Dehradun News: उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधाम और बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अधीन आने वाले 47 मंदिरों की मर्यादा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। लंबे समय से उठ रही मांगों के बीच अब बीकेटीसी ने अपने मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
धार्मिक संगठनों की मांग और 'सनातन' की परिभाषा
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत सिख, बौद्ध और जैन समाज सनातन परंपरा का ही अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मांग विभिन्न धार्मिक संगठनों और समाज के उन लोगों की ओर से आई है जो धामों की पवित्रता और परंपराओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
अतिक्रमण और अवैध मजारों पर जताई चिंता
अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हाल के वर्षों में राज्य के जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध मजारों के निर्माण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य का माहौल खराब करने की कोशिशें हुई हैं, जिसे देखते हुए गंगा सभा जैसे संगठनों ने भी 'हर की पौड़ी' और अन्य प्रमुख तीर्थों में ऐसे प्रतिबंध की वकालत की है।
सरकार को भेजा जाएगा अंतिम प्रस्ताव
बद्री-केदार मंदिर समिति के अधीन वर्तमान में केदारनाथ और बदरीनाथ समेत कुल 47 मंदिर आते हैं। हेमंत द्विवेदी के अनुसार, बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए उत्तराखंड सरकार और शासन को भेजा जाएगा। आगामी अर्धकुंभ और चारधाम यात्रा से पहले इस कदम को 'सनातन धर्म की सुरक्षा' के बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।