साहित्य और सेवा का संगम: युवा कवि दीपक सती "प्रसाद" का जीवन परिचय


Aapki Media AI


उत्तराखंड की पावन धरा, जहाँ का कण-कण संगीत और साहित्य की खुशबू से सराबोर है, वहीं चमोली जनपद के विकासखंड नंदानगर (ग्राम माणखी) से उभरी एक ऐसी प्रतिभा जो आज समकालीन हिंदी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है— श्री दीपक सती "प्रसाद"


वर्तमान में उत्तराखंड कारागार विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे दीपक सती जी ने सिद्ध किया है कि कर्तव्य की कठोरता के बीच भी शब्दों की कोमलता को जीवित रखा जा सकता है।

व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

  • नाम: दीपक सती "प्रसाद"
  • पिता: स्व० श्री दिलमणी प्रसाद
  • माता: श्रीमती शांता देवी
  • जन्म तिथि: 10 अगस्त 1991
  • स्थान: ग्राम-माणखी, विकासखंड-नंदानगर, जनपद-चमोली।
  • शिक्षा: एम॰ ए॰, बी॰एड॰

साहित्यिक यात्रा और कृतियाँ

दीपक सती जी की लेखनी में हिमालय की गंभीरता और कृष्ण की अनन्यता का अद्भुत मेल है। अब तक उनके दो प्रमुख काव्य संग्रह प्रकाशित होकर पाठकों की सराहना बटोर चुके हैं:

  1. हिमालय में क्या है? (2018): यह उनका प्रथम काव्य संग्रह है, जिसमें हिमालयी जीवन, संस्कृति और पर्यावरण की चुनौतियों को कविताओं के माध्यम से पिरोया गया है।
  2. "हे कृष्ण" (2022): यह द्वितीय काव्य संग्रह भगवान कृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और आध्यात्मिक दर्शन को समर्पित है।

प्रमुख सम्मान और उपलब्धियां

आपकी साहित्यिक सेवा और सामाजिक सरोकारों के लिए आपको विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित किया गया है:

  • राष्ट्रभाषा उन्नयन सम्मान (2024): पूर्व मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत जी द्वारा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु सम्मानित।
  • मतदाता जागरूकता सम्मान (2026): जनपद चमोली प्रशासन द्वारा लोकतंत्र के महापर्व में काव्य के माध्यम से जन-जागरण करने हेतु प्रदान किया गया।
  • हिंदी सेवी सम्मान (2019): नेहरू युवा केंद्र द्वारा उत्कृष्ट हिंदी सेवा हेतु।
  • अंतर्राष्ट्रीय हिंदी अधिवेशन सम्मान: भाषा सहोदरी हिंदी द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम में सम्मान पत्र।

मंच और प्रसार

दीपक सती जी की आवाज केवल पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय मंचों तक अपनी कविताओं की गूंज पहुँचाई है:

  • राष्ट्रीय मंच: दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में काव्य पाठ।
  • क्षेत्रीय मेले: ऐतिहासिक गौचर मेला, बंड विकास मेला और कुरुङ मेले में अपनी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
  • प्रसारण माध्यम: आकाशवाणी और दूरदर्शन उत्तराखंड के 'काव्यांजली' कार्यक्रम में नियमित रूप से आपका काव्य पाठ प्रसारित होता रहता है।
  • समाचार पत्र: विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में आपकी रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित होकर साहित्य जगत में विमर्श का विषय बनती हैं।

दीपक सती "प्रसाद" एक ऐसे रचनाकार हैं जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक हिंदी साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। सरकारी सेवा के कठिन दायित्वों के बीच उनका साहित्यिक अनुराग प्रेरणादायी है। चमोली की माटी का यह लाल अपनी लेखनी से भविष्य में और भी नए सोपान तय करने की ओर अग्रसर है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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