फील्ड इकाइयों को रियल-टाइम अलर्ट भेजना।
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का निर्माण: कांवड़ मेला-2026 के दौरान प्राप्त होने वाले तकनीकी अनुभवों और सफल ऑपरेशन्स का दस्तावेजीकरण (Documentation) किया जाएगा, ताकि महाकुंभ-2027 के लिए एक त्रुटिहीन एसओपी (SOP) तैयार की जा सके।
एसटीएफ अधिकारियों के निर्देश: "रियल-टाइम इनपुट साझा कर तुरंत करें प्रहार"
ब्रीफिंग के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्पेशल टास्क फोर्स ने सभी साइबर कमांडोज को संबोधित करते हुए कहा कि वे विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय संस्थानों में प्राप्त अपने आधुनिक तकनीकी ज्ञान और अनुभवों का पूर्ण उपयोग करें। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में सक्रिय अपराधियों को समय रहते चिन्हित करना और त्वरित रिस्पॉन्स देना ही इस योजना का मूल ध्येय है। कांवड़ मेले से मिलने वाले व्यावहारिक निष्कर्ष महाकुंभ-2027 की विशाल सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ बनेंगे।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ ने साइबर कमांडोज को आधुनिक तकनीकी संसाधनों के कुशल प्रयोग, डिजिटल मॉनिटरिंग के त्वरित निस्तारण तथा प्राप्त प्रत्येक इनपुट पर बिना किसी विलंब के फील्ड पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर कड़ा एक्शन लेने के विधिक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
राष्ट्रीय और राज्य एजेंसियों के अभूतपूर्व समन्वय से सुरक्षित होगा डिजिटल वातावरण
इस विशेष ब्रीफिंग कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्रालय (MHA) के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के डायरेक्टर श्री तरुण उप्पल विशेष रूप से मौजूद रहे, जबकि I4C की राष्ट्रीय प्रशिक्षण टीम दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सीधे जुड़ी रही और कमांडोज को तकनीकी ब्रीफ प्रदान किया। कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक (कानून व्यवस्था) श्री लोकजीत सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर) श्री शान्तनु पाराशर, क्षेत्राधिकारी एसटीएफ श्री ऋषि चमोला तथा आईटीडीए (ITDA) के महाप्रबंधक (साइबर सुरक्षा) श्री अनिल जोशी ने भी अपने विचार रखे।
उत्तराखंड पुलिस ने इस प्रेस नोट के माध्यम से देश भर से आ रहे करोड़ों कांवड़ श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि राज्य पुलिस उनके सुगम और सुरक्षित डिजिटल वातावरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध लिंक प्राप्त होने पर नागरिक तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं।
