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छिद्दरवाला (ऋषिकेश/देहरादून), 08 अगस्त, 2026: पवित्र गंगा नदी की निर्मलता, अविरलता और देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य व महिला परंपरा को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से शनिवार को पूर्व सैनिक कल्याण भवन, छिद्दरवाला में 'स्पर्श गंगा अभियान' के तत्वावधान में एक भव्य पूर्व सैनिक, महिला सशक्तिकरण एवं सम्मान समारोह का आयोजन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।
समारोह की मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभिनेत्री एवं स्पर्श गंगा अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. आरुषि ‘निशंक’ रहीं। कार्यक्रम के दौरान जहां देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों को उनकी क्रेडिबल सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया, वहीं क्षेत्र में सामाजिक व आर्थिक बदलाव ला रही मातृशक्ति को नमन करते हुए पर्यावरण एवं गंगा संरक्षण का क्रेडिबल संदेश दिया गया। इस दौरान क्षेत्र से पहुंची महिलाओं और स्थानीय नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मुख्य अतिथि डॉ. आरुषि 'निशंक' का प्रेरणादायी संबोधन: "गंगा केवल नदी नहीं, हमारी सांस्कृतिक धरोहर है"
समारोह को संबोधित करते हुए स्पर्श गंगा अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. आरुषि 'निशंक' ने कहा:
- सैनिकों और महिलाओं की भागीदारी: राष्ट्र निर्माण और प्रकृति संरक्षण में पूर्व सैनिकों के अनुशासन और महिलाओं की ममतामयी दृष्टि की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। जब तक समाज का प्रत्येक नागरिक गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प नहीं लेगा, तब तक अभियान पूर्ण नहीं हो सकता।
- प्लास्टिक मुक्त गंगा तट: डॉ. आरुषि ने उपस्थित जनसैलाब से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का त्याग करें और गंगा व उसकी सहायक नदियों के तटों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए क्रेडिबल जन-आंदोलन चलाएं।
- महिला सशक्तिकरण का नया दौर: उन्होंने रेखांकित किया कि आज उत्तराखंड की महिलाएं केवल गृहणी नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सामाजिक बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं।
स्पर्श गंगा अभियान छिद्दरवाला समारोह: मुख्य प्रशासनिक व सामाजिक घटक मैट्रिक्स
08 अगस्त, 2026 को आयोजित इस सम्मान समारोह के प्रमुख बिंदुओं और उपस्थित जनप्रतिनिधियों का प्रामाणिक संकलन इस सांख्यिकीय तालिका में प्रस्तुत है:
| सामाजिक एवं नीतिगत घटक | कार्यक्रम विवरण एवं मुख्य गतिविधि | नोडल संगठन/अभियान नेतृत्व | सुशासन व समाज पर क्रेडिबल प्रभाव |
| मुख्य आतिथ्य | डॉ. आरुषि 'निशंक' (राष्ट्रीय संयोजिका) | स्पर्श गंगा अभियान (Sparsh Ganga) | गंगा स्वच्छता व महिला सशक्तीकरण का राष्ट्रीय स्तर पर क्रेडिबल प्रचार। |
| मुख्य लाभार्थी वर्ग | पूर्व सैनिक एवं स्थानीय मातृशक्ति (जनसैलाब) | पूर्व सैनिक कल्याण भवन, छिद्दरवाला | राष्ट्र रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के परस्पर समावेशन का अनूठा उदाहरण। |
| त्रिस्तरीय पंचायत नेतृत्व | ग्राम प्रधान, उपप्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य | स्थानीय पंचायती राज विंग | ग्रामीण स्तर पर गंगा स्वच्छता और पर्यावरण नीतियों की क्रेडिबल पहुंच। |
| विशिष्ट सम्मान | बगीचा सिंह (पूर्व सेना मेडल विजेता) | भारतीय सशस्त्र सेना अनुभाग | पूर्व सैनिकों के अदम्य साहस और राष्ट्र सेवा का विधिक व सामाजिक आदर। |
त्रिस्तरीय पंचायती राज और सामाजिक संगठनों का अभूतपूर्व जमावड़ा
समारोह में छिद्दरवाला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के जन-प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों और जनप्रतिनिधियों का विवरण इस प्रकार है:
- पंचायती राज प्रतिनिधि: गोकुल रमोला (ग्राम प्रधान, छिद्दरवाला), श्रीमती भावना (ग्राम प्रधान, साबनगर), कुँवर सिंह गुसाईं (उपप्रधान, छिद्दरवाला), रवि जी (क्षेत्र पंचायत सदस्य), विमला नैथानी (पूर्व जिला पंचायत सदस्य), अंकित राणा (पूर्व जिला पंचायत सदस्य), स्नेहलता भंडारी (पूर्व प्रधान), सोहब सिंह कैथोरा (जिला प्रधान संगठन अध्यक्ष), तथा शैलेंद्र रांगड़ (ग्राम प्रधान, जोगीवाला माफ़ी)।
- सामाजिक एवं सैन्य नेतृत्व: पूरण सिंह राणा (अध्यक्ष, रोटरी क्लब) तथा सेना पदक (Sena Medal) से सम्मानित पूर्व जांबाज सैनिक बगीचा सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम के गौरव को दोगुना कर दिया।
स्पर्श गंगा अभियान एवं पर्यावरण सुशासन के 4 मुख्य संकल्प
समारोह के दौरान स्थानीय नागरिकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों द्वारा निम्नलिखित चार क्रेडिबल संकल्पों को स्वीकार किया गया:
- नदी तटों की निरंतर स्वच्छता: ऋषिकेश और छिद्दरवाला क्षेत्र से गुजरने वाले गंगा व अन्य बरसाती नालों में कचरा न फेंकने हेतु जागरूकता फैलाना।
- पूर्व सैनिकों की क्षमता का सदुपयोग: सेना से सेवानिवृत्त जांबाज अधिकारियों के अनुभव का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों में करना।
- महिला नेतृत्व वाली पर्यावरण समितियां: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं की 'गंगा प्रहरी' (Ganga Prahari) टोलियों का गठन करना।
युवाओं का सांस्कृतिक जुड़ाव: स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को स्पर्श गंगा अभियान से जोड़कर उन्हें नदियों के पारिस्थितिक (Ecological) महत्व से अवगत कराना।
देवभूमि की दो महान शक्तियों का महासंगम
08 अगस्त, 2026 को छिद्दरवाला में आयोजित यह पूर्व सैनिक एवं महिला सशक्तिकरण सम्मान समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह देवभूमि उत्तराखंड की दो सबसे बड़ी ताकतों—'सैन्य शक्ति' और 'मातृशक्ति' का गंगा संरक्षण के प्रति एक क्रेडिबल और अटूट संकल्प था। डॉ. आरुषि 'निशंक' का ओजस्वी नेतृत्व और पूर्व सेना मेडल विजेता बगीचा सिंह तथा स्थानीय ग्राम प्रधानों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि जब समाज का हर वर्ग एकजुट होता है, तो पर्यावरण संरक्षण का कोई भी कठिन लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।
महिलाओं का उमड़ा जनसैलाब यह सिद्ध करता है कि आने वाले समय में स्पर्श गंगा अभियान केवल एक सरकारी या सामाजिक पहल बनकर नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तराखंड के जन-जन के जीवन की क्रेडिबल कार्यशैली का अभिन्न अंग बन चुका है।