मंगलौर में रमजान की धूम: इबादत और अकीदत के साथ शुरू हुआ मुकद्दस महीना, बाजारों में बढ़ी रौनक, खजूर और फलों की मांग तेज


Aapki Media AI


इस्लाम मजहब के सबसे पाक और मुकद्दस महीने 'रमजान' का आगाज हो चुका है, जिसके साथ ही मंगलौर और आसपास के क्षेत्रों में रूहानियत का माहौल बन गया है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह महीना आत्म-शुद्धि, त्याग और खुदा की इबादत का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है। रमजान की शुरुआत होते ही मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ गई है और लोग पूरी अकीदत के साथ रोजे रख रहे हैं। मान्यता है कि इस महीने में की गई हर छोटी से छोटी इबादत का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग दिन में रोजा रखने के साथ-साथ रात में तरावीह की नमाज और कुरान की तिलावत में मशगूल नजर आ रहे हैं।

बाजारों में छाई रौनक और बढ़ी खरीदारी

रमजान की दस्तक के साथ ही मंगलौर के बाजारों की तस्वीर भी बदल गई है। शाम के समय इफ्तार की तैयारी के लिए बाजारों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। विशेष रूप से खजूर और ताजे फलों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है, क्योंकि खजूर से रोजा खोलना सुन्नत माना जाता है। दुकानों पर विभिन्न प्रकार के खजूर, फेनी, सूतली और अन्य लजीज पकवानों की महक बिखरी हुई है। खरीदारों का उत्साह इतना है कि सुबह से लेकर देर रात तक बाजारों में चहल-पहल बनी रहती है। व्यापारियों का कहना है कि रमजान के चलते व्यापार में भी तेजी आई है और लोग इफ्तारी के सामान के साथ-साथ ईद की तैयारियों के लिए भी अभी से खरीदारी में जुट गए हैं।

धर्मगुरु का संदेश: गरीबों की मदद और गुनाहों से तौबा

इस मुकद्दस महीने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती मासूम कासमी ने समुदाय को विशेष संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना केवल भूखा और प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने चरित्र को संवारने और खुदा के करीब जाने का वक्त है। मुफ्ती मासूम कासमी ने जोर देकर कहा कि इस महीने में हर मुसलमान को अपने गुनाहों से तौबा करनी चाहिए और बुराइयों से बचना चाहिए। उन्होंने विशेष अपील की कि इबादत के साथ-साथ अपने आसपास के गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों का खास ख्याल रखा जाए। उनके अनुसार, रमजान हमें हमदर्दी और भाईचारे का पाठ पढ़ाता है, इसलिए जकात और खैरात के जरिए समाज के पिछड़े वर्ग को भी अपनी खुशियों में शामिल करना हर संपन्न व्यक्ति का फर्ज है।

भाईचारे और सौहार्द की मिसाल

रमजान का यह महीना मंगलौर में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश कर रहा है। प्रशासन ने भी पवित्र महीने को देखते हुए बिजली, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं ताकि रोजेदारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। जगह-जगह सामूहिक इफ्तार के आयोजनों की तैयारियां भी की जा रही हैं, जो आपसी प्रेम और एकता का प्रतीक बनती हैं। कुल मिलाकर, रमजान के इस रूहानी सफर ने पूरे शहर को भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर कर दिया है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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