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देहरादून, 25 सितंबर, 2026: पवित्र बद्रीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में गायिका प्रियंका मेहर के कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार, 25 सितंबर, 2026 को उक्रांद कार्यकर्ताओं ने देहरादून के द्रोण चौक पर एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और भाजपा सरकार का पुतला दहन किया।
उक्रांद नेताओं ने आरोप लगाया कि बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र सनातन स्थल पर तेज आवाज में डीजे और स्पीकर बजाकर सनातन परंपराओं, धार्मिक मर्यादाओं और उच्च हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता का घोर उल्लंघन किया गया है।
उक्रांद नेताओं के मुख्य वक्तव्य एवं गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान उक्रांद के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सरकार पर तीखे हमले बोले:
- शांति प्रसाद भट्ट (केंद्रीय उपाध्यक्ष): उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में हुआ यह आयोजन केवल पवित्र धाम की मर्यादाओं पर ही चोट नहीं है, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों सनातन धर्मवलंबियों की आस्था पर कुठाराघात है।
- गणेश काला (केंद्रीय महामंत्री संगठन): उन्होंने सवाल उठाया कि जिस बद्रीनाथ धाम में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख बजाना तक वर्जित है, वहां इतनी तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजाना सरकार के सनातन विरोधी चेहरे को उजागर करता है।
- देवचन्द्र उत्तराखंडी (केंद्रीय महामंत्री): उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील हैं। जहां सरकार को पर्यावरण संरक्षण हेतु नीतियां बनानी चाहिए थीं, वहीं इस तरह के आयोजनों से हिमालयी पारिस्थितिकी (Ecology) को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
- प्रकाश भट्ट (केंद्रीय सह मीडिया प्रभारी): उन्होंने मांग की कि भाजपा सरकार इस घटनाक्रम पर उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और भविष्य में उच्च हिमालयी व पवित्र धामों में ऐसे आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध का संकल्प ले।
- लूशुन टोडरिया (अध्यक्ष, मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ): उन्होंने पूर्व की घटनाओं का स्मरण दिलाते हुए कहा कि कपाट खुलने के समय हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और केदारनाथ में तेज आवाज में डीजे बजाने पर भी तीर्थ-पुरोहितों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। सरकार अपनी गलतियों से सीख लेने के बजाय हिमालय विरोधी कृत्यों को दोहरा रही है।
बद्रीनाथ धाम विवाद 2026: उक्रांद प्रदर्शन व मांग पत्र
25 सितंबर, 2026 को देहरादून में आयोजित उक्रांद प्रदर्शन का संक्षिप्त ब्योरा:
| राजनीतिक व नीतिगत घटक | उक्रांद द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु व आरोप | नोडल वक्ता व संगठन | धार्मिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव |
| विवाद का कारण | बद्रीनाथ अराइवल प्लाजा में तेज आवाज में संगीत/डीजे कार्यक्रम | गायिका प्रियंका मेहर कार्यक्रम संदर्भ | सनातन परंपराओं व शंख-वर्जित मर्यादा का उल्लंघन। |
| मुख्य विरोध स्थल | द्रोण चौक, देहरादून (भाजपा सरकार का पुतला दहन) | उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) | तीर्थ-पुरोहितों व स्थानीय जनता में आक्रोश। |
| पर्यावरणीय चिंता | उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण व संवेदनशील इकोलॉजी | देवचन्द्र उत्तराखंडी व लूशुन टोडरिया | उच्च हिमालयी जैव विविधता पर प्रतिकूल असर। |
| प्रमुख मांगें | सार्वजनिक माफी, धामों में डीजे/साउंड शो पर पूर्ण प्रतिबंध | शांति प्रसाद भट्ट व प्रकाश भट्ट | धामों की पवित्रता व मूल निवास/भू-कानून नीतियां। |
प्रदर्शन में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी
पुतला दहन कार्यक्रम में उक्रांद के वरिष्ठ कार्यकर्ता पान सिंह रावत, तराई प्रभारी राजेंद्र बिष्ट, महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष संगीता सकलानी बहुगुणा, महानगर महामंत्री अजय सिंह, राकेश नेगी, देवेंद्र बहुगुणा, सुचेता उनियाल सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उच्च हिमालयी व धाम सुरक्षा पर उक्रांद के 4 मुख्य बिंदु
उक्रांद द्वारा रेखांकित मुख्य नीतिगत चिंताएं:
- पारंपरिक मर्यादाओं का संरक्षण: चारधाम क्षेत्रों में केवल पारंपरिक भजनों और शास्त्रीय मर्यादाओं का अनुपालन सुनिश्चित करना।
- ध्वनि प्रदूषण पर रोक: इको-सेंसिटिव उच्च हिमालयी क्षेत्रों में डीजे, लाउडस्पीकर और व्यावसायिक साउंड शो को प्रतिबंधित करना।
- तीर्थ-पुरोहितों के अधिकारों का सम्मान: धामों के प्रबंधन व आयोजनों में स्थानीय तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों की सहमति अनिवार्य करना।
- संरचनात्मक हिमालयी नीति: पर्यटन और आयोजनों के नाम पर हिमालयी पर्यावरण से खिलवाड़ रोकने हेतु कड़े नियम बनाना।
धामों की गरिमा और पर्यावरण पर नीतिगत बहस तेज
25 सितंबर, 2026 को देहरादून के द्रोण चौक पर उक्रांद द्वारा किया गया यह विरोध प्रदर्शन उत्तराखण्ड के चारधाम क्षेत्रों में पर्यटन, इवेंट मैनेजमेंट और धार्मिक मर्यादाओं के बीच संतुलन बनाने की नीतिगत बहस को जन्म देता है। उक्रांद ने स्पष्ट किया है कि वे उच्च हिमालयी क्षेत्रों की पवित्रता और पर्यावरण की रक्षा के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे।