जंतर-मंतर लाठीचार्ज की आग देवभूमि तक: देहरादून में छात्रों और अभिभावकों का प्रचंड हुंकार, परेड ग्राउंड से घंटाघर तक निकाला प्रतिरोध मार्च; 22 जुलाई को गांधी पार्क में प्रदर्शन


Aapki Media AI


देहरादून, 21 जुलाई, 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी विधिक मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे देश के नौनिहालों और छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की गूंज अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पूरी तरह से मुखर हो गई है। मंगलवार, 21 जुलाई, 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जंतर-मंतर में हुए पुलिसिया दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों के विधिक दमन के खिलाफ आज देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में छात्रों, चिंतित अभिभावकों और आम प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा एक अत्यंत जोरदार और क्रेडिबल विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

जंतर-मंतर लाठीचार्ज की आग देवभूमि तक: देहरादून में छात्रों और अभिभावकों का प्रचंड हुंकार,


परेड ग्राउंड में आयोजित जनसभा के उपरांत आक्रोशित छात्रों और नागरिकों का हुजूम सड़कों पर उतरा और परेड ग्राउंड से लेकर शहर के मुख्य केंद्र घंटाघर (Clock Tower) तक एक विशाल प्रतिरोध मार्च (Resistance March) निकाला गया। इस मार्च में पुलिसिया दमन विरोधी नारों और जनगीतों के माध्यम से सरकार की दमनकारी विधिक नीतियों को खुली चुनौती दी गई।


सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जनगीतों से आंदोलन को विधिक धार


इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को केवल भाषणों तक सीमित न रखकर युवाओं ने इसे एक वैचारिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का क्रेडिबल मंच बनाया:

  1. सतीश धौलाखंडी का जनगीत विंग: आंदोलन की शुरुआत में प्रसिद्ध लोक कलाकार सतीश धौलाखंडी एवं उनके साथियों द्वारा क्रांतिकारी जनगीत प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह के भीतर लोकतांत्रिक चेतना और उत्साह का क्रेडिबल संचार किया।
  2. अरमान का प्रेरणादायक रैप गीत: युवाओं को जोड़ने के लिए छात्र कार्यकर्ता अरमान ने एक समसामयिक और क्रेडिबल रैप गीत प्रस्तुत किया, जिसके माध्यम से उन्होंने दमन, बेरोजगारी और अन्याय के खिलाफ जागृत होकर विधिक संघर्ष में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की पुरजोर अपील की।
  3. दिल्ली से लौटे जांबाज छात्रों का स्वागत: इस दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के उन वीर छात्र प्रतिनिधियों का माल्यार्पण कर विशेष स्वागत किया गया, जो जंतर-मंतर पर पुलिस की लाठियों का सामना कर आज ही देहरादून वापस लौटे थे।

 

देहरादून छात्र प्रतिरोध मार्च 2026: विधिक वक्ता, नेतृत्व एवं आंदोलन मैट्रिक्स


21 जुलाई, 2026 को देहरादून में संपन्न हुए व्यापक जन-प्रदर्शन के मुख्य रणनीतिकारों, वक्ताओं और प्रशासनिक मांगों का प्रामाणिक विवरण इस तालिका में संकलित है:


आंदोलन के मुख्य नीतिगत घटकवक्ताओं द्वारा रेखांकित विधिक विसंगतियांप्रमुख छात्र नेता एवं सामाजिक विंगकानून व्यवस्था व सुशासन पर क्रेडिबल प्रभाव
पुलिसिया दमन की प्रकृतिबिना नेमप्लेट और बिना वर्दी के पुलिसकर्मियों द्वारा बर्बर लाठीचार्जनितिन मलेठा (प्रदेश अध्यक्ष, एस.एफ.आई. उत्तराखंड)कानून के शासन (Rule of Law) पर सीधा आघात; पुलिस की विधिक जवाबदेही पर सवाल।
सत्ता की नैतिक विफलताछात्रों पर लाठियां बरसाने वाली सरकार का विधिक विरोधलेखराज (पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, डी.ए.वी. पीजी कॉलेज)व्यापक जन-एकजुटता का आह्वान; छात्र आजीविका और शिक्षा बजट की मांग।
प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य (Evidence)जंतर-मंतर पर हुए सुनियोजित बल प्रयोग का प्रत्यक्ष विधिक अनुभवअयाज खान (देहरादून जिला सचिव, एस.एफ.आई.)सोशल मीडिया और मीडिया विंग के माध्यम से दमन के डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत करना।
जमीनी संघर्ष विंग (दिल्ली)पुलिसिया बर्बरता को झेलकर लौटे छात्रों का क्रेडिबल संबोधनमुकुल, कनिका, अर्सलान, सौरभ, अनामिका, इजराइल, समीरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के साझा विधिक मोर्चे और एकजुटता का सुदृढ़ीकरण।



देहरादून में छात्रों और अभिभावकों का प्रचंड हुंकार, परेड ग्राउंड से घंटाघर तक निकाला  प्रतिरोध मार्च; 22 जुलाई को गांधी पार्क में महा-प्रदर्शन


