हिमालय दिवस पर मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाएं: हर वर्ष दिया जाएगा 'हिमालय विभूति सम्मान'; हिमालय परिषद् के लिए ₹1 करोड़ जारी, 'इकोलॉजी और इकोनॉमी' के संतुलन पर जोर


Aapki Media AI


देहरादून, 08 सितंबर, 2026: उत्तराखण्ड में पर्यावरण संतुलन, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सोमवार, 07 सितंबर, 2026 को वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास का मार्ग 'इकोलॉजी और इकोनॉमी' के सटीक संतुलन से होकर ही निकलेगा।

 

हिमालय दिवस पर मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाएं: हर वर्ष दिया जाएगा 'हिमालय विभूति सम्मान'


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और शोधकार्यों को गति देने के लिए दूरगामी नीतिगत फैसलों का ऐलान किया।


हिमालय दिवस समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा की गई प्रमुख घोषणाएं


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में पर्यावरण और विज्ञान प्रोत्साहन हेतु निम्नलिखित प्रमुख घोषणाएं कीं:

  1. 'हिमालय विभूति सम्मान' की शुरुआत: प्रत्येक वर्ष हिमालय दिवस (9 सितंबर) के अवसर पर हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को 'हिमालय विभूति सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा।
  2. हिमालय परिषद् हेतु ₹1 करोड़ का अनुदान: हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं, आधुनिक शोध संसाधनों और अवस्थापना विकास के विस्तार हेतु ₹1 करोड़ की धनराशि प्रदान करने की घोषणा की गई।
  3. 5 प्रमुख पोस्टर व पत्रिका का विमोचन: मुख्यमंत्री ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित पोस्टर—7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखण्ड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस का विमोचन किया। इसके साथ ही विज्ञान संप्रेषण पत्रिका के 5वें वार्षिकांक का भी अनावरण किया गया।



हिमालय दिवस समारोह 2026: मुख्य प्रशासनिक व नीतिगत ब्योरा 


07 सितंबर, 2026 को देहरादून में संपन्न कार्यक्रम का संकलित ब्योरा:

नीतिगत / प्रशासनिक घटकमुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं व निर्णयनोडल एजेंसी व मंचजन-सुभाषा व पर्यावरण प्रभाव
नया राज्य पुरस्कार'हिमालय विभूति सम्मान' (वार्षिक)उत्तराखण्ड शासन एवं यू-कॉस्ट (UCOST)पर्यावरण शोधार्थियों व वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन।
वित्तीय प्रोत्साहन₹1 करोड़ अनुदान (हिमालय परिषद् हेतु)वीर माधो सिंह भण्डारी विवि / यू-कॉस्टबुनियादी ढाँचे व शोध संसाधनों का सुदृढ़ीकरण।
विकास का मूल मंत्रइकोलॉजी और इकोनॉमी का संतुलनराज्य योजना आयोग व पर्यावरण विभागपर्यावरण-अनुकूल स्थायी पर्वतीय विकास मॉडल।
जागरूकता सप्ताह2 सितंबर (बुग्याल दिवस) से 9 सितंबर (हिमालय दिवस)सूचना एवं लोक संपर्क विभागजल, जंगल, जमीन व बुग्यालों का संरक्षण अभियान।

'मिशन लाइफ' और पर्वतीय विकास का संतुलन


अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज वैश्विक चुनौतियां हैं, जिनका सीधा प्रभाव हिमालय के ग्लेशियरों, पारंपरिक जल स्रोतों और जैव विविधता पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 'मिशन लाइफ' (Lifestyle for Environment) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली और शिक्षा के साथ-साथ पहाड़ों की धारण क्षमता (Carrying Capacity) का ध्यान रखना अनिवार्य है। 'नमामि गंगे' और 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' जैसे अभियानों से सीमांत क्षेत्रों में पलायन रोकने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।


समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति


कार्यक्रम के दौरान विज्ञान, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तित्व मौजूद रहे:

  1. विधायक: श्री किशोर उपाध्याय
  2. पद्म भूषण सम्मानित एवं संस्थापक हेस्को: डॉ. अनिल प्रकाश जोशी
  3. कुलपति (UTU): डॉ. तृप्ता ठाकुर
  4. महानिदेशक (UCOST): प्रो. दुर्गेश पंत
  5. रजिस्ट्रार (UTU): डॉ. राजेश उपाध्याय
  6. संयुक्त निदेशक (UCOST): श्री डी.पी. उनियाल

 

पर्यावरण संरक्षण व सतत विकास के 4 मुख्य नीतिगत बिंदु 


हिमालय दिवस सप्ताह के अवसर पर राज्य सरकार के संकल्प:

  • पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय: स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर टिकाऊ समाधान निकालना।
  • जनभागीदारी से जन-आंदोलन: हिमालय संरक्षण को केवल सरकारी सेमिनारों तक सीमित न रखकर बुग्यालों और नदियों के संरक्षण में जनता को जोड़ना।
  • इकोलॉजिकल वेल्थ से इकोनॉमिक स्ट्रेंथ: बुग्याल, जंगलों और स्थानीय उत्पादों को आजीविका से जोड़कर पर्वतीय पलायन पर प्रभावी रोक लगाना।
  • भविष्य की पीढ़ी हेतु जिम्मेदारी: जल-जंगल-जमीन का संरक्षण कर आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वच्छ उत्तराखण्ड सौंपना।

 

मॉडल पर्यावरण राज्य बनने की ओर उत्तराखण्ड 


07 सितंबर, 2026 को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई घोषणाएं उत्तराखण्ड को हिमालय संरक्षण के क्षेत्र में एक दिशा-दर्शक और 'मॉडल राज्य' के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। 'हिमालय विभूति सम्मान' और शोध अनुदान से प्रदेश में पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास को नई गति मिलेगी।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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