उत्तराखंड की चुनावी बिसात: 'बूथ मैनेजमेंट' में कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ा, 19 सीटों पर बीजेपी का खाता तक नहीं खुला; चौंकाने वाली रिपोर्ट

देहरादून: उत्तराखंड में प्री एसआईआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया के बीच एक बेहद रोचक आंकड़ा सामने आया है। खुद को दुनिया की सबसे बड़ी और कैडर-आधारित पार्टी कहने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) बूथ स्तर पर एजेंट (BLA) तैनात करने के मामले में अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से पिछड़ती नजर आ रही है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की कई महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर भाजपा अपना खाता तक नहीं खोल पाई है, जबकि कांग्रेस इस मोर्चे पर बाजी मारती दिख रही है।


1. क्या है बीएलए (BLA) और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट को अपडेट करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट (BLA) नामित करने होते हैं। ये एजेंट सुनिश्चित करते हैं कि मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी न हो और उनके दल के समर्थकों के नाम सही ढंग से दर्ज हों।

  • कुल लक्ष्य: प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों के लिए कुल 11,733 एजेंट बनाए जाने हैं।

2. आंकड़ों की बाजीगरी: कांग्रेस 803 कदम आगे

कुल संख्या के आकलन में कांग्रेस ने भाजपा पर बढ़त बना ली है:

  • कांग्रेस के कुल बीएलए: 7,968
  • भाजपा के कुल बीएलए: 7,165
  • अंतर: कांग्रेस के पास भाजपा के मुकाबले 803 एजेंट अधिक हैं।

3. जिलेवार रिपोर्ट: कहाँ कौन भारी?

जिलाकुल बूथभाजपा के BLAकांग्रेस के BLA
रुद्रप्रयाग362359362 (100%)
देहरादून18829121047
हरिद्वार17159461523
पिथौरागढ़611611 (100%)211
उधम सिंह नगर1464285609
चमोली592552575

4. भाजपा के गढ़ में ही 'जीरो' पर आउट! 

इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ऐसी 19 विधानसभा सीटें हैं जहाँ भाजपा एक भी बीएलए नामित नहीं कर पाई है। इनमें से 13 सीटों पर वर्तमान में भाजपा के विधायक हैं।

  • प्रमुख सीटें: देहरादून कैंट, राजपुर रोड, धर्मपुर, विकासनगर, रुड़की, रुद्रपुर और सितारगंज।
  • हैरानी की बात: अपनी ही सीटों पर एजेंट न बना पाना भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल खड़ा कर रहा है।

दूसरी ओर, कांग्रेस भी 10 सीटों पर एक भी एजेंट नहीं बना पाई है, जिनमें से 5 सीटों पर कांग्रेस के ही विधायक हैं (जैसे चकराता, खटीमा और किच्छा)।

5. राजनीतिक बयानबाजी तेज

कांग्रेस इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती। कांग्रेस नेता अमेंद्र बिष्ट का कहना है कि जो पार्टी खुद को सबसे बड़ी कहती है, उसके पास एजेंट तक नहीं हैं। वहीं, भाजपा नेता मथुरा दत्त जोशी का तर्क है कि प्रक्रिया अभी जारी है और भाजपा अपने स्तर से काम कर रही है।

6. विश्लेषण: क्या ढीला पड़ रहा है भाजपा का पन्ना प्रमुख मॉडल?

भाजपा हमेशा अपने 'पन्ना प्रमुख' और 'बूथ प्रबंधन' के लिए जानी जाती रही है। लेकिन इन आंकड़ों से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं ग्रास-रूट लेवल पर तालमेल की कमी है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में कांग्रेस की बड़ी बढ़त यह संकेत दे रही है कि आने वाले चुनावों में जमीनी लड़ाई काफी दिलचस्प होने वाली है।

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