हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में लिव-इन पार्टनर की हत्या कर शव को सूटकेस में छिपाने के सनसनीखेज मामले में न्यायपालिका ने अपना कड़ा फैसला सुना दिया है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने मुख्य अभियुक्त रोहित को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, इस खौफनाक साजिश में रोहित का साथ देने वाली उसकी दूसरी प्रेमिका मंजू कुमारी को हत्या के साक्ष्य छिपाने के आरोप में पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली है। यह मामला प्रेम संबंधों में उलझी एक ऐसी कहानी है जिसका अंत एक युवती की दर्दनाक मौत के साथ हुआ।
लॉकडाउन के दौरान सूटकेस से आई बदबू ने खोला राज
इस दिल दहला देने वाली घटना की शुरुआत कोरोना काल के दौरान लगे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के समय हुई थी। ग्राम रावली महदूद निवासी मकान मालिक सुखबीर सिंह चौहान ने 25 मई 2020 को सिडकुल थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि उनके मकान के कमरा नंबर 28 में रोहित और सोनम उर्फ वर्षा लिव-इन में रहते थे। 24 मई की रात जब कमरे से असहनीय बदबू आने लगी, तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने जब मौके पर पहुंचकर बाथरूम में रखे एक सूटकेस को खोला, तो उसके अंदर प्लास्टिक के कट्टे में पैक सोनम का गला सड़ा शव बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि रोहित का उसी मकान में रहने वाली एक अन्य युवती मंजू से भी प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसे लेकर सोनम और रोहित के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।
पड़ोसी ने दी थी जानकारी, 12 गवाहों ने दिलाई सजा
शासकीय अधिवक्ता कुशल पाल सिंह चौहान के अनुसार, इस केस की पैरवी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। हत्याकांड की वजह एक पेचीदा 'लव ट्रायंगल' था। रोहित और मंजू ने मिलकर सोनम को रास्ते से हटाने की साजिश रची और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए सूटकेस में बंद कर दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पहले मंजू को सिडकुल के डेंसो चौक और बाद में मुख्य आरोपी रोहित को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाह पेश किए गए, जिनकी गवाही और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। मकान मालिक सुखबीर सिंह की छह साल तक चली मजबूत कानूनी पैरवी ने मृतका के परिजनों को इंसाफ दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
न्याय की जीत: मृतका सोनम को मिला इंसाफ
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मुख्य आरोपी रोहित ने न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य छिपाने की भी कोशिश की, इसलिए उसे धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराया गया है। वहीं, मंजू को हत्या के सबूतों को खुर्द-बुर्द करने में सहयोग करने का दोषी पाया गया। गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों आरोपी जेल में बंद थे और अब वे अपनी सजा काटेंगे। इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भले ही इंसाफ मिलने में वक्त लगा, लेकिन कानून की नजर से कोई अपराधी बच नहीं सकता। हरिद्वार के इस चर्चित हत्याकांड के फैसले से सिडकुल और आसपास के क्षेत्रों में कानून के प्रति जनता का विश्वास और सुदृढ़ हुआ है।
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