देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग ने अनुशासनहीनता और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग के मामले में उप वन क्षेत्राधिकारी (डिप्टी रेंजर) कुलदीप सिंह पंवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर विभागीय गोपनीयता भंग करने और सूचना के अधिकार (RTI) के नियमों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप हैं।
क्या है पूरा मामला?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुलदीप सिंह पंवार के पास ऐसे संवेदनशील विभागीय दस्तावेज पाए गए जो उन्हें आधिकारिक रूप से कभी जारी नहीं किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दस्तावेज न तो प्रमाणित थे और न ही इन्हें RTI के तहत प्राप्त किया गया था। आरोप है कि उन्होंने अनधिकृत रूप से इन कागजों को हासिल किया और इनका दुरुपयोग किया।
निजता के अधिकार का उल्लंघन
जांच में यह भी सामने आया कि इन दस्तावेजों में एक व्यक्ति की निजी जानकारियां शामिल थीं। बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के निजी सूचनाओं का उपयोग करना संविधान द्वारा प्रदत्त 'निजता के अधिकार' (Right to Privacy) का सीधा उल्लंघन माना गया है। विभाग ने इसे कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 का स्पष्ट उल्लंघन पाया है।
BNS की धाराओं में फंस सकते हैं अधिकारी
विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ इस कृत्य को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 303, 61 और 356 के तहत गंभीर अपराध माना गया है। मुख्य वन संरक्षक (HoFF) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अधिकारी संतोषजनक जवाब देने में विफल रहे, जिसके बाद यह निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान वे शिवालिक वृत्त कार्यालय से संबद्ध रहेंगे।
