7000 बीघा जमीन नीलामी विवाद: उत्तराखंड क्रांति दल ने UIIDB कार्यालय का किया घेराव; बोर्ड को तत्काल भंग करने और जमीनों की बिक्री रोकने की मांग


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देहरादून, 15 सितंबर, 2026: उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) द्वारा राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों की लगभग 7000 बीघा जमीन को अपने अधीन लेकर आगे नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने का मामला अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। मंगलवार, 15 सितंबर, 2026 को जारी अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के 'मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ' के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित UIIDB कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया।

 

7000 बीघा जमीन नीलामी विवाद: उत्तराखंड क्रांति दल ने UIIDB कार्यालय का किया घेराव; बोर्ड को तत्काल भंग करने और जमीनों की बिक्री रोकने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने बोर्ड को तत्काल भंग करने तथा 7000 बीघा जमीन की नीलामी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।


कार्यालय के मुख्य द्वार पर अनोखा विरोध और उक्रांद नेताओं के कड़े वक्तव्य


प्रदर्शन के दौरान उक्रांद कार्यकर्ताओं ने UIIDB कार्यालय के मुख्य द्वार पर “उत्तराखंड की जमीनों की लूटपाट एवं खरीद-फरोख्त के लिए संपर्क करें” लिखे बैनर को प्रदर्शित कर सरकार की भूमि नीतियों का तीखा विरोध दर्ज कराया:

  1. लूशुन टोडरिया (अध्यक्ष, मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ): उन्होंने कहा कि 7000 बीघा सरकारी जमीन को बड़े पूंजीपतियों को सौंपने की तैयारी राज्य की मूल अवधारणा और मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। यदि बोर्ड को भंग कर नीलामी न रोकी गई तो उक्रांद प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगा।
  2. शांति प्रसाद भट्ट (केंद्रीय उपाध्यक्ष): उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के जन-हितों को दरकिनार कर भू-माफियाओं और उद्योगपतियों के हितों के अनुरूप नीतियां बना रही है।
  3. मीनाक्षी घिल्डियाल (केंद्रीय महामंत्री): उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार मजबूत भू-कानून लागू करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी जमीनों की सौदेबाजी की जा रही है, जो सरकार की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है।
  4. प्रकाश भट्ट व संगीता सकलानी बहुगुणा: उक्रांद नेताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का सवाल राज्य आंदोलन की मूल भावना से जुड़ा है और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की अंधाधुंध नीलामी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

UIIDB 7000 बीघा भूमि नीलामी विवाद 2026: प्रशासनिक व राजनीतिक विवरण



15 सितंबर, 2026 को देहरादून में आयोजित विरोध प्रदर्शन का संकलित विवरण:

राजनीतिक / प्रशासनिक घटकउक्रांद द्वारा उठाए गए मुद्दे व मांगेंनोडल संस्था व स्थानप्रादेशिक भू-कानून व सुशासन प्रभाव
प्रदर्शनकारी दलउत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) - मूल निवास प्रकोष्ठUIIDB कार्यालय, देहरादूनराज्य के मूल निवास व भू-कानून आंदोलन को गति।
विवादित भूमि का दायरालगभग 7000 बीघा विभिन्न सरकारी विभागों की जमीनUIIDB (इन्वेस्टमेंट बोर्ड)सार्वजनिक संपत्तियों के मौद्रिकरण पर राजनीतिक बहस।
मुख्य मांगें

1. UIIDB को तत्काल भंग किया जाए।


2. 7000 बीघा जमीन की नीलामी रोकी जाए।

शासन/प्रशासन उत्तराखण्डमूल निवासियों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा का दबाव।
आंदोलन की चेतावनीमांगें न मानने पर राज्यव्यापी जनआंदोलन का ऐलानउक्रांद केंद्रीय नेतृत्वआगामी निकाय व प्रादेशिक राजनीति पर दूरगामी असर।

प्रदर्शन में उपस्थित प्रमुख उक्रांद पदाधिकारी


इस घेराव कार्यक्रम में दल के कई केंद्रीय और क्षेत्रीय नेता शामिल रहे, जिनमें उपाध्यक्ष राकेश नेगी, महामंत्री कपिल रावत, मीडिया प्रभारी दिनेश पंत, पौड़ी के महामंत्री पंकज पोखरियाल, महानगर महामंत्री अजय सिंह, सुचेता उनियाल, आनंद कोठारी, सुनील मेंदोलिया, कैप्टन धर्मेंद्र असवाल और संदीप रावत प्रमुख थे।


उत्तराखंड भूमि संरक्षण व मूल निवास के 4 मुख्य नीतिगत आयाम


राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु राजनीतिक दलों की प्रमुख चिंताएं:


  • मूल निवासियों के भूमि अधिकार: राज्य के बुनियादी संसाधनों और जमीनों पर स्थानीय निवासियों के प्रथम अधिकार को सुनिश्चित करना।
  • सख्त भू-कानून की आवश्यकता: पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में जमीनों के अनियंत्रित हस्तांतरण पर विधिक नियंत्रण लगाना।
  • सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण: सरकारी विभागों की भूमि का उपयोग जनहित, स्वास्थ्य और शिक्षा हेतु करना, न कि व्यावसायिक नीलामी हेतु।
  • राज्य आंदोलन की मूल भावना: जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के संकल्प के आधार पर प्रादेशिक विकास मॉडल तैयार करना।

 

व्यापक जनआंदोलन की ओर बढ़ता मुद्दा


15 सितंबर, 2026 को देहरादून में यूआईआईडीबी कार्यालय पर उत्तराखंड क्रांति दल का यह प्रदर्शन राज्य में भूमि सुरक्षा और 'मूल निवास भू-कानून' की बहस को और तेज करता है। 7000 बीघा सरकारी जमीन की नीलामी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और क्षेत्रीय दलों के कड़े रुख से आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में प्रमुखता से छाया रहेगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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