देहरादून, 17 फरवरी 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन 'आधुनिक उत्तराखंड' को धरातल पर उतारने के लिए आवास विभाग ने कमर कस ली है। प्रदेश की शहरी यातायात व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए ई-बीआरटीएस (E-BRTS), पीआरटी (Personal Rapid Transit) और रोपवे (Ropeway) परियोजनाओं को अब फाइनल टच दिया जा रहा है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने इन परियोजनाओं की मैराथन समीक्षा के बाद देहरादून से मसूरी डायवर्जन तक स्थलीय निरीक्षण कर साफ कर दिया है कि राज्य सरकार अब किसी भी देरी के मूड में नहीं है।
1. देहरादून: 31.5 किमी का ई-बीआरटीएस मेगा कॉरिडोर
राजधानी देहरादून की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए ई-बीआरटीएस (Electric Bus Rapid Transit System) सबसे बड़ा हथियार बनेगा।
- पहला कॉरिडोर: आईएसबीटी (ISBT) से रायपुर तक।
- विस्तार: इसकी कुल लंबाई 31.52 किमी होगी, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
- प्रायोरिटी रूट: सचिव ने आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन तक के 17 स्टेशनों का निरीक्षण किया। आईएसबीटी पर स्टेशन निर्माण के लिए 0.64 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
2. पीआरटी (PRT) सिस्टम: छोटी ट्रेनें, बड़ा समाधान
देहरादून और हरिद्वार में पीआरटी (Personal Rapid Transit) यानी 'पॉड टैक्सियों' का जाल बिछाया जाएगा।
- देहरादून के 3 कॉरिडोर:
- क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक
- पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
- गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क
हरिद्वार के 4 कॉरिडोर: हरिद्वार में सीतापुर से भारत माता मंदिर और सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर जैसे 20.73 किमी लंबे नेटवर्क पर 21 स्टेशन बनाए जाएंगे। यह विशेषकर कुंभ और कांवड़ जैसे बड़े मेलों में वरदान साबित होगा।
3. ऋषिकेश-नीलकंठ रोपवे: श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी
त्रिवेणी घाट (ऋषिकेश) से प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को सभी आवश्यक एनओसी (NOC) मिल चुकी हैं।
- फॉरेस्ट क्लीयरेंस: स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन कर दिया गया है।
- निवेश: इस प्रोजेक्ट में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए 30 साल के कंसेशन पीरियड को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इससे नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं को घंटों के जाम और खतरनाक चढ़ाई से मुक्ति मिलेगी।
4. हरिद्वार इंटीग्रेटेड रोपवे और पार्किंग पॉलिसी
हरिद्वार में डी.डी.यू. पार्किंग–चण्डी देवी–मनसा देवी को जोड़ते हुए एक 'मल्टीमॉडल हब' विकसित किया जा रहा है।
- डेडलाइन: इसकी डी.एफ.सी. (DFC) प्रक्रिया के लिए 18 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
- पार्किंग पॉलिसी 2022: सचिव ने स्पष्ट किया कि बिना बेहतर पार्किंग प्रबंधन के कोई भी ट्रांसपोर्ट सिस्टम सफल नहीं हो सकता। इसलिए कार पार्किंग पॉलिसी-2022 को इन सभी प्रोजेक्ट्स के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा।
5. सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का विजन: ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट
आवास सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रोजेक्ट्स को TOD (Transit Oriented Development) मॉडल पर विकसित किया जाए। इसका मतलब है कि स्टेशनों के आसपास सुनियोजित शहरी विस्तार होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य उत्तराखंड के शहरों को विश्वस्तरीय ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर देना है, जो न केवल जाम खत्म करे बल्कि पर्यटन और आर्थिकी को भी नई गति दे।"
