बागेश्वर: वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम महीना (मार्च) अपने आधे पड़ाव पर है और इसी के साथ उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने बागेश्वर जिले में वसूली अभियान तेज कर दिया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जिले में सरकारी और गैर-सरकारी उपभोक्ताओं पर लगभग 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बकायेदारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में आम जनता से ज्यादा सरकारी विभाग 'डिफ़ॉल्टर' बने हुए हैं।
वसूली अभियान: मुख्य आंकड़े और विभाग
| विवरण | राशि / जानकारी |
| कुल बकाया (बागेश्वर जिला) | ₹15 करोड़ (लगभग) |
| अब तक की कुल वसूली | ₹2 करोड़ 35 हजार |
| स्वास्थ्य विभाग (जिला अस्पताल) | ₹6 लाख से अधिक बकाया |
| शिक्षा विभाग | ₹5 लाख से अधिक बकाया |
| अन्य प्रमुख बकायेदार | PWD, BSNL, सिंचाई विभाग |
सरकारी विभागों की कछुआ चाल, ट्रेजरी पर टिकी उम्मीद
बिजली विभाग की सहायक अभियंता (राजस्व) पूजा पंत ने जानकारी देते हुए बताया कि बकायेदारों की सूची में सरकारी कार्यालय सबसे ऊपर हैं। हालांकि, इन विभागों का बजट ट्रेजरी (कोषागार) के माध्यम से धीरे-धीरे जमा हो रहा है, लेकिन बकाया राशि इतनी बड़ी है कि विभाग के लिए लक्ष्य हासिल करना एक चुनौती बना हुआ है।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभागों पर लाखों का बिल लंबित होने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) और सिंचाई विभाग भी बड़े बकायेदारों की श्रेणी में शामिल हैं।
माइक से अलर्ट और कनेक्शन काटने की चेतावनी
विद्युत विभाग अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सहायक अभियंता ने स्पष्ट किया कि:
- जागरूकता अभियान: जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लाउडस्पीकर (माइक) के माध्यम से उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए लगातार अलर्ट किया जा रहा है।
- कठोर कार्रवाई: यदि समय रहते बिलों का भुगतान नहीं किया गया, तो विभाग बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के विद्युत संयोजन (Connection) काटने की कार्रवाई शुरू कर देगा।
- राजस्व लक्ष्य: मार्च क्लोजिंग को देखते हुए राजस्व वसूली के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो घर-घर और दफ्तर-दफ्तर जाकर वसूली सुनिश्चित कर रही हैं।
आम जनता बनाम सरकारी तंत्र
जहां एक ओर आम आदमी का बिल बकाया होने पर तुरंत बिजली काट दी जाती है, वहीं सरकारी विभागों पर लाखों का बकाया होने के बावजूद आपूर्ति जारी रखना विभाग के लिए मजबूरी बन जाती है। हालांकि, इस बार विभाग ने साफ कर दिया है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यदि भुगतान नहीं हुआ, तो नियम सभी के लिए समान होंगे।
बागेश्वर में 15 करोड़ की यह बकायेदारी जिले के विकास कार्यों और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि मार्च के शेष दिनों में विभाग अपने 15 करोड़ के लक्ष्य में से कितनी रिकवरी कर पाता है।
