देहरादून, 17 फरवरी 2026: उत्तराखंड की राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में अब पर्चा बनवाने के लिए घंटों लाइन में लगने के दिन लद गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा लागू की गई आभा आईडी (ABHA ID) प्रणाली मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। जनवरी माह से शुरू हुई इस डिजिटल व्यवस्था ने न केवल पंजीकरण को आसान बनाया है, बल्कि अस्पताल परिसर में होने वाली भारी भीड़ को भी नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है।
1. क्या है 'आभा आईडी' और कैसे हुआ ओपीडी रजिस्ट्रेशन आसान?
आभा आईडी यानी 'आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट'। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत मरीज घर बैठे अपने मोबाइल से पंजीकरण (ओपीडी पर्चा) कर सकते हैं।
- ऑनलाइन अपॉइंटमेंट: मरीज 'आभा ऐप' के माध्यम से घर से ही अपना टोकन नंबर प्राप्त कर लेते हैं।
- स्कैन और शेयर (QR Code): अस्पताल पहुँचने पर केवल क्यूआर कोड स्कैन करना होता है और पर्चा तुरंत तैयार हो जाता है।
- बदलाव की लहर: दून अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में कुल पंजीकरण का 60 से 70 प्रतिशत कार्य अब 'आभा आईडी' के माध्यम से हो रहा है।
2. मरीजों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन की इस पहल से मरीजों को कई स्तर पर लाभ मिल रहे हैं:
- समय की भारी बचत: अब मरीजों को खिड़की पर घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता। वे सीधे संबंधित ओपीडी (OPD) तक पहुँच रहे हैं।
- डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड: आभा आईडी के माध्यम से मरीज का संपूर्ण मेडिकल इतिहास (जांच रिपोर्ट, पुरानी दवाइयां) डिजिटल रूप में सुरक्षित रहता है।
- बार-बार जानकारी देने से मुक्ति: एक बार आभा आईडी बनने के बाद मरीज को बार-बार अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं होती।
- रिपोर्ट्स तक सीधी पहुँच: लैब रिपोर्ट और दवाइयों का विवरण भी ऐप के माध्यम से आसानी से सुलभ हो जाता है।
3. महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष राहत
दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए यह व्यवस्था संजीवनी बनकर आई है। अस्पताल में उपचार कराने आई मरीज संगीता बडोला ने बताया कि ऑनलाइन पर्चा बनाने की सुविधा से उन्हें अब अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
4. मेडिकल सुपरिटेंडेंट का बयान: डिजिटलीकरण की ओर बढ़ते कदम
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि यह राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
"आभा आईडी से न केवल रजिस्ट्रेशन सुगम हुआ है, बल्कि मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रूप में संरक्षित की जा रही है। इससे डॉक्टरों को मरीज के पुराने इलाज को समझने में आसानी होती है। वर्तमान में 70% मरीज इस विकल्प को चुन रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव है।"
5. ऑफलाइन विकल्प भी है बरकरार
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो मरीज अभी डिजिटल तकनीक या स्मार्ट फोन के उपयोग में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए पूर्व की भांति ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी जारी है। प्रशासन का लक्ष्य धीरे-धीरे सभी मरीजों को डिजिटल माध्यम की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सुगमता बनी रहे।
