आगामी 7 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे के साथ ही भाजपा आधिकारिक तौर पर 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक देगी। धामी सरकार के तीन साल (23 मार्च को पूर्ण) पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशाल जनसभा के जरिए भाजपा अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाएगी। शाह के इस दौरे के ठीक बाद, 22 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी श्रीनगर (गढ़वाल) में एक बड़ी रैली को संबोधित करेंगे।
क्या है 'टोली बैठक'? 24 दिग्गजों की सीक्रेट क्लास
रैली के बाद होने वाली 'टोली बैठक' राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार, इस विशेष बैठक में कोर ग्रुप के 14 सदस्यों के अलावा 9 अन्य प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है। कुल 24 नेताओं की यह टोली अमित शाह की मौजूदगी में उत्तराखंड के राजनीतिक भविष्य का रोडमैप तैयार करेगी।
बैठक में शामिल होने वाले 24 बड़े चेहरे:
| श्रेणी | प्रमुख नाम |
| कोर ग्रुप (14 सदस्य) | सीएम पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, संगठन महामंत्री अजय, मदन कौशिक, सभी 7 सांसद (लोकसभा/राज्यसभा), कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और धन सिंह रावत। |
| विशेष आमंत्रित (9 नेता) | 3 प्रदेश महामंत्री (दीप्ति रावत, कुंदन परिहार, तरुण बंसल), पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा। |
एजेंडा: कैबिनेट विस्तार और दायित्वों का बंटवारा
महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया है कि इस बैठक का मुख्य केंद्र 2027 चुनाव की रणनीति है। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि बैठक में दो सबसे प्रतीक्षित मुद्दों पर मुहर लग सकती है:
- कैबिनेट विस्तार: मंत्रिमंडल में खाली पदों को भरने और फेरबदल की संभावना।
- दायित्व बंटवारा: कार्यकर्ताओं को विभिन्न निगमों और बोर्डों में जिम्मेदारी देने पर अंतिम चर्चा।
चुनावी मोड में भाजपा: संगठन की नई धार
भाजपा इस बार 'समांतर रणनीति' पर काम कर रही है। एक तरफ जनता के बीच रैलियों का आयोजन हो रहा है, तो दूसरी तरफ 'टोली बैठक' जैसे क्लोज-डोर सत्रों में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनौतियों से निपटने की योजना बन रही है। हरिद्वार की इस रैली को भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की जाएगी।