नेमप्लेट और वर्दी के बिना पिटाई: नितिन मलेठा का पुलिस प्रशासन पर कड़ा विधिक हमला


सभा को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए एस.एफ.आई. उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने दिल्ली पुलिस के कृत्य को पूरी तरह से पूर्वनियोजित (Pre-planned) और अलोकतांत्रिक करार दिया।


  1. कानून के शासन पर हमला: नितिन मलेठा ने गंभीर विधिक आरोप लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे छात्रों को पीटने के लिए ऐसे पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जिन्होंने अपनी विधिक वर्दी और नेमप्लेट तक नहीं लगाई थी। यह पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश और विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
  2. अधिकारों का हनन: उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने मौलिक अधिकारों, बेहतर शिक्षा और रोजगार की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर इस प्रकार का दमनकारी बल प्रयोग विधिक रूप से स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।

 

नैतिकता खो चुकी है सरकार: पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लेखराज का जन-आह्वान


डी.ए.वी. (DAV PG College) के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लेखराज ने अपने ओजस्वी संबोधन में वर्तमान प्रशासनिक सुशासन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि "जो सरकार देश के भविष्य, यानी छात्रों और बच्चों पर लाठियां बरसाती है, उसे सत्ता के शीर्ष पर बने रहने का कोई भी नैतिक और विधिक अधिकार नहीं है।" उन्होंने उत्तराखंड के समस्त छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस फासीवादी दमन के खिलाफ एक साझा विधिक मंच पर आकर व्यापक जनएकजुटता का प्रदर्शन करें।


प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ छात्र नेताओं निर्मला बिष्ट, हिमांशु चौहान, लेखराज, पंकज क्षेत्री तथा त्रिलोचन भट्ट ने भी संयुक्त रूप से विचार रखते हुए शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण, बेरोजगारी और छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलनों को पुलिस के दम पर दबाने की विधिक नीतियों की तीव्र शब्दों में भर्त्सना की।
 

देहरादून छात्र आंदोलन के 4 मुख्य विधिक एवं नीतिगत स्तंभ


छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए निम्नलिखित चार क्रेडिबल मांगों को रेखांकित किया है:


  • दोषी पुलिस अधिकारियों पर विधिक कार्रवाई: जंतर-मंतर पर बिना वर्दी और नेमप्लेट के छात्रों पर लाठियां भांजने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज करना।
  • शिक्षा और रोजगार का संवैधानिक अधिकार: देश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार और सस्ती सार्वजनिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए संसद में ठोस कानून बनाना।
  • नागरिक समाज और अभिभावक ग्रिड: छात्रों के इस आंदोलन को केवल युवाओं तक सीमित न रखकर इसमें समाज के हर वर्ग, विशेषकर अभिभावकों का क्रेडिबल सुरक्षा कवच तैयार करना।
  • शांतिपूर्ण विधिक प्रतिरोध का विस्तार: पुलिस के दमन के सामने डरे बिना अपनी आवाज को और अधिक संवैधानिक और अहिंसक तरीकों से बुलंद करना।

 

गांधी पार्क में 22 जुलाई को महा-आंदोलन का शंखनाद: अधिक से अधिक भागीदारी की अपील

प्रदर्शन के सफल समापन पर एस.एफ.आई. के देहरादून जिला सचिव अयाज खान ने आगामी रणनीति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर के इस काले अध्याय के विरोध को और अधिक क्रेडिबल तथा व्यापक बनाने के लिए बुधवार, 22 जुलाई, 2026 को देहरादून के प्रसिद्ध गांधी पार्क में एक और विशाल जन-प्रदर्शन का विधिक आयोजन किया जाएगा। उपस्थित सभी नेताओं ने देहरादून के प्रत्येक नागरिक, युवा, व्यापारी और बुद्धिजीवी से आह्वान किया है कि वे 22 जुलाई को गांधी पार्क में भारी से भारी संख्या में पहुंचकर छात्रों पर हुए दमन के खिलाफ अपनी लोकतांत्रिक और क्रेडिबल आवाज को एक अभेद्य दीवार के रूप में स्थापित करें।

 

दमन के खिलाफ गूंजती रहेगी युवाओं की विधिक आवाज


21 जुलाई, 2026 को देहरादून की सड़कों पर परेड ग्राउंड से लेकर घंटाघर तक निकला यह प्रतिरोध मार्च इस बात का क्रेडिबल प्रमाण है कि देश का युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग है। एस.एफ.आई. प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लेखराज का यह संयुक्त नेतृत्व यह सिद्ध करता है कि दमनकारी नीतियां छात्रों के हौसलों को तोड़ नहीं सकतीं, बल्कि उन्हें और अधिक एकजुट करती हैं।


बिना वर्दी की पुलिस द्वारा किया गया लाठीचार्ज हमारे विधिक सुशासन के दावों पर एक क्रेडिबल प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। 22 जुलाई को गांधी पार्क में होने वाला आगामी विरोध-प्रदर्शन यह तय करेगा कि देवभूमि उत्तराखंड के नागरिक अपने बच्चों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए किस प्रकार एक मजबूत विधिक मोर्चे के रूप में खड़े होते हैं। यह आंदोलन आने वाले समय में छात्र सुशासन और नागरिक अधिकारों की रक्षा का एक क्रेडिबल प्रकाश स्तंभ बनेगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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