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देहरादून/अल्मोड़ा, 07 सितंबर, 2026: उत्तराखण्ड में लगातार पैर पसार रहे डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के मामलों पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार, 07 सितंबर, 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ कार्यालय देहरादून द्वारा जारी अधिकृत प्रेस नोट के अनुसार, कुमाऊँ परिक्षेत्र साइबर थाने की पुलिस टीम ने अल्मोड़ा निवासी एक वरिष्ठ महिला नागरिक से ₹1,20,18,000 (1 करोड़ 20 लाख 18 हजार रुपये) की डिजिटल अरेस्ट ठगी करने वाले मुख्य अभियुक्त को पश्चिम बंगाल के मालदा से गिरफ्तार कर लिया है।
साइबर अपराधियों ने खुद को टेलीकॉम रेग्युलेटरी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़िता को 12 दिनों तक लगातार व्हाट्सएप कॉल (WhatsApp Call) पर बंधक यानी 'डिजिटल अरेस्ट' बनाए रखा था।
अपराध का तरीका और मालदा से अभियुक्त की गिरफ्तारी
एसटीएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ठगी के इस मामले में साइबर अपराधियों ने बेहद खौफनाक और सुनियोजित तरीका अपनाया था:
- मनी लॉन्ड्रिंग व 5,000 FIR का झूठा डर: ठगों ने पीड़िता से संपर्क कर दावा किया कि उनके केनरा बैंक खाते से जुड़ी पहचान का उपयोग कर ₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है, जिसमें 5,000 लोगों के पैसे ट्रांसफर हुए हैं और 5,000 एफआईआर दर्ज हैं।
- 12 दिनों का डिजिटल अरेस्ट: बैंक खातों के सत्यापन और कानूनी कार्रवाई के नाम पर पीड़िता को किसी से भी संपर्क न करने की हिदायत दी गई। डरा-धमकाकर 12 दिनों तक व्हाट्सएप वीडियो/ऑडियो कॉल के जरिए हाउस/डिजिटल अरेस्ट रखा गया और विभिन्न खातों में कुल ₹1.20 करोड़ से अधिक की धनराशि ट्रांसफर करवा ली गई।
- मालदा से गिरफ्तारी: मेटा (Meta), संबंधित बैंकों व टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर से प्राप्त तकनीकी डेटा के विश्लेषण के बाद एसटीएफ टीम ने पश्चिम बंगाल पहुंचकर अभियुक्त शांतनु दास पुत्र समीर कुमार दास (निवासी: ग्राम गोपालपुर, थाना इंग्लिश बाजार, जिला मालदा, पश्चिम बंगाल) को गिरफ्तार किया। आरोपी के बैंक खाते में ठगी की पूरी रकम प्राप्त की गई थी।
₹1.20 करोड़ डिजिटल अरेस्ट मामला: प्रशासनिक व विधिक ब्योरा
07 सितंबर, 2026 को एसटीएफ द्वारा जारी विधिक कार्रवाई का विवरण इस तालिका में संकलित है:
| विधिक/प्रशासनिक घटक | प्रकरण विवरण एवं पुलिस कार्रवाई | नोडल एजेंसी व कानून | जन-सुरक्षा व साइबर सुशासन प्रभाव |
| ठगी का स्वरूप व राशि | ₹1.20 करोड़ (12 दिनों का 'डिजिटल अरेस्ट') | साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, कुमाऊँ परिक्षेत्र | डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट पर सख्त विधिक कार्रवाई। |
| गिरफ्तार अभियुक्त | शांतनु दास (निवासी: इंग्लिश बाजार, मालदा, पश्चिम बंगाल) | BNS धाराएं व IT Act 2000 | अंतर्राज्यीय वित्तीय मनी ट्रेल का पर्दाफाश। |
| पीड़िता व स्थान | वरिष्ठ महिला नागरिक (निवासी: अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड) | एसटीएफ साइबर सेल अनुसंधान | बुजुर्ग व संवेदनशील नागरिकों की सुरक्षा। |
| त्वरित सहायता हेल्पलाइन | 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन) | गृह मंत्रालय व राज्य पुलिस सेल | वित्तीय धोखाधड़ी पर तत्काल अकाउंट फ्रीजिंग। |
ऑपरेशन को अंजाम देने वाली कुमाऊँ साइबर पुलिस टीम
इस अंतर्राज्यीय तकनीकी ऑपरेशन को सफलता से अंजाम देने वाले अधिकारी:
- निरीक्षक: श्री अरुण कुमार
- उपनिरीक्षक (SI): शंकर सिंह रावत
- सहायक उपनिरीक्षक (ASI): सत्येंद्र गंगोला
- हेड कांस्टेबल: मनोज कुमार
'डिजिटल अरेस्ट' व साइबर फ्रॉड से बचाव हेतु एसटीएफ की मुख्य एडवाइजरी
एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा आम जनता और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए जारी 4 मुख्य सावधानियां:
- 'डिजिटल अरेस्ट' नाम का कोई कानूनी प्रावधान नहीं: भारत में कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या टेलीकॉम विभाग व्हाट्सएप/वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या डिटेन नहीं करता।
- पहचान व दस्तावेज साझा न करें: अनजान कॉलर द्वारा डराने या बैंक खाते लिंक होने की बात कहने पर अपनी व्यक्तिगत व वित्तीय जानकारी बिल्कुल न दें।
- प्रलोभन व फर्जी निवेश से बचें: यूट्यूब लाइक, टेलीग्राम टास्क, पार्ट-टाइम जॉब व कम समय में रकम दोगुनी करने वाली फर्जी वेबसाइट्स के झांसे में न आएं।
- तत्काल 1930 पर करें शिकायत: किसी भी प्रकार का साइबर फ्रॉड होने या संदेह होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में संपर्क करें।
साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश
07 सितंबर, 2026 को एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा पश्चिम बंगाल के मालदा से की गई यह गिरफ्तारी राज्य में साइबर अपराध और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे घिनौने फ्रॉड के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस गिरोह के बाकी सदस्यों की भी पहचान की जा रही है और साइबर अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।
